देवी दत्त शुक्ल

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देवीदत्त शुक्ल (१८८८ -- ) हिन्दी के साहित्यकार एवं पत्रकार थे। महावीर प्रसाद द्विवेदी के बाद सरस्वती पत्रिका के सम्पादन का गुरुतर भार सन् १९२५ से १९२७ फिर १९२९ - १९४६ तक शुक्ल जी ने ही सँभाला। शुक्ल जी ने २७ वर्षों तक "सरस्वती" का सम्पादन किया।[1]

जीवन परिचय[संपादित करें]

देवी दत्त शुक्ल का जन्म सन् १८८८ ई॰ में बक्सर (उन्नाव) में हुआ। देवीदत्त शुक्ल हिन्दी पत्रकारिता के इतिहास में सदैव स्मरणीय रहेंगे। सन् १९४६ में दृष्टहीन होते हुए भी इन्होने अपने पच्चीस वर्षों के सम्पादन काल के कृतित्व का वर्णन अपनी आत्मकथा "सम्पादक के पच्चीस वर्ष" में किया, जिसकी पंक्ति-पंक्ति से कर्तव्य निष्ठा और दृढ़ संकल्प के अनेक मर्मस्पर्शी दृष्टांत प्रकाश में आ चुके हैं। [2]

प्रमुख कृतियाँ[संपादित करें]

शुक्ल जी हिन्दी साहित्य के श्रेष्ठ गद्य लेखक रहे हैं। शुक्ल जी ने कहानी, उपन्यास, जीवनी, आत्मकथा, इतिहास तथा धर्म और दर्शन सम्बंधी पुस्तकों की रचना की है। शुक्ल जी की प्रमुख कृतियाँ हैं- स्वाधीनता के पुजारी, अवध के गदर का इतिहास, सम्पादक के पचीस वर्ष, हिन्दुओं की पोथी, साधक का संवाद, कालरात्रि, क्रान्तिकारी आदि।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. हिन्दी साहित्य कोश, भाग-2, प्रकाशक- ज्ञानमण्डल लिमिटेड, वाराणसी, प्रधान सम्पादक- धीरेन्द्र वर्मा, प्रथम संस्करण (संवत 2020), पृष्ठ- २६५
  2. इंडिया न्यूज, अंक- १८ अगस्त से २४ अगस्त २००७, पृष्ठ-४४