दुनिया का सबसे अनमोल रतन

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

दुनिया का सबसे अनमोल रतन प्रेमचंद की पहली कहानी थी। यह कहानी कानपुर से प्रकाशित होने वाली उर्दू पत्रिका ज़माना में १९०७ में प्रकाशित हुई थी। यह प्रेमचंद के कहानी संग्रह सोज़े वतन में संकलित है।

पात्र[संपादित करें]

  • दिलफिगार
  • दिलफरेब

परिचय[संपादित करें]

इसमें दिलफरेब दिलफिगार से कहती है कि- "अगर तू मेरा सच्चा प्रेमी है, तो जा दुनिया की सबसे अनमोल चीज लेकर मेरे दरबार में आ।" उसे पहला रतन फाँसी पर चढ़ने वाले काले चोर की आँखों से टपका हुआ आँसू मिला किंतु दिलफरेब ने वह स्वीकार नहीं किया। वह दूसरा रतन प्रेमी तथा प्रेमिका की चिता की मुट्ठीभर राख लेकर दिलफरेब के दरबार में गया किंतु वह भी सबसे अनमोल रतन नहीं माना गया । खून का वह आखिरी कतरा जो वतन की हिफाजत में गिरे- दुनिया का सबसे अनमोल रतन माना गया।

विशेषताएँ[संपादित करें]

इस कहानी में प्रेमचंद का देशप्रेम साफ झलकता है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

प्रेमचंद

सन्दर्भ[संपादित करें]