नवाब सैयद वारिस अली मिर्ज़ा खान बहादुर
सैय्यद वारिस अली मिर्ज़ा खान बहादूर (बंगाली: ওয়ারিস আলী মির্জা; 14 नवम्बर 1901 – 20 नवम्बर 1969) मुर्शिदाबाद के अंतिम नवाब रहे। उनके निधन के बाद उनकी संतानों में पारिवारिक विवाद आरम्भ हो गया जिसका हल सन् 2014 में भारत के सर्वोच्च्य न्यायायल द्वारा किया गया।[1] वो उनके पिता वासिफ अली मिर्ज़ा के उत्तराधिकारी के रूप में नवाब बने।
जीवनी
[संपादित करें]वारिस अली का जन्म 14 नवम्बर 1901 को मुर्शिदाबाद में हुआ। वो वासिफ अली मिर्ज़ा के सबसे बड़े पुत्र थे। उनकी माँ का नाम सुल्तान दुल्हन जहाँ बेगम साहिबा था। वारिस अली के नाना वला सैयद हुसैन अली मीर्जा बहादूर थे। वारिस अली सन् 1959 से 20 नवम्बर 1969 को कलकत्ता में उनके निधन तक नवबा रहे। यद्यपि उनके निधन के समय उनके तीन पुत्र और तीन पुत्रियाँ थे। इसके बाद उनके परिवार में उत्तराधिकार का विवाद आरम्भ हो गया। इस विवाद का हल भारत के उच्चतम न्यायालय ने अगस्त 2014 में किया जिसके अनुसार वारिस अली मिर्ज़ा का उत्तराधिकारी और मुर्शिदाबाद के चौथे नवाब उनका भतीजा अब्बास अली मिर्ज़ा हैं।[1]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- 1 2 द टाइम्स ऑफ़ इंडिया (20 अगस्त 2014). "Murshidabad gets a Nawab again, but fight for assets ahead". द टाइम्स ऑफ़ इंडिया. अभिगमन तिथि: 12 मार्च 2015.
बाहरी कड़ियाँ
[संपादित करें]- वारिस अली मिर्ज़ा को समर्पित वेबसाइट Archived 2012-08-24 at the वेबैक मशीन
नवाब सैयद वारिस अली मिर्ज़ा खान बहादुर जन्म: 14 नवम्बर 1901 मृत्यु: 20 नवम्बर, 1969 | ||
| पूर्वाधिकारी वासिफ़ अली मिर्ज़ा |
मुर्शिदाबाद के नवाब 1959 - 20 नवम्बर 1969 |
उत्तराधिकारी अब्बास अली मिर्ज़ा |