द्विविधा

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द्विविधा (dilemma) तर्कशास्त्र में ऐसी दुविधा को कहते हैं जिसमें दो सम्भावित विकल्प हों, जिनमें से सरल रूप से कोई भी श्रेष्ठतर न हो। यानि ऐसी स्थिति जिसमें व्यक्ति असमंजस में पड़ जाये कि दोनो चारों या उत्तरों में से किसे चुना जाये। साधारण बोलचाल में द्विविधा को कई मुहावरों व लोकोक्तियों में कहा जाता है। मसलन अगर दो बुरे विकल्पों में से एक चुनना हो तो हिन्दी में कहा जाता है कि "सामने अंधा कुआँ, पीछे गहरी खाई"।[1]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Beyond Tocqueville: Civil Society and the Social Capital Debate in Comparative Perspective, Bob Edwards, Michael W. Foley, Mario Diani, pp. 126, UPNE, 2001, ISBN 978-1-58465-125-3, ... Trust enables economic actors to cooperate in prisoners' dilemma-type circumstances, in which each would benefit from cooperation but each has an incentive not to cooperate ...