तुलनात्मक विधिशास्त्र

तुलनात्मक विधिशास्त्र (अंग्रेज़ी: Comparative Jurisprudence या Comparative Law) विधि का वह अध्ययन क्षेत्र है, जिसमें विभिन्न देशों या विधि प्रणालियों की तुलना करके उनके सिद्धांतों, संरचनाओं और व्यवहार का विश्लेषण किया जाता है।
परिभाषा
[संपादित करें]विधिशास्त्री ऐलन (Allen) के अनुसार, दो या दो से अधिक विधि प्रणालियों के तुलनात्मक अध्ययन को तुलनात्मक विधिशास्त्र कहा जाता है।
विधिशास्त्री हॉलैण्ड (Holland) ने इस प्रकार के वर्गीकरण को अनावश्यक बताया और यह मत व्यक्त किया कि इससे विधिशास्त्र का क्षेत्र अनावश्यक रूप से विभाजित हो जाता है।
विकास
[संपादित करें]तुलनात्मक विधिशास्त्र के विकास का श्रेय मुख्यतः इमानुएल कांट (Kant) और जोसेफ स्टोरी (Joseph Story) को दिया जाता है। इन विद्वानों ने इस बात पर बल दिया कि विभिन्न विधि प्रणालियों के तुलनात्मक अध्ययन से विधायन और विधि में व्यावहारिक सुधार संभव है।
दृष्टिकोण
[संपादित करें]विधिशास्त्री जॉन सालमंड (Salmond) ने विभिन्न देशों की विधियों के गुण-दोषों के आधार पर स्वदेशीय विधि का मूल्यांकन करने की आवश्यकता पर बल दिया। हालांकि, उन्होंने तुलनात्मक विधिशास्त्र को विधिशास्त्र की एक स्वतंत्र शाखा मानने से इन्कार किया और इसे अध्ययन की एक पद्धति मात्र बताया।
महत्व
[संपादित करें]तुलनात्मक विधिशास्त्र विधि के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके माध्यम से विभिन्न देशों की विधि प्रणालियों का अध्ययन करके बेहतर और अधिक प्रभावी विधि व्यवस्था विकसित की जा सकती है।