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डेर जुडेनस्टेट

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डेर जुडेनस्टेट (यहूदी राज्य)
लेखकथियोडोर हर्ज़ल
भाषाजर्मन
विषयज़ायोनीवाद, यहूदी राष्ट्रवाद, राजनीतिक दर्शन
शैलीराजनीतिक घोषणापत्र
प्रकाशकएम. ब्राइटेनस्टीन पब्लिशिंग
प्रकाशन स्थानऑस्ट्रिया-हंगरी
पृष्ठ86 पृष्ठ (मूल जर्मन संस्करण)

डेर जुडेनस्टेट (जर्मन: Der Judenstaat, हिंदी अर्थ: यहूदी राज्य) ऑस्ट्रो-हंगेरियन यहूदी पत्रकार और दूरदर्शी थियोडोर हर्ज़ल द्वारा 1896 में प्रकाशित एक युगांतरकारी राजनीतिक घोषणापत्र है। इसका उपशीर्षक "यहूदी प्रश्न के आधुनिक समाधान का एक प्रयास" था। इस छोटी सी पुस्तिका को आधुनिक ज़ायोनीवाद का संस्थापक ग्रंथ माना जाता है। हर्ज़ल ने इसमें तर्क दिया कि यूरोप में यहूदियों के खिलाफ भेदभाव को समाप्त करने का एकमात्र तरीका एक स्वतंत्र, संप्रभु यहूदी राज्य की स्थापना करना है।[1][2][3]

पृष्ठभूमि और 'ड्रेफस मामला'

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थियोडोर हर्ज़ल एक धर्मनिरपेक्ष और पूरी तरह से यूरोपीय समाज में घुल-मिल चुके यहूदी थे। शुरुआत में उनका मानना था कि शिक्षा और एकीकरण से यूरोप में यहूदी-विरोध समाप्त हो जाएगा।

हालांकि, 1894 में जब वे पेरिस में पत्रकार के रूप में काम कर रहे थे, तब उन्होंने प्रसिद्ध ड्रेफस मामले को कवर किया। अल्फ्रेड ड्रेफस नामक एक निर्दोष यहूदी फ्रांसीसी सैन्य अधिकारी पर देशद्रोह का झूठा आरोप लगाया गया था, जिसके बाद पेरिस की सड़कों पर "यहूदियों को मार डालो" के नारे लगे। इस घटना ने हर्ज़ल को झकझोर दिया और उन्हें यह एहसास कराया कि समावेशन काम नहीं कर रहा है। चाहे यहूदी समाज में कितने भी वफादार और एकीकृत क्यों न हो जाएं, संकट के समय उन्हें हमेशा विदेशी ही माना जाएगा।

'डेर जुडेनस्टेट' का मूल तर्क यह है कि "यहूदी प्रश्न" न तो कोई धार्मिक मुद्दा है और न ही सामाजिक। हर्ज़ल ने इसे विशुद्ध रूप से एक राष्ट्रीय प्रश्न घोषित किया। उन्होंने लिखा, "हम एक राष्ट्र हैं-एक राष्ट्र।"। हर्ज़ल का तर्क था कि दुनिया भर में यहूदी एक अलग राष्ट्र का निर्माण करते हैं, लेकिन क्योंकि उनके पास अपना कोई भौगोलिक क्षेत्र या राजनीतिक संप्रभुता नहीं है, इसलिए वे हर जगह उत्पीड़न का शिकार होते हैं। इसका एकमात्र तार्किक समाधान यहूदियों का एक जगह पलायन और एक स्वतंत्र राज्य का निर्माण है।[4]

हर्ज़ल केवल सिद्धांतकार नहीं थे; उन्होंने 'डेर जुडेनस्टेट' में राज्य निर्माण की एक व्यावहारिक रूपरेखा भी प्रस्तुत की। उन्होंने दो मुख्य एजेंसियों की स्थापना का प्रस्ताव रखा:

  1. सोसाइटी ऑफ ज्यूस: यह एक राजनीतिक और कूटनीतिक संस्था होगी, जो दुनिया की महान शक्तियों (जैसे ओटोमन साम्राज्य या ब्रिटिश साम्राज्य) के साथ बातचीत करके यहूदी राज्य के लिए कानूनी मान्यता और अधिकार प्राप्त करेगी।
  2. ज्यूिश कंपनी: यह एक वित्तीय और आर्थिक संस्था होगी, जो यूरोप से यहूदियों के पलायन का प्रबंधन करेगी और नए राज्य में बुनियादी ढांचे, व्यापार और आवास के निर्माण के लिए रसद की व्यवस्था करेगी।

स्थान का प्रश्न: पुस्तक में हर्ज़ल ने नए राज्य के लिए दो संभावित स्थानों पर विचार किया-अर्जेंटीना (इसकी विशाल, उपजाऊ और कम आबादी वाली भूमि के कारण) और फिलिस्तीन (यहूदियों की ऐतिहासिक और धार्मिक मातृभूमि)। अंततः, यहूदी जनता के गहरे भावनात्मक जुड़ाव के कारण फिलिस्तीन को चुना गया।[5]

ऐतिहासिक प्रभाव

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'डेर जुडेनस्टेट' के प्रकाशन ने यूरोपीय यहूदियों के बीच एक भूचाल ला दिया। जहाँ कई रूढ़िवादी रब्बियों और धनी यहूदियों ने इसका विरोध किया, वहीं पूर्वी यूरोप के उत्पीड़ित यहूदियों ने हर्ज़ल को एक मसीहा के रूप में देखा। इस पुस्तक के प्रकाशन के एक साल बाद ही, अगस्त 1897 में स्विट्जरलैंड के बेसल में प्रथम ज़ायोनी कांग्रेस का आयोजन हुआ। हर्ज़ल ने अपनी डायरी में लिखा, "बेसल में, मैंने यहूदी राज्य की स्थापना की। यदि मैं आज यह कहूं, तो दुनिया हँसेगी; लेकिन पचास वर्षों में निश्चित रूप से, हर कोई इसे देखेगा।" उनकी यह भविष्यवाणी उल्लेखनीय रूप से सटीक साबित हुई, और 1948 में इज़राइल राज्य का उदय हुआ।[6]

सन्दर्भ

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  1. Laqueur, Walter (2003). A History of Zionism: From the French Revolution to the Establishment of the State of Israel. Schocken Books. pp. 85-96. ISBN 978-0805211498.
  2. "Biography, by Alex Bein"
  3. Great Jewish Thinkers: Their Lives and Work
  4. Hertzberg, Arthur (1997). The Zionist Idea: A Historical Analysis and Reader. Jewish Publication Society. pp. 204–212. ISBN 978-0827606227.
  5. Vital, David (1975). The Origins of Zionism. Oxford University Press. pp. 235-245. ISBN 978-0198271949.
  6. Kornberg, Jacques (1993). Theodor Herzl: From Assimilation to Zionism. Indiana University Press. pp. 160–175. ISBN 978-0253332035.

बाहरी कड़ियाँ

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