नदीम श्रवण

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नदीम-श्रवण हिन्दी फिल्मों की एक प्रसिद्ध संगीतकार जोड़ी है। जो पहली बार 1973 में एक दुसरे से मिले

फिल्मो मे संगीत देने के जज्बे ने दोनो को मुंबई ले आया फिर शुरु हूआ संघर्ष ईस निर्माता से मिलना उस निर्माता से मिलना पर कुछ फायदा नहीँ हुआ फिर एक दिन अचानक एक भोजपुरी फिल्म दंगल का ऑफर आया तो दोनो ने तुरंत हा कर दी और बेहतरीन संगीत दिया साल था 1977 फिर चार पाच साल के बाद एक हिँदी फिल्म मैने जीना सिख लिया का ऑफर आया 1981 कि बात है पहला गीत गवाया सलमा आगा से 'जरा जरा' अच्छा गीत है ये फिर भी संघर्ष जारी रहा 1989 तक इस दौरान 16 फिल्मो मे संगीत दिया 'B' ग्रेड थी उसी समय दिल्ली से एक उँची महत्वकांक्षा लिये मुंबई आये टि सिरीज कंपनी के निर्माता गुलशन कुमार से मुलाकात हुई ऊस समय वो अपनी फिल्म लाल दुपट्टा मलमल का मे व्यस्त थे फिल्म रिलीज हुई

पर कुछ खास चली नहीँ पर गीत बहोत लोकप्रिय हुये इसका संगीत आनंद मिलीँद ने दिया था वहीँ दुसरी ओर महेश भट फिल्म आशिकी का प्रस्ताव लेकर आये जो पुरी तरह संगीत पर आधारीत थी ऐसे मे किसी अनुभवी संगीतकार कि जरुरत थी पर दोनो (महेश भट और गुलशन कुमार) न ई प्रतिभा को मौका देना चाहते थे दे दिया नदीम श्रवण को मौका और फिर दोस्तो जो हुआ उसकी शायद कोई मिसाल हो 1990 मे ये फिल्म रिलीज हुई तो इसके संगीत ने तुफान मचा दिया शायद कोई उस जमाने मे ऐसा युवक हो जिसने ये फिल्म ना देखी हो

सन्दर्भ[संपादित करें]