तलछटी दर्रे

तलछटी दर्रे पृथ्वी की भूपर्पटी के वे विस्तृत अवसाद होते हैं जहाँ लंबे समय तक अवतलन की प्रक्रिया चलती रहती है और वहाँ तलछटों की मोटी परतें जमती जाती हैं। जिससे निरंतर धंसाव से ऐसे तलछटी दर्रों का निर्माण होता है।[1][2] इस कारण अवसादों के संचय के लिए पर्याप्त स्थान मिलता है। लाखों वर्षों तक नदियों, समुद्रों या झीलों द्वारा लाई गई जल-जनित अपरदित सामग्रीयाँ गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से इन अवसादों में जमा होती रहती है। समय बीतने के साथ ये तलछट दबाव और तापमान परीवर्तन के कारण संघनित होकर शिलित हो जाती हैं,
निर्माण
[संपादित करें]तलछटी दर्रों का निर्माण मुख्यतः स्थलमंडल में होने वाले विरूपण से जुड़ा होता है, जो प्रायः प्लेट विवर्तनिक गतिविधियों के कारण उत्पन्न होता है। जब भूपर्पटी में तनाव उत्पन्न होता है, तो वह पतली होकर नीचे धंस जाती है, जिससे अवतलन होता है और दर्रों का निर्माण आरंभ होने लगता है। कभी-कभी प्लेट विवर्तनिक, और ज्वालामुखीय गतिविधियों से उत्पन्न होंगे वाले भार भी भूपर्पटी को नीचे झुका देता है।
एक बार दर्रों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, तो उसमें निरंतर जमा होती तलछटों का भार स्वयं अवतलन को और बढ़ा देता है। यह प्रक्रिया आइसोस्टेसी के सिद्धांत के अनुसार होती है, जिसमें पृथ्वी की भूपर्पटी संतुलन बनाए रखने के लिए नीचे की ओर झुकती है। इस प्रकार, तलछटी दर्रे समय के साथ गहराते और विकसित होते जाते हैं।
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]संदर्भ
[संपादित करें]- ↑ कोलमैन, जे॰ एल॰ जूनियर; कहान, एस॰ एम॰ (2012). संयुक्त राज्य अमेरिका के तलछटी दर्रों की प्रारंभिक सूची : 2011-2012 में संयुक्त राज अमेरिका के अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण क रिपोर्ट.
- ↑ अब्दुल्लायेव, एन॰ आर॰ (30 जून 2020). "विश्व तलछटी दर्रों की मोटाई, आयतन और भौगोलिक विस्तार का विश्लेषण". ए॰एन॰ए॰एस॰ पत्रिका—पृथ्वी विज्ञान खंड" (1). डीओआई:10.33677/ggianas20200100040. एस2सीआईडी 225758074.