तारापुर, बिहार

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तारापुर
कस्बा
तारापुर की बिहार के मानचित्र पर अवस्थिति
तारापुर
तारापुर
बिहार में अवस्थिति
निर्देशांक: 25°23′N 86°28′E / 25.38°N 86.47°E / 25.38; 86.47निर्देशांक: 25°23′N 86°28′E / 25.38°N 86.47°E / 25.38; 86.47
देशFlag of India.svg भारत
राज्यबिहार
ज़िलामुंगेर
भाषा
 • आधिकारिकअंगिका, हिंदी
समय मण्डलIST (यूटीसी+5:30)

तारापुर बिहार राज्य के मुंगेर जिले में एक नगर है जो इसी नाम के अनुमंडल और प्रखंड का मुख्यालय भी है। यह 15 फरवरी 1932 को हुए भीषण नरसंहार के लिये प्रसिद्ध है।[1][2]

तारापुर शहीद दिवस प्रत्येक वर्ष 15 फरवरी को मनाया जाता है जिसमें 15 फरवरी 1932 को बिहार राज्य के मुंगेर के तारापुर गोलीकांड में शहीदों को श्रंद्धाजलि दी जाती है। आजादी के बाद से हर साल 15 फरवरी को तारापुर दिवस मनाया जाता है।

15 फरवरी की दोपहर में क्रांतिवीरों का जत्था निकला, लोग घरों से बाहर आने लगे, तारापुर थाना भवन के पास भीड़ जमा हो गयी। धावक दल तिरंगा हाथों में लिए बेख़ौफ़ बढते जा रहे थे और उनका मनोबल बढ़ाने के लिए जनता खड़ी होकर भारतमाता की जय, वंदे मातरम् आदि का जयघोष कर रही थी । मौके पर थाना में कलेक्टर ई. ओ. ली व एसपी डब्लू. एस. मैग्रेथ ने निहत्थे स्वतंत्रता सेनानियों पर अंधाधुंध गोलियां चलवा दी थी. आजादी के दीवाने नौजवान वहां से हिले नहीं और सीने पर गोलियां खायीं। इसी बीच धावक दल के मदन गोपाल सिंह, त्रिपुरारी सिंह, महावीर सिंह, कार्तिक मंडल, परमानन्द झा ने तिरंगा फहरा दिया।

अंग्रेजी हुकूमत की इस बर्बर कार्रवाई में 34 स्वतंत्रता प्रेमी शहीद हो गये थे. इनमें से 13 की तो पहचान हुई बाकी 21 अज्ञात ही रह गये थे. आनन—फानन में अंग्रेजों ने कायरतापूर्वक वीरगति को प्राप्त कई सेनानियों के शवों को वाहन में लदवाकर सुल्तानगंज भिजवाकर गंगा में बहवा दिया था.

जिन 13 वीर सपूतों की पहचान हो पाई उनमें विश्वनाथ सिंह (छत्रहार), महिपाल सिंह (रामचुआ), शीतल चमार (असरगंज), सुकुल सोनार (तारापुर), संता पासी (तारापुर), झोंटी झा (सतखरिया), सिंहेश्वर राजहंस (बिहमा), बदरी मंडल (धनपुरा), वसंत धानुक (लौढिया), रामेश्वर मंडल (पढवारा), गैबी सिंह (महेशपुर), अशर्फी मंडल (कष्टीकरी) तथा चंडी महतो (चोरगांव) शामिल थे. इस घटना ने अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग गोलीकांड की बर्बरता की याद ताजा कर दी थी।

विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला कांवर यात्रा तारापुर अनुमण्डल क्षेत्र के असरगंज ,धोबय,गोगाचक, तारापुर,मोहनगंज,बिहमा व संग्रामपुर प्रखंड से गुजरती है।प्रसिद्ध योगाचार्य ब्रजेश मिश्र की जन्मभूमि का गौरव तारापुर की भूमि को हासिल है।

योगाचार्य ब्रजेश मिश्र[संपादित करें]

ब्रजेश मिश्र योगाचार्य ==

योगाचार्य ब्रजेश मिश्र आधुनिक परिवेश के युवा योगी है।इन्होंने बिहार स्कूल ऑफ योगा मुंगेर से व रिखिया से स्वामी सत्यानन्द सरस्वती के उत्तराधिकारी पद्मविभूषण स्वामी निरंजनानंद सरस्वती व सत्यसंगानंद सरस्वती से योग की शिक्षा ग्रहण की ।इनके गुरु स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने कर्म संन्यास की दीक्षा 2012 में दी तब से पूरे भारत मे घूम घूम कर निस्वार्थ भाव से गुरु के कार्य को निरंतर आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।शाशन की ऒर से इन्हें वर्ष 2018 में सम्मानित किया गया।इनका जन्म बिहार के मुंगेर जिले के तारापुर में हुआ।

वर्तमान में परिवाजर्न करते हुए गुरु कार्य मे संलग्न हैं।ब्रजेश मिश्र योगाचार्य पुराणों में वर्णित श्रेष्ठ शाकल्यद्वीपी ब्राह्मण जो कि भगवान सूर्य के पुत्र कहे जाते हैं। पुराने समय मे ये राजा महाराजाओं के राज्य वैद्य,ज्योतिषी,व तांत्रिक क्रियाओं के गुरु होते थे।मूल रूप से बिहार राज्य के बांका जिले के छतहार गांव में इनका पुराण पैतृक निवास मन जाता है।

ब्रजेश मिश्र आधुनिक काल मे वैदिक,तांत्रिक,आयुर्वेद व योग के सिद्ध हस्त विद्वान हैं।

इन्होंने समाज सेवा में कई उल्लेखनीय कार्य किये अपने क्षेत्र में वैदिक परंपरा के मान्यताओं को पुनः स्थापित किया ,योग के माध्यम से लोगों के चेतना को परिष्कृत किये व आयुर्वेद के प्राचीन सिद्धान्तों से जटिल रोग का निदान किया।साथ ही समाज के निम्न वर्ग के बच्चों का मुफ्त शिक्षा के द्वारा उद्धार किया।

https://web.archive.org/web/20160624093810/http://www.jagran.com/bihar/munger-yoga-14194212.html

https://web.archive.org/web/20200722170840/https://www.bhaskar.com/local/bihar/bhagalpur/munger/news/people-doing-yoga-in-quarantine-center-127256576.html

https://www.jagran.com/bihar/munger-15091874.html

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Prabhat Khabar Digital Desk. "तिरंगा लहराने में शहीद हुए थे तारापुर के रणबांकुरे". prabhatkhabar.com. प्रभात खबर. अभिगमन तिथि 13 अप्रैल 2020.
  2. "Battle for recognition". www.bihartimes.in. मूल से 24 जनवरी 2017 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 13 अप्रैल 2020.
  3. "Nanadlal Bose A notable Indian painter of Bengal school of art". 4to40.com. मूल से 26 फ़रवरी 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 21 February 2014.