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ध्वनि कला

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डेनमार्क के एआरओएस आरहूस कुन्स्टम्यूज़ियम में जेनेट कार्डिफ़ की कृति फ़ोर्टी पार्ट मोटेट (2001)

ध्वनि कला (साउंड आर्ट) एक कलात्मक गतिविधि है जिसमें ध्वनि का उपयोग एक प्रमुख समय-आधारित माध्यम या सामग्री के रूप में किया जाता है।[1] समकालीन कला की अनेक विधाओं की तरह, ध्वनि कला भी अंतःविषय (इंटरडिसिप्लिनरी) प्रकृति की हो सकती है या मिश्रित रूपों में प्रयुक्त की जा सकती है।[2] ब्रैंडन ला बेले के अनुसार, एक कलात्मक अभ्यास के रूप में ध्वनि कला "ध्वनि की स्थिति और उसके कार्य करने की प्रक्रिया को ग्रहण करती है, उसका वर्णन करती है, उसका विश्लेषण करती है, उसका प्रदर्शन करती है और उसकी पड़ताल करती है।"[3]

पाश्चात्य कला में इसके प्रारंभिक उदाहरणों में भविष्यवादी कलाकार लुइजी रूसोलो के 'इंतोनारूमोरी' (1913) नामक शोर-उत्पादक यंत्र शामिल हैं, तथा इसके बाद दादावादियों, अतियथार्थवादियों, सिचुएशनिस्ट इंटरनेशनल और फ्लक्सस आयोजनों तथा अन्य 'हैपनिंग्स' में किए गए प्रयोग उल्लेखनीय हैं। ध्वनि कला की विविधता के कारण अक्सर इस बात पर बहस होती है कि इसे दृश्य कला, प्रयोगात्मक संगीत या दोनों के क्षेत्र में रखा जाना चाहिए।[4] ध्वनि कला जिन अन्य कलात्मक परंपराओं से विकसित हुई है उनमें संकल्पनात्मक कला (कॉन्सेप्चुअल आर्ट), न्यूनतावाद (मिनिमलिज़्म), स्थान-विशिष्ट कला (साइट-स्पेसिफिक आर्ट), ध्वनि कविता, विद्युत-ध्वनिक संगीत (इलेक्ट्रो-अकॉस्टिक म्यूज़िक), वाचिक प्रस्तुति (स्पोकन वर्ड), अग्रगामी कविता (अवां-गार्द कविता), ध्वनि दृश्य-सज्जा (साउंड सीनोग्राफी) तथा प्रयोगात्मक रंगमंच शामिल हैं।[5]

शब्द की उत्पत्ति

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बर्नहार्ड गाल के शोध के अनुसार, इस शब्द का पहला प्रकाशित प्रयोग 1974 की ईयरबुक के आवरण पर समथिंग एल्स प्रेस (Something Else Press ) द्वारा किया गया था।[6] किसी प्रमुख संग्रहालय में प्रदर्शनी के शीर्षक के रूप में इसका पहला उपयोग 1979 में न्यूयॉर्क के म्यूज़ियम ऑफ मॉडर्न आर्ट (MoMA) में आयोजित साउंड आर्ट प्रदर्शनी में हुआ, जिसमें मैगी पेन, कॉनी बेकली और जूलिया हेवर्ड की कृतियाँ प्रदर्शित की गई थीं।[7] प्रदर्शनी की क्यूरेटर बारबरा लंदन ने ध्वनि कला को परिभाषित करते हुए कहा कि यह 'संगीत की अपेक्षा कला से अधिक निकटता से संबद्ध है और सामान्यतः संग्रहालयों, कला दीर्घाओं अथवा वैकल्पिक प्रदर्शनी स्थलों में प्रस्तुत की जाती है।'[8]

1984 में न्यूयॉर्क नगर के स्कल्प्चरसेंटर में आयोजित साउंड/आर्ट नामक प्रदर्शनी पर टिप्पणी करते हुए कला इतिहासकार डॉन गोडार्ड ने लिखा: 'संभव है कि ध्वनि कला क्यूरेटर हेलरमैन की इस धारणा का अनुसरण करती हो कि "सुनना, देखने का एक अन्य रूप है" तथा ध्वनि का अर्थ तभी स्पष्ट होता है जब उसके किसी दृश्य छवि से संबंध को समझा जाए। ध्वनि और छवि का संयोजन दर्शक की सक्रिय सहभागिता की मांग करता है, जिससे वह काल्पनिक स्थान और विचारों के बजाय वास्तविक स्थान तथा ठोस, प्रत्युत्तरशील चिंतन में भाग लेता है।'[9]

चित्रावली

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सन्दर्भ

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  1. 11 Essential Sound Artworks, from Reviled Noise Orchestras to Protest-Minded Installations by Tessa Solomon October 8, 2020 Artnews
  2. Szendy, Peter. Listen: A History of Our Ears, Fordham University Press, pp. 5-8
  3. LaBelle, Brandon (2006). Background Noise: Perspectives on Sound Art (London and New York: Continuum), p. ix. ISBN 9780826418449
  4. गोल्डस्मिथ, केन्नेथ, Duchamp Is My Lawyer: The Polemics, Pragmatics, and Poetics of UbuWeb, कोलंबिया यूनिवर्सिटी प्रेस, न्यूयॉर्क, पृष्ठ 125.
  5. Brückner, Atelier (2010). Scenography / Szenografie - Making spaces talk / Narrative Räume. Stuttgart: avedition. p. 209.
  6. गैल, बर्नहार्ड (दिसम्बर 1, 2017). "Updating the History of Sound Art: Additions, Clarifications, More Questions". लियोनार्डो म्यूज़िक जर्नल. 27: 78–81. डीओआई:10.1162/LMJ_a_01023. एस2सीआईडी 57559930.
  7. डनावे, जूडी (May 7, 2020). "The Forgotten 1979 MoMA Sound Art Exhibition". Resonance. 1: 25–46. डीओआई:10.1525/res.2020.1.1.25.
  8. "Museum of Modern Art, Museum exhibition features works incorporating sound, press release no. 42 for Sound Art exhibition 25 June–5 August 1979". No. Exh. 1266. MoMA Archives.
  9. हेलरमैन, विलियम, और डॉन गोडार्ड. 1983. Catalogue for "Sound/Art" at The Sculpture Center, New York City, May 1–30, 1984 and BACA/DCC Gallery June 1–30, 1984. [page needed].