नईम साबिर

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।खुज़्दार से आये कार्यकर्ता थे नईम साबिरनईम साबिर ख़ुज़दार, बलूचिस्तान, के एक प्रमुख सामाज सेवक और मानवाधिकार कार्यकर्ता थे। वह १९९७ से पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग से जुड़े रहे और इस ज़िले में मानवाधिकारों का प्रचार कर रहे थे। इससे कुछ समय पूर्व वह आयोग को विद्यार्थियों, वकीलों, राजनीतिज्ञों और अन्य नागरिकों के अचानक गायब होने और बाद में गोलियों से छलनी, टुकड़े-टुकड़े हालत में कूड़ेदानों मिलने वाली लाशों के मामलों को दर्ज करने में मदद करते रहे थे।

साबिर को दो सशक्त मोटर-साईकिल सवार लोगों ने मार्च २०११ में गोलियों से भून कर मार डाला। बलूच मसलह दिफ़ाई तंज़ीम नामक एक संगठन ने बाद में इस हत्या की ज़िम्मेदारी ली। माना जाता है कि हत्या का कारण पाकिस्तान के केन्द्रीय नेत्रित्व द्वारा तेल और गैस से मालामाल बलूचिस्तान पर अपना पूर्ण नियंत्रण बनाए रखने का प्रयास है।[1]

हत्या की निन्दा और प्रभाव[संपादित करें]

नईम साबिर की हत्या की निन्दा पाकिस्तान ही में नहीं बल्कि भारत और विश्व-स्तर पर भी की गई। भारत के एक पत्रकार सुभाष गाताड़े ने अपने एक लेख में लिखा है एक ही वर्ष में पाकिस्तान में पंजाब के राज्यपाल रहे सलमान तासीर की मौत के दो माह बाद मारे गए शाहबाज बट्टी या बलूचिस्तान में पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग के समन्वयक नईम साबिर, बलुचिस्तान विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नाजिमा तालिब, भूमाफिया के खिलाफ संघर्षरत निसार बलोच, हाजी गनी और अबु बकर जैसे मछुआरे जिन्होंने किनारे बने मैंग्रूव के पेड़ों की तबाही की सरकारी कोशिशों को पुरजोर विरोध किया था और उन तमाम पत्रकार जो उस साल मारे गए थे, इस देश के लोगों में नई सोच ला रही हैं जो धार्मिक राजनीति ही नहीं बल्कि धर्म ही से लोगों को दूर कर रही ही है। इसी की मिसाल पाकिस्तान में 'पाकिस्तान अथेइस्ट एण्ड अगनॉस्टिक्स' (पीएए) अर्थात पाकिस्तान के नास्तिक एवम अज्ञेयवादी नामक एक समूह की स्थापना हुई है, जिनकी तादाद धीरे धीरे बढ़ रही है और जिसका प्रतीक वह वेबसाइट है जो इस समूह ने शुरू किया था। यह वेबसाइट हाल के वर्षों में काफ़ी लोकप्रिय हो चुकी है।[2]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Naeem Sabir: The Man I Knew". crisisbalochistan.com. अभिगमन तिथि February 13, 2014.
  2. "पाकिस्तान की दूसरी आवाज़ें". humsamvet.org.in. अभिगमन तिथि February 13, 2014.