त्रिविका

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यह कृष्ण भक्ति साहित्य में कुब्जा और कूबरी नाम से प्रसिद्ध, कृष्ण की महान भक्त थी। यह मथुरा के राजा कंस के यहाँ लेपनादी किया करती थी। यह कूबड़ी और कुरूप थी। कृष्ण की कृपा से इसका कूबड़ ठीक हो गया और यह रूपवती हो गई।