दौलत बेग ओल्दी

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दौलत बेग ओल्दी
Daulat Beg Oldi
दौलत बेग ओल्दी is located in जम्मू और कश्मीर
दौलत बेग ओल्दी
दौलत बेग ओल्दी
जम्मू व कश्मीर में दौलत बेग ओल्दी की स्थिति
सूचना
प्रांतदेश: लद्दाख़ ज़िला, जम्मू व कश्मीर
भारत
जनसंख्या (-): अज्ञात (सैनिक चौकी)
मुख्य भाषा(एँ): हिन्दी, बलती
निर्देशांक: 35°23′24″N 77°55′30″E / 35.39000°N 77.92500°E / 35.39000; 77.92500

दौलत बेग ओल्दी भारत के जम्मू व कश्मीर राज्य के लद्दाख़ प्रदेश में स्थित एक स्थान है।[1][2] यहाँ भारत की एक सैनिक चौकी है और यह ऐतिहासिक रूप से भारत और पूर्वी तुर्किस्तान के बीच के व्यापारिक मार्ग पर एक पड़ाव हुआ करता था। यह लद्दाख और मध्य एशिया के बीच ऐतिहासिक व्यापार मार्ग पर है, जो क़ाराक़ोरम दर्रा तक पहुंचने से पहले अंतिम शिविर का निर्माण करता है। इसे सुल्तान सईद खान ("दौलत बेग") के नाम पर रखा गया है, जो लद्दाख और कश्मीर के आक्रमण के बाद अपनी वापसी की यात्रा पर यहां आए थे। इस से ठीक दक्षिण में पूर्व से पश्चिम बहने वाली चिपचप नदी गुज़रती है। दौलत बेग ओल्दी के नाम का परिवर्णी (ऐक्रोनिम) बनाकर इसे कभी-कभी डी॰बी॰ओ॰ भी कहा जाता है।

नामोपत्ति[संपादित करें]

माना जाता है कि १६वीं सदी में तुर्किस्तान के यारकन्द शहर का एक धनवान, दौलत बेग (دولت بېغ) यहाँ से निकल रहा था लेकिन काराकोरम दर्रे से उतरने के बाद उसने यहाँ दम तोड़ दिया। 'दौलत बेग ओल्दी' का मतलब है 'दौलत बेग की मृत्यु हो गई है'। कहते हैं कि उसे अपने ख़ज़ाने के साथ यहीं दफ़ना दिया गया है लेकिन आजतक कोई उसकी क़ब्र नहीं ढूंढ पाया है।[3]

विवरण[संपादित करें]

दौलत बेग ओल्दी ५,१०० मीटर (१६,७०० फ़ुट) की ऊँचाई पर काराकोरम पर्वतमाला के सुदूर पूर्वी छोर पर भारत-चीन सरहद से ८ किमी दक्षिण में और चीन-अधिकृत अक्साई चिन क्षेत्र और लद्दाख़ के अन्य भाग के बीच की वास्तविक नियंत्रण रेखा से ९ किमी पश्चिमोत्तर में स्थित है। सियाचेन ग्लेशियर को छोड़कर यह भारत का उत्तरतम स्थाई सैनिक अड्डा है। यहाँ से कुछ दक्षिण में मुरगो नामक भारतीय गाँव है जहाँ मिश्रित तिब्बती-दर्दी मूल के बलती समुदाय के लोग रहते हैं जो ख़ुबानी उगाने और याक-पालन से गुज़ारा करते हैं। सर्दियों में यहाँ तापमान -३० सेन्टीग्रेड तक गिर जाता है। २००१ में भारत ने घोषणा करी कि वह लेह से दौलत बेग ओल्दी तक एक पक्की सड़क बना रहा है। २०१३ में चीनी फ़ौज ने सीमा लांघकर इस स्थान से कुछ दूरी तक घुसपैठ करी जिसका भारत ने विरोध करा।[4]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Here's Why All's Not Well for India on the Ladakh Front". मूल से 11 जून 2020 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 11 जून 2020.
  2. "Explained: The strategic road to DBO". मूल से 11 जून 2020 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 12 जून 2020.
  3. Into the Untravelled Himalaya: Travels, Treks, and Climbs Archived 2017-06-11 at the Wayback Machine, Harish Kapadia, Geeta Kapadia, pp. 186, Indus Publishing, 2005, ISBN 9788173871818, ... Hundreds of caravans for centuries had camped here. It was believed that the rich man, Daulat Beg was buried here with his treasures. On this vast plateau, nobody has been able to locate his grave ...
  4. Chinese incursions on Archived 2013-07-25 at the Wayback Machine, 22 जुलाई 2013, GreaterKashmir (India), ... In the Depsang valley of Daulat Beg Oldi, the scene of April stand-off, Chinese troops came around 2 km close to Indian posts in Burtse on July 12, which is around 30km from the perceived Line of Actual Control (LAC), sources said ...