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तारामंडल (खगोल विज्ञान)

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खगोल विज्ञान (Astronomy) में, एस्टरिज़्म (अंग्रेज़ी: Asterism) या तारा-समूह रात्रि आकाश में तारों का एक पहचाना जाने वाला पैटर्न या आकृति है। यह पैटर्न पृथ्वी से देखने पर तारों को काल्पनिक रेखाओं से जोड़ने पर बनता है। हालांकि एस्टरिज़्म देखने में 'तारामंडल' के समान लग सकते हैं, लेकिन तकनीकी रूप से ये आधिकारिक तारामंडल नहीं होते हैं। ये या तो किसी एक बड़े तारामंडल का हिस्सा होते हैं (जैसे उर्सा मेजर के भीतर 'सप्तर्षि'), या फिर कई अलग-अलग तारामंडलों के तारों को मिलाकर बनते हैं (जैसे 'ग्रीष्मकालीन त्रिभुज')।[1]

'तारामंडल' और 'एस्टरिज़्म' में अंतर

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आम बोलचाल में लोग 'तारामंडल' और 'एस्टरिज़्म' का उपयोग पर्यायवाची के रूप में करते हैं, लेकिन 1922 में अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ ने इन दोनों के बीच एक स्पष्ट अंतर स्थापित किया था:

  • तारामंडल: IAU ने पूरे 'खगोलीय गोले' को 88 आधिकारिक तारामंडलों में विभाजित किया है। इनकी सीमाएं सटीक रूप से निर्धारित हैं, और आकाश का हर एक बिंदु किसी न किसी आधिकारिक तारामंडल के क्षेत्र में आता है।
  • एस्टरिज़्म: इनकी कोई आधिकारिक सीमा नहीं होती। ये केवल चमकीले तारों के अनौपचारिक पैटर्न हैं जो आकाश में आकृतियाँ बनाते हैं। IAU इन्हें आधिकारिक रूप से मान्यता नहीं देता, लेकिन खगोलविदों और शौकिया आकाश दर्शकों के बीच ये बेहद लोकप्रिय हैं क्योंकि इन्हें खोजना आसान होता है।[2][3]

दुनिया के प्रसिद्ध एस्टरिज़्म

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रात्रि आकाश में कई ऐसे एस्टरिज़्म हैं जो किसी आधिकारिक तारामंडल से भी अधिक प्रसिद्ध हैं:

  1. बिग डिपर / सप्तर्षि: यह संभवतः दुनिया का सबसे प्रसिद्ध एस्टरिज़्म है। यह सात बहुत चमकीले तारों का समूह है जो एक बड़ी चम्मच या कलछुल (Dipper) जैसा दिखता है। यह कोई स्वतंत्र तारामंडल नहीं है, बल्कि आधिकारिक तारामंडल उर्सा मेजर का केवल एक हिस्सा है।
  2. समर ट्राइएंगल: यह ग्रीष्मकालीन त्रिभुज तीन अलग-अलग तारामंडलों के तीन सबसे चमकीले तारों को मिलाकर बनता है: सिग्नस तारामंडल का 'डेनेब', लायरा का 'वेगा', और अक्विला का 'अल्टेयर'।
  3. ओरियन की बेल्ट: यह ओरियन तारामंडल के मध्य में स्थित तीन तारों (अलनिटक, अलनीलम और मिंटाका) का एक सीधा रेखा-पैटर्न है, जिसे आसानी से पहचाना जा सकता है।
  4. द टीपॉट: यह सैगिटेरियस (धनु) तारामंडल में स्थित एक एस्टरिज़्म है, जिसका आकार चाय की केतली जैसा है। मिल्की वे (आकाशगंगा) का केंद्र इसी टीपॉट के मुहाने के पास स्थित है।[4][5][6]

प्राचीन काल से ही नाविकों, यात्रियों और किसानों द्वारा एस्टरिज़्म का उपयोग 'खगोलीय नेविगेशन' और ऋतुओं के निर्धारण के लिए किया जाता रहा है।

उत्तरी गोलार्ध में दिशा ज्ञात करने के लिए 'सप्तर्षि' सबसे महत्वपूर्ण एस्टरिज़्म है। इसके चम्मच के आकार वाले हिस्से के अंतिम दो तारों (जिन्हें पॉइंटर स्टार्स कहा जाता है) को जोड़ने वाली काल्पनिक रेखा सीधे ध्रुव तारे की ओर इशारा करती है, जिससे सटीक उत्तर दिशा का पता चलता है। विभिन्न संस्कृतियों ने अपने-अपने एस्टरिज़्म बनाए हैं, जो उनकी स्थानीय पौराणिक कथाओं और कृषि चक्रों पर आधारित थे।[7][8][9]

सन्दर्भ

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  1. Kaler, James B. (2002). The Ever-Changing Sky: A Guide to the Celestial Sphere. Cambridge University Press. pp. 112–115. ISBN 978-0521499187.
  2. "The Constellations". International Astronomical Union (IAU). मूल से से 4 जून 2013 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 23 जून 2026.
  3. "Table of Asterisms"
  4. Ridpath, Ian (2018). Star Tales. Lutterworth Press. pp. 45-48. ISBN 978-0718894788.
  5. "Starry Night Photography – Southern Cross, False Cross & Diamond Cross"[मृत कड़ियाँ]
  6. Image of Cassiopeia, Square of Pegasus, The Circlet, and Y of Aquarius
  7. Ruggles, Clive L. N. (2005). "Ancient Astronomy: An Encyclopedia of Cosmologies and Myth". ABC-CLIO: 14-18.
  8. Dickinson, Terence (2006). NightWatch: A Practical Guide to Viewing the Universe. Firefly Books. pp. 52-55. ISBN 978-1554071470.
  9. Asterisms[मृत कड़ियाँ]

बाहरी कड़ियाँ

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