त्रिआयामी दूरदर्शन

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एल.जी इलेक्ट्रॉनिक्स का त्रिआयामी दूरदर्शन उपकरण

त्रिआयामी दूरदर्शन (अंग्रेज़ी:थ्री-डी टेलीविज़न) एक प्रकार का दूरदर्शन होता है, जिसमें प्रदर्शन की त्रिआयामी तकनीकों का प्रयोग किया जाता है, जैसे: स्टीरियोस्कोपिक कैप्चर, बहु-दृश्य कैप्चर या द्विआयामी गहरायी एवं एक त्रिआयामी पटल। त्रिआयामी पटल एक विशेष दर्शन युक्ति होती है, जो किसी कार्यक्रम का प्रोजेक्शन एक यथार्थ स्वरूपी त्रि-आयामी क्षेत्र की तरह करता है।[1] त्रिआयामी कार्यक्रम के धारावाहिक संयुक्त राज्य में १९९० के दशक के अंतिमदौर में लोकप्रिय रहे और दर्शकों में इन्होंने काफी लोकप्रियता अर्जित की। थ्रीडी तकनीक को एक उदाहरण के तौर पर समझा जा सकता है। एक कंप्यूटर माउस को देखते हुए मूलत: बाईं और दाईं आंख के दो अलग-अलग लैंस होते हैं जो माउस के भिन्न कोणों की पहचान करते हैं। दोनों लैंस यही संदेश अपने अपने तरीके से मस्तिष्क तक पहुंचाते हैं। मस्तिष्क उस छवि के लिये इमेज प्रोसेसर की तरह काम करता है, यानी दोनों लैंसों से पहुंचने वाली अलग अलग छवियों को मिलाकर एक कर के त्रिआयामी छवि का निर्माण करता है। सिद्धांत रूप में यह वही तरीका है जिसके आधार पर फ्यूजीफिल्म कंपनी का फाइनपिक्स त्रिआयामी कैमरा काम करता है।

ऐनक

त्रिआयामी पटल के लिये एक ऐनक भी चाहिये होती है। इए ऐनक (चश्मे) टीवी के साथ ही मिलेंगे। ये वे विशेष तकनीक से बनाए गए हैं और इनमें बैटरी का प्रयोग इस्तेमाल किया गया है। इन बैटरीयों को एक चार्जय के द्वारा चार्ज किया जा सकेगा। बिना चश्मे के इस टीवी पर त्रिआयामी सामग्री को देखेंगे तो दृश्य धुंधले और अस्पष्ट नजर आएंगे। इस पटल को सामान्य रंगीन दूरदर्शन पटल की तरह भी देखा जा सकेगा और विशेष परिस्थतियों में यह त्रिआयामी चित्र दिखाएंगे। यानी दोनों तरह के दृश्यों का अनुभव लिया जा सकेगा।[2] पर साधारण त्रिआयामी टेलिवीज़नों में पटल को त्रिआयामी तकनीक के साथ जोड़ा गया है और बिना चश्मे के छवि त्रिआयामी तो क्या, द्विआयामी भी साफ नजर नहीं आएगी। ये चश्मे काफी नाजुक और महंगे होते हैं।[1]

विश्व में त्रिआयामी दूरदर्शन तकनीक के अंदर रहते हुए कुछ कंपनियां जैसे एल.जी इलेक्ट्रॉनिक्स और पैनासॉनिक, ऑटोस्टीरियोस्कोपिक त्रिआयामी टेलिविज़न पर काम कर रहे हैं जिसे देखने के लिए विशेष सहायक उपकरणों की आवश्यकता नहीं रहेगी। ऑटोस्टीरियोस्कोपिक त्रिआयामी दूरदर्शन उपकरण भी उपरोक्त वर्णित त्रिआयामी तकनीक के आधार पर काम करती है जो लेंटिक्युलर लैंसों और पैरालेक्स बैरियर पर आधारित होती है।

इन्हें भी देखें

सन्दर्भ

  1. 3डी टीवी का आया जमाना। हिन्दुस्तान लाइव। १८ मार्च २०१०
  2. लीजिए अब हाजिर है, थ्रीडी टीवी। पत्रिका

बाहरी कड़ियाँ