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नहर ज़ुबैदा

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जुबैदा नहर का टूटा हुआ भाग

ज़ुबैदा नहर: सऊदी अरब में ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण नहर थी। इसके निर्माण का श्रेय तीसरे इस्लामिक खिलाफत (शासन) अर्थात अब्बासी ख़लीफ़ा, हारुन अल-रशीद की पत्नी ज़ुबैदा बिन्त जाफ़र को दिया जाता है।

जुबैदा ने अपनी आंखों से पानी की कमी के कारण हज यात्रियों और मक्का के लोगों को होने वाली कठिनाइयों और परेशानियों को देखा था इसलिए उन्होंने मक्का में एक नहर बनाने का फैसला किया। इससे पहले भी वह मक्का के लोगों को बहुत सारा धन दिया करती थीं और हज तथा उमराह के लिए मक्का आने वालों के साथ उनका व्यवहार अत्यंत उदार था।

जब नहर खोदने की योजना सामने आई तो विभिन्न क्षेत्रों से विशेषज्ञ इंजीनियरों को बुलाया गया। मक्का से 35 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में हुनैन घाटी में "जबल ताड" से एक नहर खोदने के लिए एक कार्यक्रम विकसित किया गया था।

एक अन्य नहर, जिसका पानी " जबल क़ारा " से " वादी नुमान " की ओर बहता था को भी ज़ुबैदा नहर में शामिल किया गया। यह स्थान अराफात से 12 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में स्थित था।

इसके अलावा मीना के दक्षिण में रेगिस्तान में बीर ज़ुबैदा नाम का एक तालाब था जिसमें बारिश का पानी इकट्ठा होता था। इससे भी पानी सात अलग-अलग जलसेतुओं के ज़रिए नहर तक पहुँचाया जाता था, फिर वहाँ से एक छोटी नहर मक्का और दूसरी अराफ़ात के मैदान में स्थित निमरा मस्जिद तक पहुँचाई जाती थी। इस भव्य परियोजना पर सत्रह मिलियन (17,00,000) दीनार खर्च किए गए।[1][2]

इन्हें भी देखें

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  1. "وقف عين زبيدة | الهيئة العامة للأوقاف". www.awqaf.gov.sa (अरबी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2025-07-10.
  2. क़िंदील (2020-07-25). "ज़ुबैदा और नहरे ज़ुबैदा". QindeelOnline (अमेरिकी अंग्रेज़ी भाषा में). मूल से से 18 जून 2025 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 2025-07-10.