थोलुंग मठ
थोलुंग मठ (तिब्बती: ཋོལུང་དགོན་པ་) एक गोम्पा है जो दूर-दराज़ के ऊपरी ज़ोंगू इलाके में, खांगचेंदज़ोंगा नेशनल पार्क के बफ़र ज़ोन में स्थित है। इसे सिक्किम के सबसे पवित्र मठों में से एक माना जाता है। थोलुंग का शाब्दिक अर्थ है 'पवित्र स्थान' या 'पवित्र देश'।[1]
यह गोंपा मूल रूप से 18वीं सदी की शुरुआत में चोग्याल फुंटसोग नामग्याल II ने बनवाया था। इसमें दूसरे गोंपाओं से लाई गई खास और कीमती पांडुलिपियां और अवशेष शामिल हैं, जिन्हें 17वीं सदी के आखिर और 19वीं सदी की शुरुआत में नेपाली हमले के दौरान सुरक्षा के लिए यहां रखा गया था। इस मठ में धातु का एक चोर्टेन है, जिसमें सम्मानित लामा लात्सुन चेम्बो के अवतार की राख रखी है। ये सभी चीजें सिक्किम सरकार की देखरेख में एक दर्जन से ज़्यादा बक्सों में रखी गई हैं। हर तीन साल में, अप्रैल में होने वाले कामसिल समारोह के दौरान ये चीजें लोगों को दिखाई जाती हैं।[2]
यह तिब्बती बौद्ध धर्म के न्यिंगमापा संप्रदाय का पालन करता है। यह विश्व धरोहर स्थल है।[1]
इतिहास
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1760 में चौथे ल्हात्सुन, कुनज़ांग जिग्मेद ग्यात्सो ने थोलुंग को एक पवित्र स्थान के तौर पर पहचाना। 1789 में पेमा डेचेन ग्यात्सो ने इस जगह पर एक मठ बनवाया। यहाँ पुरानी पांडुलिपियाँ और सिक्किम की कला और कलाकृतियाँ मौजूद हैं, जिन्हें एक साल पहले ही वहाँ लाया गया था।[3] चोग्याल तेनज़िंग नामग्याल के शासनकाल में, नेपाल से गोरखा आक्रमण के कारण इलाके के बौद्ध भिक्षुओं को बहुत परेशानी हुई; जिसके चलते लामा ग्यात्सो ने इलाके की कीमती चीज़ों को थोलुंग भेजने का आदेश दिया।[3]
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- 1 2 Centre, UNESCO World Heritage. "UNESCO World Heritage Centre - Document - Khangchendzonga National Park: Tholung monastery in the buffer zone of KBR". UNESCO World Heritage Centre (अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2026-08-15.
- ↑ "Tholung Monastery". www.sikkimeccl.gov.in. अभिगमन तिथि: 2026-08-15.
- 1 2 Deshpande, Aruna (2013-11-01). Buddhist India Rediscovered (अंग्रेज़ी भाषा में). Jaico Publishing House. ISBN 978-81-8495-247-6.