द्रविड़ कड़गम
| यह लेख अंग्रेज़ी भाषा में लिखे लेख का ख़राब अनुवाद है। यह किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा लिखा गया है जिसे हिन्दी अथवा स्रोत भाषा की सीमित जानकारी है। कृपया इस अनुवाद को सुधारें। मूल लेख "अन्य भाषाओं की सूची" में "अंग्रेज़ी" में पाया जा सकता है। |
| द्रविड़र कज़हगम | |
|---|---|
| स्थापक | पेरियार |
| स्थापित | १९३८ |
| पूर्व | न्याय पार्टी |
| उत्तराधिकारी | डीएमके |
| मुख्यालय | चेन्नई |
| अखबार | विदुथलाई |
| विचारधारा |
मानवतावाद सामाजिक न्याय द्रविड़ राष्ट्रवाद ब्राह्मणवाद-विरोध नास्तिकता[1] |
| राजनीतिक स्थिति | Left-wing |
| वेबसाइट | |
| https://dravidarkazhagam.in/ | |
| पार्टी का झंडा | |
| Flag of Dravidar Kazagam.svg | |
| भारत की राजनीति चुनाव | |

द्रविड़र कज़हगम एक प्रमुख सामाजिक और राजनीतिक संगठन है, जिसकी स्थापना तमिलनाडु में हुई थी। इस संगठन की नींव १९४४ में ई.वी. रामा स्वामी नायर (E.V. Ramasamy) द्वारा रखी गई थी, जिन्हें आमतौर पर "परियार" के नाम से जाना जाता है। परियार ने समाज में जातिवाद और धर्म आधारित भेदभाव के खिलाफ आंदोलन किया और समानता और सामाजिक न्याय के लिए प्रयास किए[2]।
उद्देश्य और सामाजिक योगदान
[संपादित करें]द्रविड़र कज़हगम का मुख्य उद्देश्य समाज में सामाजिक न्याय, समानता और महिला अधिकारों को बढ़ावा देना है। संगठन ने शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में पिछड़े वर्गों के लिए विशेष पहल की और धार्मिक कर्मकांडों और अंधविश्वासों के खिलाफ जन जागरूकता फैलाने का काम किया। इसके अलावा, द्रविड़र कज़हगम ने समाज में सामाजिक सुधारों को बढ़ावा देने के लिए कई आंदोलनों का संचालन किया[3]।
राजनीति और प्रभाव
[संपादित करें]भारत की स्वतंत्रता के बाद, द्रविड़र कज़हगम ने दक्षिण भारतीय राजनीति में गहरा प्रभाव डाला। इस संगठन ने अन्य द्रविड़ राजनीतिक पार्टियों के निर्माण में योगदान दिया और द्रविड़ पंथ के विचारों को बढ़ावा दिया। आज भी द्रविड़र कज़हगम तमिलनाडु में सामाजिक न्याय और समानता के लिए सक्रिय है और अपने विचारों और नीतियों के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करता है[4]।
संदर्भ
[संपादित करें]- ↑ Shinn, Larry D. (January–March 1971). "Indian Communalism and the Secular State". The Indian Journal of Political Science. 32 (1). JSTOR: 39. जेस्टोर 41854418. अभिगमन तिथि: 2025-05-07.
- ↑ Hardgrave, R. L. (1965). The Dravidian Movement. Bombay: Popular Prakashan.
- ↑ Subramanian, N. (1999). Ethnicity and Populist Mobilization: Political Parties in South India. New Delhi: Oxford University Press.
- ↑ Hardgrave, R. L. & Kochanek, S. A. (2008). India: Government and Politics in a Developing Nation. New Delhi: Thomson Wadsworth.