निर्वासन

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रामायण में राम के निर्वासन का चित्रण

निर्वासन में रहने का मतलब किसी के घर (यानी शहर, राज्य या देश) से दूर होना है, क्योंकि या तो वापसी के लिए अनुमति से इनकार कर दिया गया है या वापस आने पर कारावास या मृत्यु के साथ धमकी दी गई है। यह दण्ड का एक रूप हो सकता है। यद्यपि आमतौर पर किसी व्यक्तिगत स्थिति का वर्णन करने के लिए उपयोग किया जाता है, यह शब्द समूहों (विशेष रूप से जातीय या राष्ट्रीय समूहों), या पूरी सरकार के लिए भी उपयोग किया जाता है। "डायस्पोरा" और "शरणार्थी" जैसे शब्द समूह निर्वासन का वर्णन करते हैं, स्वैच्छिक हो या मजबूरन, और "निर्वासन में सरकार" एक ऐसे देश की सरकार का वर्णन करता है जिसे देश के बाहर होने के लिये मजबूर किया गया है और अपनी वैधता का तर्क उस देश के बाहर से देती है।

निर्वासन अपनी मातृभूमि से आत्मारोपित प्रस्थान भी हो सकता है। आत्म-निर्वासन को अक्सर उस व्यक्ति द्वारा विरोध के रूप में चित्रित किया जाता है, जो दावा करता है कि वह उत्पीड़न या कानूनी मामलों (जैसे कर या आपराधिक आरोप) से बचने के लिए निर्वासित हुआ है। ऐसा अगर दूसरे देश में जाना होना होता है तो वहाँ से किसी व्यक्ति को लाने की प्रक्रिया को प्रत्यर्पण कहा जाता है। कुछ मामलों में अपदस्थ राष्ट्रप्रमुख को तख़्ता पलट या सरकार के अन्य परिवर्तन के बाद निर्वासन में जाने की इजाजत दी जाती है, जिससे शांतिपूर्ण परिवर्तन हो सकता है या न्याय से बचने की अनुमति मिलती है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]