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डेविड ली (भौतिक विज्ञानी)

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डेविड मॉरिस ली

2007 में डेविड मॉरिस ली
जन्म 20 जनवरी 1931 (1931-01-20) (आयु 95)
राई, न्यूयॉर्क
शिक्षा हार्वर्ड विश्वविद्यालय (BA)
कनाटीकट विश्वविद्यालय (MA)
येल विश्वविद्यालय (पीएचडी)
जीवनसाथी दाना (2 बच्चे)
पुरस्कार भौतिकी में नोबेल पुरस्कार (1996)
ओलिवर बकले पुरस्कार (1981)
साइमन मेमोरियल पुरस्कार (1976)
बकले पुरस्कार (1970)

डेविड मॉरिस ली (जन्म 20 जनवरी 1931) एक अमेरिकी भौतिक विज्ञानी हैं, जिन्हें हिलियम-३ में अतिप्रवाहता की खोज के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। इस महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि के लिए उन्हें रॉबर्ट सी. रिचर्डसन और डगलस डी. ओशेरॉफ़ के साथ संयुक्त रूप से वर्ष 1996 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।[1] उनकी इस खोज ने अत्यल्प तापमानों पर पदार्थ के व्यवहार को समझने में नई अंतर्दृष्टि प्रदान की और संघनित पदार्थ भौतिकी के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण प्रगति का मार्ग प्रशस्त किया।

ली ने अपने वैज्ञानिक जीवन का एक बड़ा हिस्सा कॉर्नेल विश्वविद्यालय में बिताया, जहाँ वे भौतिकी के प्राध्यापक रहे और बाद में प्रोफेसर एमेरिटस बने। इसके अतिरिक्त वे टेक्सास ए एंड एम विश्वविद्यालय में भौतिकी के विशिष्ट प्राध्यापक के रूप में भी कार्यरत रहे हैं।[2][3] निम्न तापमान भौतिकी और क्वांटम द्रवों पर उनके अनुसंधान ने आधुनिक भौतिकी के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

व्यक्तिगत जीवन

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डेविड मॉरिस ली का जन्म न्यूयॉर्क राज्य के राय नगर में हुआ था और उनका पालन-पोषण भी वहीं हुआ।।[4]उनके पिता मार्विन ली विद्युत अभियंता थे, जबकि उनकी माता एनेट ली अध्यापिका थीं। उनके माता-पिता ऐसे यहूदी परिवारों से संबंधित थे जिनकी जड़ें इंग्लैंड और लिथुआनिया से आए प्रवासियों में थीं।

ली ने 1952 में हार्वर्ड विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने लगभग 22 महीनों तक संयुक्त राज्य सेना में सेवा दी। सैन्य सेवा पूर्ण होने के बाद उन्होंने कनेक्टिकट विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर उपाधि अर्जित की और भौतिकी में उच्च अध्ययन जारी रखा।

वर्ष 1955 में उन्होंने येल विश्वविद्यालय के डॉक्टरेट कार्यक्रम में प्रवेश लिया। वहाँ वे प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी हेनरी ए. फेयरबैंक के निर्देशन में निम्न-तापमान भौतिकी अनुसंधान समूह से जुड़े। अपने शोधकार्य के दौरान उन्होंने तरल हीलियम-3 के गुणों और व्यवहार पर प्रायोगिक अनुसंधान किया, जो आगे चलकर उनके वैज्ञानिक जीवन के प्रमुख अनुसंधान क्षेत्रों में से एक बना।

1959 में येल विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने के बाद डेविड मॉरिस ली कॉर्नेल विश्वविद्यालय के संकाय से जुड़े। वहाँ उन्हें परमाणु एवं ठोस-अवस्था भौतिकी के लिए एक नई अनुसंधान प्रयोगशाला स्थापित करने का दायित्व सौंपा गया। कॉर्नेल में अपने प्रारम्भिक वर्षों के दौरान उनकी भेंट डाना से हुई, जो उस समय विश्वविद्यालय के एक अन्य विभाग में डॉक्टरेट की छात्रा थीं। बाद में दोनों का विवाह हुआ और उनके दो पुत्र हुए।

कॉर्नेल विश्वविद्यालय में ली ने कई दशकों तक अध्यापन और अनुसंधान कार्य किया तथा निम्न-तापमान भौतिकी के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान दिए। 16 नवंबर 2009 को उन्होंने अपनी अनुसंधान प्रयोगशाला को कॉर्नेल विश्वविद्यालय से स्थानांतरित कर टेक्सास ए एंड एम विश्वविद्यालय में स्थापित किया, जहाँ उन्होंने अपने वैज्ञानिक कार्य को आगे बढ़ाना जारी रखा।[5][6]

सन्दर्भ

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  1. "The Nobel Prize in Physics 1996". नोबेल फाउंडेशन. अभिगमन तिथि: 2009-10-04.
  2. "David Lee | Department of Physics Cornell Arts & Sciences".
  3. "David Lee - Faculty Member | TAMU Physics & Astronomy". 30 सितंबर 2019.
  4. "David M. Lee". 7 दिसंबर 1996.
  5. "A&M lures Nobel Prize winner: Researcher of cold". 2009-09-29.
  6. "Nobel Prize Winner to Join Texas A&M Physics Faculty | Texas A&M University, College of Science". मूल से से 2010-03-07 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 2009-10-12.