नबान्न
नबान्न बांग्लादेश तथा भारत के पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और असम के बराक घाटी क्षेत्र में मनाया जाने वाला एक कृषि-आधारित त्योहार है। यह उत्सव सामान्यतः भोजन तथा गीत-नृत्य के माध्यम से मनाया जाता है। इस पर्व में पिठा जैसे विविध प्रकार के खाद्य पदार्थ तैयार किए जाते हैं। यह उत्सव असम के न-खोवा और ओड़िशा के नुआखाई के समकक्ष माना जाता है।

उत्सव
[संपादित करें]इस त्योहार में मेले का आयोजन होता है, जिसे नबान्न मेला कहा जाता है। हिंदू और मुसलमान — दोनों प्रमुख धार्मिक समुदायों के ग्रामीण तथा स्थानीय लोग समान रूप से भाग लेते हैं। इस उत्सव से जुड़े सम्मेलनों में कवियों, संगीतकारों, बाउल गायकों और चित्रकारों को आमंत्रित किया जाता है।
समाज और संस्कृति पर प्रभाव
[संपादित करें]इस पर्व से जुड़े विभिन्न रीति-रिवाजों से अनेक नृत्य और संगीत की शैलियों का विकास हुआ है। उदाहरण के रूप में छऊ, बिहू आदि। साथ ही “नबान्न” नाम विभिन्न ग्रामीण कल्याण योजनाओं और भंडार गृहों से भी जुड़ा हुआ है।[1][2] इसे IPTA आंदोलन तथा बंगाली नाट्यकला से भी जोड़ा जाता है।
१९४० के दशक में IPTA का मार्ग-प्रदर्शक नाटक नबान्न मंच पर वामपंथी राजनीतिक विचारधारा को प्रेरणा प्रदान करता था,[3] जिसमें उत्पल दत्त जैसे नाट्य-जगत के व्यक्तित्व उभरे थे।
और देखें
[संपादित करें]संदर्भ
[संपादित करें]- ↑ "Home – Information Technology & Communications Department – Government of AP". Apit.gov.in. मूल से से 27 September 2007 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 22 August 2012.
{{cite web}}: Unknown parameter|deadurl=ignored (help) - ↑ "ICT R&D Grants Programme for Asia Pacific — Asia-Pacific Development Information Programme". मूल से से 8 फ़रवरी 2012 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 15 नवंबर 2025.
- ↑ "The theatre and class contradictions". मूल से से 2007-10-21 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 2025-03-20.
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