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दुर्लभराज प्रथम

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दुर्लभराज प्रथम
चाहमान के शासक
शासनावधिसी॰ 784-809 सीई
पूर्ववर्तीगोपेंद्रराज
उत्तरवर्तीगोविंदराज प्रथम
राजवंशचाहमान वंश
पिताचंद्रराज प्रथम

दुर्लभराज प्रथम (शासन सी॰ 784-809 सीई॰) एक भारतीय के शासक थे जो चाहमान वंश से संबंधित थे। उन्होंने उत्तर-पश्चिमी भारत में वर्तमान राजस्थान के कुछ हिस्सों पर गुर्जर प्रतिहार राजवंश राजा वत्सराज के जागीरदार के रूप में शासन किया।

दुर्लभराज, चाहमान राजा चंद्रराज प्रथम के पुत्र थे और उनके चाचा (चंद्रराज के भाई) गोपेंद्रराज के बाद उत्तराधिकारी के रूप में गद्दी पर बैठे थे।[1]

पृथ्वीराज विजय का कहना है कि दुर्लभराज की तलवार गंगा-सागर (संभवतः गंगा नदी और सागर का संगम) में धुलती थी, और गौड़ा के मीठे रस का स्वाद लेती थी। यह गौड़ा क्षेत्र में दुर्लभ की सैन्य उपलब्धियों को संदर्भित करता है।[2][3] उनके पुत्र गुवाका को गुर्जर-प्रतिहार राजा नागभट्ट द्वितीय के जागीरदार के रूप में माना जाता है। इससे पता चलता है कि दुर्लभ भी प्रतिहारों के (वत्सराज) के सामंती थे। उन्होंने पाल राजा धर्मपाल के खिलाफ वत्सराज के अभियान के दौरान गौड़ा में जीत हासिल की थी।[3][4] रमेशचन्द्र मजुमदार का कहना है कि "गौड़ा" का तात्पर्य वर्तमान उत्तर प्रदेश में गंगा-यमुना दोआब से है। दशरथ शर्मा ने इसकी पहचान बंगाल के गौड़ा क्षेत्र से की है, जो कि मुख्य पाल क्षेत्र था।[5] वत्सराज और धर्मपाल दोनों को बाद में राष्ट्रकूट राजा ध्रुव ने अपने अधीन कर लिया था। जैसा कि ध्रुव की मृत्यु 793 ईस्वी में हुई थी, इस वर्ष के पहले गौड़ा में दुर्लभ की सैन्य सफलताओं को दिनांकित किया जाता है।[6]

दुर्लभराज के पुत्र गोविंदराज प्रथम उनके ने उत्तराधिकारी बने थे। [1]

ग्रंथसूची[संपादित करें]

  • Dasharatha Sharma (1959). Early Chauhān Dynasties. S. Chand / Motilal Banarsidass. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9780842606189.
  • R. B. Singh (1964). History of the Chāhamānas. N. Kishore. OCLC 11038728.
  • R. V. Somani (1976). History of Mewar, from Earliest Times to 1751 A.D. Mateshwari. OCLC 2929852.

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. R. B. Singh 1964, पृ॰ 55.
  2. R. B. Singh 1964, पृ॰ 93.
  3. Dasharatha Sharma 1959, पृ॰ 24.
  4. R. B. Singh 1964, पृ॰ 94.
  5. Dasharatha Sharma 1959, पृ॰ 25.
  6. Dasharatha Sharma 1959, पृ॰ 26.