तरल किर्मीर प्रतिकृति

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कोशिका झिल्ली का तरल किर्मीर प्रतिकृति

तरल किर्मीर प्रतिकृति कार्यात्मक कोशिका झिल्लियों की संरचना के बारे में विभिन्न टिप्पणियों की व्याख्या करता है। इस वैज्ञानिक प्रतिरूपण के अनुसार, एक लिपिड द्विस्तर (दो अण्वों की मोटी परत होती है जिसमें मुख्यतः उभयसंवेदी फॉस्फोलिपिड होते हैं) जिसमें प्रोटीन अणु धंसे होते हैं। फास्फोलिपिड बाइलेयर झिल्ली को तारल्य और प्रत्यास्थता देता है। कोशिका झिल्ली में कभ मात्रा में कार्बोहाइड्रेट भी पाए जाते हैं। यह जैविक प्रतिकृति, जिसे 1972 में सीमोर जॉनथन सिङर और गर्थ निकोलसन द्वारा प्रस्तुत किया गया था, [1] कोशिका झिल्ली को एक द्विविम तरल के रूप में वर्णित करता है जो झिल्ली घटकों के पार्श्व प्रसार को प्रतिबन्धित करता है। इस तरह के क्षेत्र विशेष लिपिड और प्रोटीन कोकून के साथ झिल्ली के भीतर क्षेत्रों के अस्तित्व से परिभाषित होते हैं जो लिपिड राफ्ट या प्रोटीन और ग्लाइकोप्रोटीन जटिल के गठन को बढ़ावा देते हैं। झिल्ली क्षेत्र को परिभाषित करने का एक अन्य तरीका लिपिड झिल्ली का कोशिका कंकाल तन्तुओं और झिल्ली प्रोटीन के माध्यम से बाह्य आव्यूह के साथ सम्बन्ध है। [2] वर्तमान प्रतिकृति कई कोशिकीय प्रक्रियाओं से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण विशेषताओं का वर्णन करता है, जिनमें शामिल हैं: कोशिका संकेतन, कोशिका विभाजन, झिल्ली अंकुरण और कोशिका संलयन। तरल किर्मीर प्रतिकृति कोशिका झिल्ली का सर्वस्वीकार्य प्रतिकृति है।

रासायनिक रचना[संपादित करें]

अवयव स्थान प्रकार्य
फॉस्फोलिपिड कोशिका झिल्ली का मुख्य आव्यूह यह कोशिका झिल्ली को चयनात्मक पारगम्यता प्रदान करता है।
कार्बोहाइड्रेट बाह्य झिल्ली स्तरों पर प्रोटीन से जुड़ी यह कोशिका पहचान में सहायक है।
खोलेस्टेरॉल फॉस्फोलिपिडों और फॉस्फोलिपिड द्विस्तरों के मध्य यह कोशिका झिल्ली को अपनी तारल्य बनाए रखने में सहायक है।
प्रोटीन फॉस्फोलिपिड स्तरों के भीतर या सतह पर धंसे ये अण्वों के संचलन की अनुमति देने हेतु चैनल बनाते हैं।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. (वीर गडरिया) पाल बघेल धनगर
  2. (वीर गडरिया) पाल बघेल धनगर