तारा सिंह

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अंगूठाकार|श्रीमती तारा सिंह श्रीमती तारा सिंह हिन्दी साहित्यकार हैं।

परिचय[संपादित करें]

मध्यम श्रेणी परिवार में जन्मी, पली-बढ़ी, डॉ॰ श्रीमती तारा सिंह को बचपन से ही नृत्य, संगीत एवं कविता लेखन से विशेष लगाव रहा। स्कूल और कालेज दिनों में ये कई बार अपनी कविताओं तथा साहित्यिक वाद-विवाद में श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए प्रशंसा-पत्र व पुरस्कार पाने में अग्रणी रहीं। कलकत्ता कालेज़ के रसायन विभागाध्यक्ष, डॉ॰ बी० पी० सिंह के साथ, विवाह-सूत्र में बँधकर, अपने पारिवारिक उत्तरदायित्व को भी बखूबी निभाती हुई, अपनी लेखनी को बरकरार रखी। इनकी रचना को कलकत्ता स्टार टी० वी० पर 1992 में सर्वोत्तम स्थान मिला। अनेकों पत्र-पत्रिकाओं तथा हिन्दी दैनिक पत्रों में, इनकी रचनाएँ नियमित रूप से प्रकाशित होती रहीं। मीनाक्षी प्रकाशन दिल्ली द्वारा, इनकी दो काव्य- कृतियों के प्रकाशन के उपरान्त ही, भावपूर्ण तथा गहरे विचारों से ओत-प्रोत रचनाएँ चर्चा का विषय बन गईं। इसके बाद ही, पारिवारिक और सामाजिक समस्याओं, व्यक्तिगत और सार्वजनिक-- मार्मिक घटनायें, जीवन दर्शन और इसकी सार्थकता, जन्म और मृत्यु –चक्र आदि विषयों पर इनकी नियमित और प्रतिभाशाली रचनाएँ, पुस्तकों के रूप में लोगों के समक्ष आने लगीं। पाठकों ने इनकी रचनाओं को खूब सराहा, कारण, एक के बाद एक, कुल 32 कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं। इस प्रकार इन्होंने अपने आप को २१वीं शताब्दी की एक वरिष्ठ एवं महत्वाकांक्षी छायावादी साहित्यकार के रूप में खुद को स्थापित किया।

साहित्यिक रचनाएँ[संपादित करें]

डॉ॰ श्रीमती तारा सिंह की 32 पुस्तकें मीनाक्षी प्रकाशन, मीनाक्षी प्रकाशन, दिल्ली द्वारा प्रकाशित हो चुकी हैं। इनमें : (१) कविता-संग्रह – 20

(२) गज़ल संग्रह— 7

(३) कहानी संग्रह— 3

(४) उपन्यास -- 2

इसके अलावा, इनकी 114 सहयोगी काव्य-संकलन प्रकाशित हो चुकी हैं। इनकी रचनाएँ स्वर्गविभा सहित 27 लोकप्रिय वेबसाइटों पर पढ़ी जा सकती हैं। इनकी एक गीत, ’सिपाई जी’ हिन्दी सिनेमा के लिये शीर्ष गीत (Title Song) के रूप में ली गई है।

पुरस्कार[संपादित करें]

डॉ॰ श्रीमती तारा सिंह, 247 विभिन्न राष्ट्रीय / अन्तर्राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा सम्मानित व पुरस्कृत हो चुकी हैं। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं : साहित्य महामहोपाध्याय, विद्यासागर, विद्या वारिधि, वोमैन आफ़ दी इयर अवार्ड, मदर टेरेसा अवार्ड, कबीर पुरस्कार, भारत भूषण अवार्ड, इण्डो-नेपाल सद्भावना अवार्ड, राजीव गांधी अवार्ड, भारत ज्योति अवार्ड आदि।

वर्तमान कार्यक्षेत्र[संपादित करें]

हिन्दी साहित्यकार होने के नाते, हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिये डॉ॰ श्रीमती तारा सिंह ने एक लोकप्रिय हिन्दी वेबसाइट, स्वर्गविभा की स्थापना की। विश्व साहित्यकारों की चहेती, ’स्वर्ग विभा ’ आज गागर में सागर है। इसमें हिन्दी कहानियाँ, कविताएँ, ग़ज़ल, उपन्यास, आलेख आदि, सभी अपने- अपने मर्यादित स्थान पर रहते हुये, विश्व को एक सूत्र में बाँधने का प्रयत्न कर रही हैं। हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा हो, स्वर्गविभा पत्रिका की स्थापना का यही उद्देश्य है। हिन्दी की ख्याति और प्रगति को विस्तार मिले, इसके लिये, स्वर्गविभा तारा सम्मान का निर्णय लिया गया; जो कि निर्विघ्न आज तीन सालों से चल रहा है। इसमें हिन्दी विद्वानों में से किन्हीं पाँच को चयनित कर, उन्हें एक विशाल समारोह में सम्मानित किया जाता है। ये साहित्यिक, सांस्कृतिक कला संगम अकादमी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। ये कविता, ग़ज़ल, कहानी, उपन्यास व सिनेमा के लिए गीत लिखने और साहित्यिक समारोहों में इन्हें गाने में काफ़ी रूचि रखती हैं। ये कभी- कभी समाज-सेवा कार्यक्रमों में भी दिल से हाथ बँटाती हैं।

उद्धरण[संपादित करें]

(1)। ‘ TARA SINGH (AUTHOR), Biography—Barnes and Noble, N.J., U.S.A. (2) एफ्रो - एशियन हूज -हू, खंड १ (२००६) (3) एशिया-पैशेफिक हूज -हू, खंड ६ (२००६) , (4 ) राईजिंग पर्सोनालिटी आफ़ इन्डिया अवार्ड बुक, २००६ (5) बेस्ट सिटिजेन्स आफ़ इन्डिया बुक, २००८, पृष्ठ-६६. (6) एशिया पैसेफ़िक हूज-हू,खंड—११,पृष्ठ-३७६ (२०१२) (7) एशियन एडमायरेबुल एचीवर्स, खंड—७ ( २०१३ ) ; पृष्ठ –१६५ . (8) ) एशिया-पैशेफिक हूज -हू, खंड १४ (२०१६) ; पृष्ठ – ४११ .