धनञ्जय यशवंत चंद्रचूड़

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माननीय डा ० न्यायमूर्ति
धनंजय यशवंत चंद्रचूड़
passport Picture

न्यायाधीश ,उच्च्तम न्यायालय ,भारत
पदस्थ
कार्यालय ग्रहण 
13 मई 2016
Appointed by भारत के राष्ट्रपति , प्रणब मुखर्जी

मुख्य न्यायाधीश , इलाहाबाद हाई कोर्ट [1]
पद बहाल
अक्टूबर 31,2013[1] – मई 12, 2016

जन्म 11/11/1959[1]

डा ० न्यायमूर्ति धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ (जन्म 11 नवंबर 1959) वर्तमान में भारत के सुप्रीम कोर्ट के एक जज न्यायाधीश हैं,[2] और 9 नवंबर 2022 से न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित के उत्थान के बाद 10 नवंबर 2024 को अपनी सेवानिवृत्ति तक भारत के मुख्य न्यायाधीश बने। वह इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश हैं। चंद्रचूड़ 13 मई 2016 को भारत के सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त हुए।

व्यक्तिगत जीवन[संपादित करें]

इनका जन्म ११ नवंबर १९५९ को हुआ था। इनके पिता यशवंत विष्णु चंद्रचूड़ भारत के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे।[3][4] इनकी माता प्रभा शास्त्रीय संगीतज्ञ हैं।

शिक्षा[संपादित करें]

आप ने वर्ष १९९९ में सेंट स्टीफन कॉलेज नयी दिल्ली से अर्थशास्त्र और गणित विषय के साथ स्नातक ( ऑनर्स ) की उपाधि प्राप्त की। ऑनर्स की सूची में दिल्ली विश्वविद्यालय में आप ने सर्वोच्च स्थान पाया। वर्ष १९८२ में आप ने दिल्ली विश्वविद्यालय से विधि में स्नातक उपाधि प्राप्त की।[1] वर्ष १९८३ में हार्वर्ड विश्वविद्यालय से एल ० एल ० एम ० की उपाधि प्राप्त की।[1] वर्ष १९८६ में हार्वर्ड विश्वविद्यालय से जुडीशियल साइंस में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। [1] वर्ष 2015 में डा० राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय लखनऊ ने एल एल डी की मानद उपाधि दी।

व्यवसाय[संपादित करें]

चंद्रचूड़ ने बंबई उच्च न्यायालय में वकील के रूप में अभ्यास किया तथा संवैधानिक कानून और सार्वजनिक कानून में विशेष रूचि ली। वर्ष (1998-2000) में चंद्रचूड़ एडिशनल सोलिस्टर जनरल ऑफ़ इंडिया नियुक्त हुए।[1]

  • 29 मार्च 2000 को बम्बई हाई कोर्ट में अतिरिक्त जज नियुयक्त हुए।[1]
  • 31 अक्टूबर 2013 को इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद पर आसीन हुए।[1]
  • 13 मई 2016 को सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया के जज बने।[1]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. http://www.allahabadhighcourt.in/service/judgeDetail.jsp?id=203
  2. "A deity does not have constitutional rights: Justice Chandrachud".
  3. "Justice Chandrachud keeps running into father's rulings".
  4. "Chandrachud vs Chandrachud: Son Overrules Father's Judgment, Yet Again".