ढ़ाका

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ढ़ाका एक जाट गोत्र है।[1] ढाका एक नागवंशी जाट गौत्र है जिसका नख चौहान वंश से है ढाका वंश का नख चौहान वंश बहुत बड़ा वंश है जिसकी कुलदेवी मां आशापुरा नाडोल पाली में स्थित है वहीं कुलदेव शिव शंकर के अवतार सोनाणा खेतला जी हैं कुछ चौहान वंशी अपना इष्टदेव वीर गोगाजी चौहान को भी मानते हैं लेकिन इसके मुख्यदेव शिवजी को ही माना जाता है शिवजी के नाग की व शिवशंकर की पूजा प्राथमिकता से की जाती है । ढाका जाटों नें अपने वंश की व गौत्र की रक्षा की है वही यह लोग आर्य समाज से ज्यादा तालूक रखते है ढाका जाटों में बहुत से लोग शिक्षित है और स्वामी केशवानन्द जो शिक्षा सन्त कहलाये थे ढाका गौत्र के बहुत बड़े मार्गदर्शक रहे हैं ।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. तुगानिया, ओमपाल सिंह (2008). "32". चौहानवंशी लाकड़ा जाटों का इतिहास. आर्य बूक डिपो. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 81-7063-174-2.