नंददुलारे वाजपेयी

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आचार्य नन्ददुलारे बाजपेई
चित्र:Nand Dulare Bajpai.jpg
जन्म27 अगस्त 1906
Magrair, Unnao
मृत्युअगस्त 21, 1967
व्यवसायसमालोचक
राष्ट्रीयताIndian

नन्ददुलारे वाजपेयी (१९०६ - २१ अगस्त, १९६७ उज्जैन) हिन्दी के साहित्यकार, पत्रकार, संपादक, समीक्षक और अंत में प्रशासक भी रहे। इनको छायावादी कविता के शीर्षस्थ आलोचक के रूप में मान्यता प्राप्त है। हिंदी साहित्य: बींसवीं शताब्दी, जयशंकर प्रसाद, प्रेमचन्द, आधुनिक साहित्य, नया साहित्य: नये प्रश्न इनकी प्रमुख आलोचना पुस्तकें हैं। वे शुक्लोत्तर युग के प्रख्यात समीक्षक थे।

जीवनी[संपादित करें]

नंददुलारे वाजपेयी का जन्म उन्नाव जिले के मगरायल नामक ग्राम में सन् 1906 ई. में हुआ था। उनके पिता का नाम गोवर्धन लाल वाजपेयी तथा माता का नाम जनकदुलारी था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा हजारीबाग में संपन्न हुई। उन्होंने विश्वविद्यालय परीक्षा काशी हिंदू विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की।

उनका विवाह श्रीमती सावित्री देवी से 1925 के जनवरी महा में हुआ था। उस समय वाजपेयी जी लगभग 18 वर्ष के थे। सन 1936 में उनके प्रथम पुत्र का जन्म हुआ। इसके बाद 1941 में पुत्री व 1945 पुर्ण दुसरे पुत्र का जन्म हुआ।

  • बड़ बेटे स्वस्ति कुमार वाजपेयी जो पेशे से डॉक्टर थे। आप का विवाह पटना में हुआ।
  • बेटी पदमा का विवाह इलाहाबाद में पं॰ उमा शंकर जी शुक्ल के बेटे करूण शंकर जी सें हुआ था। वे जम्बु में स्टील सिटी प्लान्ट में जनरल मेंनेजर थे।
  • छोटे बेटे सूनृत जी का जन्म 14.1.1945 में मक्रर संक्राति को काशी में हुआ था।

वे कुछ समय तक "भारत", के संपादक रहे। उन्होंने काशी नागरीप्रचारिणी सभा में "सूरसागर" का तथा बाद में गीता प्रेस, गोरखपुर में रामचरितमानस का संपादन किया। वाजपेयी जी कुछ समय तक काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदीविभाग में अध्यापक तथा कई वर्षों तक सागर विश्वविद्यालय के हिंदीविभाग के अध्यक्ष रहे। मृत्यु के समय वे विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के उपकुलपति थे। 21 अगस्त 1967 को उज्जैन में हिंदी के वरिष्ठ आलोचक आचार्य वाजपेयी जी का अचानक निधन हो गया जिससे हिंदी संसार की दुर्भाग्यपूर्ण क्षति हुई।

शुक्लोत्तर समीक्षा को नया संबल देनेवाले स्वच्छंदतावादी समीक्षक आचार्य वाजपेयी का आगमन छायावाद के उन्नायक के रूप में हुआ था। उन्होंने छायावाद द्वारा हिंदीकाव्य में आए नवोन्मेष का, नवीन सौंदर्य का स्वागत एवं सहृदय मूल्याकंन किया। अपने गुरु आचार्य शुक्ल से बहुत दूर तक प्रभावित होते हुए भी उन्होंने भारतीय काव्यशास्त्र की आधारभूत मान्यताओं के माध्यम से युग की संवेदनाओं को ग्रहण करते हुए, कवियों, लेखकों या कृतियों की वस्तुपरक आलोचनाएँ प्रस्तुत कीं। वे भाषा को साध्य न मानकर साधन मानते थे।

कृतियाँ[संपादित करें]

वाजपेयी जी ने अनेक आलोचनात्मक ग्रंथों की रचना की है जिनमें प्रमुख हैं -

  • जयशंकर प्रसाद,
  • आधुनिक साहित्य,
  • हिंदी साहित्य : बीसवीं शताब्दी,
  • नया साहित्य : नए प्रश्न,
  • साहित्य : एक अनुशीलन,
  • प्रेमचंद : एक साहित्यिक विवेचन,
  • प्रकीर्णिका,
  • महाकवि सूरदास,
  • महाकवि निराला

इसके अतिरिक्त उन्होंने अनेक ग्रंथों का संपादन किया है। इन संपादित ग्रंथों की भूमिका मात्र से उनकी सूक्ष्म एवं तार्किक दृष्टि का सहज ही ज्ञान प्राप्त हो जाता है। समग्रत: छायावाद युग आचार्य वाजपेयी के समग्र व्यक्तित्व की संश्लिष्टि है, उसमें उनकी क्रांतदर्शी प्रज्ञा तथा अतलभेदिनी अंतर्दृष्टि विद्यमान है।