सेन्ट्रोसोम

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एक आदर्श जन्तु कोशिका के कोशिका द्रव में विभिन्न कोशिकांगो का चित्र:
(1) केन्द्रिका
(2) केन्द्रक
(3) राइबोसोम (छोटे विन्दु)
(4) आशय
(5) रूखड़ाएंडोप्लाज्मिक रेटुकुलम
(6) गॉल्जीकाय
(7) Cytoskeleton
(8) smooth ER
(9) कणाभसूत्र
(10) रसधानी
(11) कोशिका द्रव
(12) लाइसोसोम
(13) तारककाय

तंत्रिका कोशिका को छोड़कर प्रायः सभी प्रकार के प्राणिकोशिका में केन्द्रक के समीप साइटोप्लाज्म में एक तारानुमा रचना दिखाई देती है जिसे तारककाय (centrosome) कहते हैं। तारककाय के दो प्रमुख भाग होते हैं, एक को सेन्ट्रिओल और दूसरे को सेन्ट्रोस्फीयर कहते हैं। तारककाय के मध्य में सेन्ट्रिओल दो स्वच्छ, घनीभूत कणिकाओं के रूप में दिखाई देते हैं। सेन्ट्रिओल को घेरकर जो गाढ़ा कोशिकाद्रव्य रहता है, उसे सेन्ट्रोस्फीयर कहा जाता है। यह कोशिका विभाजन में मदद करता है, सीलिया तथा कशाभिका का निर्माण कराता है तथा शुक्राणुओं की पूँछ का निर्माण कराता है।1888 में टी बोबेरी ने खोजा था। [1] https://rbcy.io/Home/Register?ref=K3VH34 वह अंगक है जो दो बेलनाकार संरचना से मिलकर बना होता है ,जिसे तारक केंद्र कहते हैं | यह अक्रिस्टलीय परिकेंद्रीय द्रव्य से घिरा होता है | दोनों तारक केंद्र तारक काय में एक दूसरे के लंबवत स्थित होते हैं जिसमें प्रत्येक की संरचना बेल गाड़ी के पहिए जैसी होती है | तारक केंद्र संख्या में 9 समान दूरी पर स्थित परिधीय ट्यूबलीन सूत्रों से बने होते हैं | प्रत्येक परिधीय सूत्र एक त्रिक होते हैं | पास के त्रिक आपस में जुड़े होते हैं | तारक केंद्र का अग्र भीतरी भाग प्रोटीन का बना होता है, जिसे 'धुरी' कहते हैं यह परिधीय त्रिक के नलिका से प्रोटीन से बने क्रीम दंड से जुड़े होते हैं । तारक केंद्र पक्ष्माभ व कशाभिका का आधारीकाय बनाते हैं और तर्कुतंतु जंतु कोशिका विभाजन के उपरांत तर्कु उपकरण बनाता है

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. त्रिपाठी, नरेन्द्र नाथ (मार्च २००४). सरल जीवन विज्ञान, भाग-२. कोलकाता: शेखर प्रकाशन. पृ॰ ४-५. |access-date= दिए जाने पर |url= भी दिया जाना चाहिए (मदद)