नमक का दरोगा

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नमक का दरोगा प्रेमचंद द्वारा रचित लघु कथा है।[1] इसमें एक ईमानदार नमक निरीक्षक की कहानी को बताया गया है जिसने कालाबाजारी के विरुद्ध आवाज उठाई।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. अमरेश द्विवेदी (१० सितम्बर २०१२). "कौन है आज का प्रेमचंद?". बीबीसी हिन्दी. अभिगमन तिथि ११ जून २०१५.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]