डोगरा राजवंश

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डोगरा राजवंश, उत्तर भारत का एक राजपूत राजवंश था। इस राजवंश की जड़ें इक्ष्वाकु वंश तक जातीं हैं। इसकी स्थापना महाराजा गुलाब सिंह ने की थी।

15 जून 1819 को कश्मीर में सिख शासन की स्थापना हुई। महाराजा रणजीत सिंह ने जम्मू को पंजाब में मिला लिया था। बाद में उन्होंने गुलाब सिंह को जम्मू सौंप दिया। 1839 में रणजीत सिंह की मृत्यु के साथ लाहौर का सिख साम्राज्य बिखरने लगा। अंग्रेज़ों के लिए यह अफगानिस्तान की खतरनाक सीमा पर नियंत्रण का मौका था तो जम्मू के राजा गुलाब सिंह के लिए खुद को स्वतंत्र घोषित करने का।

जम्मू और कश्मीर के महाराजा-
  • महाराजा गुलाब सिंह (1822 से 1856 तक)
  • महाराजा रणबीर सिंह (1856 से 1885 तक)
  • महाराजा प्रताप सिंह (1885 से 1925 तक)
  • महाराजा हरि सिंह (1925 से 1947 तक)।

सन् 1947 तक जम्मू और कश्मीर पर डोगरा शासकों का शासन रहा। इसके बाद महाराज हरि सिंह ने 26 अक्‍तूबर 1947 को भारतीय संघ में विलय के समझौते पर हस्‍ताक्षर कर दिए। देश की नई प्रशासनिक व्यवस्था में जम्मू-कश्मीर रियासत का विलय अंग्रेजों के चले जाने के लगभग 2 महीने बाद 26 अक्तूबर 1947 को हुआ। वह भी तब, जब रियासत पर कबायलियों के रूप में पाकिस्तानी सेना ने आक्रमण कर दिया और उसके काफी हिस्से पर कब्जा कर लिया।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]