ध्वनि

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ड्रम की झिल्ली में कंपन पैदा होता होता जो जो हवा के सम्पर्क में आकर ध्वनि तरंगें पैदा करती है

ध्वनि (Sound) एक प्रकार का कम्पन या विक्षोभ है जो किसी ठोस, द्रव या गैस से होकर संचारित होती है। किन्तु मुख्य रूप से उन कम्पनों को ही ध्वनि कहते हैं जो मानव के कान से सुनायी पडती हैं।

ध्वनि की प्रमुख विशेषताएँ[संपादित करें]

राइफल दागने से उत्पन्न ध्वनि तरंग (उपर); एक 'ज्या तरंग' (साइन वेव) जिसकी आवृत्ति क्रमशः बढ़ रही है (मध्य); 'विकिपीडिया' शब्द के उच्चारण से उत्पन्न ध्वनि तरंग (नीचे)
  • ध्वनि के संचरण के लिये माध्यम (मिडिअम्) की जरूरत होती है। ठोस द्रव, गैस एवं प्लाज्मा में ध्वनि का संचरण सम्भव है। निर्वात में ध्वनि का संचरण नही हो सकता।
  • द्रव, गैस एवं प्लाज्मा में ध्वनि केवल अनुदैर्ध्य तरंग (longitudenal wave) के रूप में चलती है जबकि ठोसों में यह अनुप्रस्थ तरंग (transverse wave) के रूप में भी संचरण कर सकती है। । जिस माध्यम में ध्वनि का संचरण होता है यदि उसके कण ध्वनि की गति की दिशा में ही कम्पन करते हैं तो उसे अनुप्रस्थ तरंग कहते हैं; जब माध्यम के कणों का कम्पन ध्वनि की गति की दिशा के लम्बवत होता है तो उसे अनुप्रस्थ तरंग कहते है।
  • सामान्य ताप व दाब ( NTP ) पर वायु में ध्वनि का वेग लगभग ३४३ मीटर प्रति सेकेण्ड होता है। बहुत से वायुयान इससे भी तेज गति से चल सकते हैं उन्हें सुपरसॉनिक विमान कहा जाता है।
  • मानव कान लगभग २० हर्ट्स से लेकर २० किलोहर्टस (२०००० हर्ट्स) आवृत्ति की ध्वनि तरंगों को ही सुन सकता है। बहुत से अन्य जन्तु इससे बहुत अधिक आवृत्ति की तरंगों को भी सुन सकते हैं।
  • किसी भी तरंग (जैसे ध्वनि) के वेग, तरंगदैर्ध्य और आवृत्ति में निम्नलिखित संबन्ध होता है-

\lambda = \frac{v}{f}

जहाँ v तरंग का वेग, f आवृत्ति तथा : \lambda तरंगदर्ध्य है।

आवृत्ति के अनुसार वर्गीकरण[संपादित करें]

  • अपश्रव्य (Infrasonic) 16 Hz से कम आवृत्ति की ध्वनि मानव को सुनाई नहीं देती,
  • श्रव्य (sonic) 16 Hz से 20 kHz, के बीच की आवृत्तियों वाली ध्वनि सामान्य मानव को सुनाई देती है।
  • पराश्रव्य (Ultrasonic) 20 kHz से 1,6 GHz के बीच की आवृत्ति की ध्वनि मानव को सुनाई नहीं पड़ती,
  • अतिध्वनिक (Hypersonic) 1 GHz से अधिक आवृत्ति की ध्वनि किसी माध्यम में केवल आंशिक रूप से ही संचरित (प्रोपेगेट) हो पाती है।


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