थर्मोहैलाइन परिसंचरण

थर्मोहैलाइन परिसंचरण बड़े पैमाने पर महासागर परिसंचरण का एक हिस्सा है जो सतही ताप और मीठे पानी के प्रवाह से निर्मित वैश्विक घनत्व प्रवणता द्वारा संचालित होता है। थर्मोहैलाइन दो शब्दों से मिलकर बना है। थर्मो जो तापमान को संदर्भित करता है तथा हैलाइन जो नमक की मात्रा को संदर्भित करता है।[1] यही कारक मिलकर समुद्री जल के घनत्व को निर्धारित करते हैं।
संरचना
[संपादित करें]थर्मोहैलाइन परिसंचरण में पवन द्वारा चालित सतही धाराएं भूमध्यरेखीय अटलांटिक महासागर से ध्रुवों की ओर चलती हैं। यह उच्च अक्षांशों की ओर जाते हुए ठंडी होकर डूब जाती हैं तथा अंततः महासागरीय बेसिनों में प्रवाहित होने से पहले उत्तरी अटलांटिक गहरे जल का हिस्सा बन जाती हैं।[2]
वैश्विक जलवायु पर प्रभाव
[संपादित करें]थर्मोहैलाइन परिसंचरण ध्रुवीय क्षेत्रों में ऊष्मा की आपूर्ति करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।[3] इस प्रकार इन क्षेत्रों में समुद्री बर्फ की मात्रा को नियंत्रित करता है। हालांकि उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के बाहर ध्रुवों की ओर ऊष्मा का परिवहन महासागर की तुलना में वायुमंडल में काफी अधिक होता है। ऐसा माना जाता है कि थर्मोहैलाइन परिसंचरण में परिवर्तन का पृथ्वी के विकिरण बजट पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
मानव जनित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के कारण तापमान में वृद्धि हो रही है इसलिए महासागरों पर जलवायु परिवर्तन के सबसे उल्लेखनीय प्रभावों में से एक महासागरीय ऊष्मा की मात्रा में वृद्धि है जो 1971 के बाद से कुल वैश्विक तापन का 90% से अधिक है।
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "थर्मोहैलाइन सर्कुलेशन". नेशनल ओशियन सर्विस (अमेरिकी अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 18 अक्टूबर 2025.
- ↑ "व्हाट इस द ग्लोबल ओशियन कन्वेयर बेल्ट?". नेशनल ओशियन सर्विस (अमेरिकी अंग्रेज़ी भाषा में). मूल से पुरालेखन की तिथि: 2 नवंबर 2017. अभिगमन तिथि: 18 अक्टूबर 2025.
{{cite web}}: CS1 maint: bot: original URL status unknown (link) - ↑ "थर्मोहैलाइन सर्कुलेशन ग्लोबल वाटर डेंसिटी & क्लाइमेट इफेक्ट्स". ब्रिटानिका (अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 18 अक्टूबर 2025.