डॉ. रविंदर रवी

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डॉ. रविंदर रवी
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जन्म15 जुलाई 1942
किला हांस, जिला लुधियाना, भारत)
मृत्यु19 मई 1989(1989-05-19) (उम्र 46)
पटियाला
व्यवसायअध्यापन
राष्ट्रीयताभारतीय
उच्च शिक्षापंजाबी विश्वविद्यालय
अवधि/कालबीसवीं सदी का उत्तरार्ध
विधाआलोचना साहित्य
साहित्यिक आन्दोलनप्रगतिशील साहित्य

डॉ. रविंदर सिंह रवी (1943-1989), पंजाबी लेखक, साहित्यिक आलोचक, अध्यापक और वामपंथी आंदोलन के सक्रिय कार्यकर्ता और प्रख्यात मार्क्सवादी विचारक[1] थे। वे अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता और साहित्य चिंतन के क्षेत्र में अपनी सैधान्त्क परिपक्वता के लिए जाना जाता है।

जीवन[संपादित करें]

रवी का जन्म 1943 में लुधियाना जिले के गांव किला हांस में हुआ। उसने स्नातक की उपाधि गवर्नमेंट कॉलेज, लुधियाना से प्राप्त की। इस के बाद वे पंजाबी युनिवर्सिटी, पटियाला आ गए। पंजाबी युनिवर्सिटी से पी एच डी पद हासिल करने वाला वह पहला विद्यार्थी था। उस ने 'पंजाबी राम-काव्य' पर अपना अनुसंधान प्रबंधन लिखा। यहाँ पंजाबी युनिवर्सिटी के पंजाबी विभाग में ही शिक्षक के रूप में उसकी नियुक्ति हो गी। पंजाबी युनिवर्सिटी के शिक्षकों के संगठन 'पंजाबी युनिवर्सिटी शिक्षक संघ (पूटा) में सक्रिय रूप से काम करते हूए वे इसका महासचिव चुना गया और अपने जीवन के आखिरी क्षण तक वे शिक्षकों के संघ की गतिविधियों में सक्रिय रूप से काम करते रहे। इसी तरह वह पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ सीनेट के सदस्य चुने गए थे। वे पंजाबी लेखकों के उत्कृष्ट संगठन 'केंद्रीय पंजाबी लेखक सभा महासचिव रहे और पंजाब में लेखकों में प्रगतिशील की नई लहर को जन्म दिया। उस ने  पंजाब के गांवों और कस्बों के साहित्यिक संगठनों में जा कर रचना प्रक्रिया और साहित्यिक सिद्धांतकारी के बारे में कई भाषण दिए। इस तरह से वह साहित्य-चिंतन-अध्ययन और साहित्य सृजन के बीच बढ़ रही खाई को कम करने के गंभीर प्रयास किये। पंजाब संकट के दिनों में उसने लेखकों में प्रगतिशील धर्मनिरपेक्ष विचारधारा का प्रचार प्रसारण किया। पंजाब संकट के शीर्ष के दिनों में वह अपने धर्मनिरपेक्ष सोच पर दृढ़ता से पहरा दिया और पंजाबी विश्वविद्यालय में खालिस्तान की विचारधारा की खाड़कू-अल्ट्रा प्रवृत्ति को बढने से रोका। अपनी इस प्रतिबद्धता के कारण उसे, आपना बलिदान देना पढ़ा। 19 मई 1989 को उनके घर में ही खालिस्तानी आतंकवादियों ने गोली मार कर उसकी हत्या कर दी। उसकी यादों को ज़िंदा रखने के लिए उनके प्रशंसकों ने 'डॉ. रविंदर रवी मेमोरियल ट्रस्ट, पटियाला' की स्थापना कर ली, जो हर वर्ष पंजाबी आलोचना और चिंतन के क्षेत्र में योगदान के लिए डॉ. रविंदर रवी पुरस्कार' प्रदान करता है। [2] इसी तरह, पंजाबी विश्वविद्यालय के एक शिक्षक मंच ने उनके नाम पर 'डॉ. रविंदर सिंह रवी मेमोरियल लेक्चर' भी शुरू किया है। [3] कुछ साल पहले पंजाबी विश्वविद्यालय के पंजाबी विभाग द्वारा भी 'डॉ. रविंदर सिंह रवि मेमोरियल लेक्चर सीरीज' शुरू करने का निर्णय किया गया था।

योगदान[संपादित करें]

डॉ. रविंदर सिंह रवी पंजाबी साहित्यिक आलोचना की दूसरी पीढ़ी के प्रमुख मार्क्सवादी आलोचक थे। उनकी रुचि साहित्य, सिद्धांत और कविता के क्षेत्र में ज़ियादा थी। इसके अलावा उस ने पंजाबी संस्कृति के सौंदर्यशास्त्र और पंजाबी भाषा के विकास की समस्याओं के बारे में बहुत मौलिक विचार प्रस्तुत किये।वे पंजाबी के शायद एक ही ऐसा आलोचक है जिसने उस आलोचना प्रणाली के बारे में एक मुक्न्म्ल किताब लिखी जिस के प्रति उसका दृष्टिकोण आलोचनातमक था। पंजाबी में आम रूप में साहित्यिक आलोचना प्रणालियों के बारे में लिखी गई पुस्तकों वर्णनात्मक और प्रशंसात्मक हैं क्योंकि यह उन आलोचना प्रणालियों के समर्थकों या अनुयायियों द्वारा लिखी गई हैं। रवी ने नवीन अमेरिकी आलोचना प्रणाली के मुख्य विचारकों क्लीन ब्रूक्स, विम्सैट, एलन टेट और आई ए रिचर्ड्स की रचनाएँ का आलोचनातमक विश्लेषण किया है और साहित्यिक पाठ के अध्ययन में इन विचारकों की अवधारणाओं और मॉडलों की प्रासंगिकता के सवाल को निपटने की कोशिश की है। 

मुख्य पुस्तकें[संपादित करें]

  • पंजाबी-राम-कविता
  • विरसा और वर्तमान
  • नवीन अमेरिकी आलोचना प्रणाली
  • प्रगतिवाद और साहित
  • रवी चेतना (उनके शोध पत्रों का संपादित संग्रह)[4]

सन्दर्भ[संपादित करें]