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नस्ख़ लिपि

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नस्ख़ लिपि में लिखित सूरा अल-फ़ातिहा

नस्ख़ (अरबी: نسخ) इस्लामी सुलेख में एक छोटी सी, गोल लिपि है। नस्ख़ इस्लामी सुलेख के सबसे पहली लिपियों में से एक है तथा इसकी सरलता हेतु लिपि का प्रयोग क़ुरान एवं अन्य पुस्तकों के लेखन और प्रतिलेखन में किया जाता है।[1]

उसकी 1617 की पुस्तक ग्रमैटिका अरेबिका में, थॉमस वान एर्पे ने नस्ख़ को "आर्यतम और सच्ची लिपि" कहा।[2]

Old Arabic Manuscripts Soft Rounded Arabic Script (Naskh)
पपाइरस पर लिखित नस्ख़ लिपि, 8वीं शताब्दी ई.।
Manuscript of Malik's Muwatta in soft, flowing Naskh script
PERF सं. 731, मालिक की मुवत्ता की सबसे प्रारंभिक पांडुलिपि। बाएँ में कोमल नस्ख़ लिपि में लिखित बाब अल-तरग़ीब फ़ी-सदक़ा की सामग्रियाँ है, दूसरी शताब्दी हि.।

नस्ख़ लिपि का पहला प्रयोग इस्लामी कालदर्शक की पहली शताब्दी में पाई गई थी।[3] इसे उस समय कूफ़ी लिपि में त्रुटियों हेतु अब्दुल मालिक इब्न मरवान के आदेश पर स्थापित किया गया था।[1]

इब्न मुक़ला को इस्लामी सुलेख के "छह कलमों" का संस्थापक माना जाता है, जिनमें सुलुस, तौक़ी, रिक़ा, मुहक़्क़क़ और रैहानी शामिल हैं।[1] इन्हें "आनुपातिक लिपियों" या "छह लिपियों" कहा जाता है।[4]

माना जाता है कि कूफ़ी नस्ख़ से पुरानी है, किंतु दोनों लंबे समय तक साथ में मौजूद थे,[5] क्योंकि उनके अलग उद्देश्य थे।[6] कूफ़ी का प्रयोग सजावट में किया जाता था, जबकि नस्ख़ रोज़ के लिखने में शामिल था।[7] नस्ख़ का प्रयोग इस्लामी कालदर्शक के पहली शताब्दी में शुरू हुआ।[8]

अलिफ़ को नीचे बाईं ओर मुड़ती सीधी रेखा के रूप में लिखा जाता है।[1] नस्ख़ विभिन्न ध्वनियों का अंतर अक्षर के ऊपर या नीचे एक से तीन बिंदुओं के रूप में विशेषक चिह्नों से करता है, जिस प्रकार यह स्पष्ट होता है।[6] नस्ख़ एक क्षैतिज आधार रेखा का प्रयोग करता है; जब एक अक्षर पिछले अक्षर की पूँछ से शुरू होता है, रेखा को तोड़कर उठाया जाता है।[9] 16वीं शताब्दी के क़ुस्तुंतुनिया में, शेख़ हम्दुल्ला ने नस्ख़ और अन्य छह कलमों को पुनःअभिकल्पित किया, ताकि यह और सटीक और कम गहरा दिखे।[10]

  1. 1 2 3 4 Blair, Sheila (2006). Islamic calligraphy. Edinburgh University Press. ISBN 9780748612123.
  2. Thomas Milo Arabic Typography, in Encyclopedia of Arabic Language and Linguistics, Brill 2013
  3. بىاض, Anjuman-e-Farsi, 1977, p. 77
  4. Roxburgh, David J. (2007). Writing the word of God: calligraphy and the Qur'an. Houston: Museum of Fine Arts, Houston. ISBN 9780300142006. ओसीएलसी 180190749.
  5. "Naskh Script- Arabic calligraphy" (अमेरिकी अंग्रेज़ी भाषा में). 2017-01-24. अभिगमन तिथि: 2024-10-08.
  6. 1 2 Ali, A. K. M. Yaqub (1984). "Muslim Calligraphy: ITS Beginning and Major Styles". Islamic Studies. 23 (4): 373–379. जेस्टोर 20847281.
  7. The splendor of Islamic Abdelkebir. Sijelmassi, Mohamed. New York: Thames and Hudson. 1996. ISBN 0500016755. ओसीएलसी 34275017.{{cite book}}: CS1 maint: others (link)
  8. "Naskhī script | Arabic, Islamic, Writing | Britannica". www.britannica.com (अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2024-09-26.
  9. Ory, Solange (2000-11-30). "Calligraphy". Encyclopaedia of the Qurʾān (English भाषा में). 1.{{cite journal}}: CS1 maint: unrecognized language (link)
  10. Zakariya, Muhammad (2003-11-30). "Calligraphy". Encyclopedia of the Modern Middle East and North Africa (English भाषा में). 1.{{cite journal}}: CS1 maint: unrecognized language (link)