ताज़िया

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मुहर्रम के मौके पर ताजिये सहित जुलूस

ताज़िया बाँस की कमाचिय़ों पर रंग-बिरंगे कागज, पन्नी आदि चिपका कर बनाया हुआ मकबरे के आकार का वह मंडप जो मुहर्रम के दिनों में मुसलमान/ शिआ लोग हजरत इमाम हुसेन की कब्र के प्रतीक रूप में बनाते है और जिसके आगे बैठकर मातम करते और मासिये पढ़ते हैं। ग्यारहवें दिन जलूस के साथ ले जाकर इसे दफन किया जाता है। ताजिया हजरत इमाम हुस्सैन कि याद मे बनय जत है इस्लाम मे कुच्ह लोग इस कि आलोच्ह्न कर्ते है मगर ये तजियदारि बहुत शान् से होति है हिन्दु भै भि इस मे हिस्सा लेते है और तजिया बनते है इन्दिआ मे सब्से अच्च्हि तजियदारि जावरा मध्याप्रदेश मे होति है यहा ताजिये बास से नहि बन्ते है बल्कि शिशम और सग्वान कि लकरि से बन्ते है जिस पर कान्च और माइका का काम होता है जावरा मे ३०० से ज्यादा (१२ फिट) ताजिया बन्ते है