डीडवाना

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डीडवाना
आभानगरी , उपकाशी
शहर
डीडवाना की राजस्थान के मानचित्र पर अवस्थिति
डीडवाना
डीडवाना
राजस्थान में डीडवाना की स्थिति
निर्देशांक: 27°24′N 74°34′E / 27.4°N 74.57°E / 27.4; 74.57निर्देशांक: 27°24′N 74°34′E / 27.4°N 74.57°E / 27.4; 74.57
देशFlag of India.svg भारत
राज्यराजस्थान
जिलानागौर
संस्थापकडीडू शाह
शासन
 • प्रणालीगणतंत्र
 • विधायकयुनुस खान
ऊँचाई336 मी (1,102 फीट)
जनसंख्या (2011)
 • कुल53,328
भाषाएँ
 • आधिकारिकमारवाड़ी हिन्दी
समय मण्डलIST (यूटीसी+5:30)
पिन341303
दूरभाष कूट01580
वाहन पंजीकरणRJ-37
स्त्री/पुरुष980/1000
वेबसाइटwww.didwana.com

डीडवाना राजस्थान के नागौर जिले का शहर है।[1] डीडवाना का पुराना नाम आभानगरी था। डीडवाना मे सात बड़े दरवाजे है जो नगर की रक्षा हेतु निर्मित किये गये थे।

यह नगर रामानुज सम्प्रदाय के कारण प्रसिद्ध है। नगर में 400 वर्ष पुराना शयाम महाराज का मंदिर आज भी स्थित है। यह नगर सूफी संत ख्वाज़ा मोइनुद्दीन की याद में सम्राट अकबर द्वारा निर्मित किला मस्जिद के लिए भी प्रसिद्ध है। डीडवाना और इसके समीप गांवों के लोग भारत के महानगरो में महत्वपूर्ण पदों में और प्रसिद्ध उद्योगपति है। प्रसिद्ध माहेश्वरी अरबपति व्यापारिक परिवार बांगड़ डीडवाना से है।

डीडवाना में नमक की एक बहुत विशाल झील है, जो पूरे भारत में विख्यात है। इसी झील मे अंग्रेजो के समय का एक कारखाना है जहाँ पर सोडीयम सल्फेट का निर्माण होता था किन्तु वर्तमान समय मे यह जर्जरता की शिकार हो चुकी है।

डीडवाना का इतिहास[संपादित करें]

डीडवाना 5000 वर्ष पुराना नगर है। इसका पुराना नाम आभानगरी था। बाद में आभनगरी से बदल कर इसका नाम दीन दीदवाना कर दिया। नगर में अभी भी दीन दरवाज़ा स्थित है। दीन शब्द मुगलकाल में इस्लाम से आया था। और बाद में डिडू शाह नामक राजा ने इसका नाम बदल कर दीदवाना से डीडवाना कर दिया, जो की वर्तमान में है।

आधुनिक डीडवाना[संपादित करें]

डीडवाना के आधुनिक स्वरूप की बात करें तो डीडवाना विकास की चरम सीमा पर है। डीडवाना में 2 नवनिर्मित गेट है। जिनमे कुचामन रोड़ पर रहमान गेट और नागौर रोड़ पर अवंतिका गेट स्थित हैं। साथ ही डीडवाना में अब 7D रोड़ है। जो कि डीडवाना के मुख्य बाजार से गुजरती है। इसके साथ ही यहां एक पुनः निर्मित महिला महाविद्यालय भी हैं। जिसमे आसपास के गावो और राजस्थान के अन्य जगहों से लड़कियां पढ़ने आती है। और डीडवाना में सिंघी बास में एक नया खेल स्टेडियम बनाया गया है। जिसमे मंत्री यूनस खान द्वारा चलाई गई सुपर 8 क्रिकेट प्रतियोगिता के फाइनल मोके पर इंटरनेशनल भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी शिखर धवन पहुचे थे। डीडवाना में RTO कार्यालय भी स्थित है। यहां गाड़ियों की सीरिज RJ37 है। जो की कुचामन सीमा तक लगती है।

डीडवाना का विहंगम दृष्य (२०१३)

डीडवाना का स्वरूप[संपादित करें]

यहाँ स्थित नागोरी गेट जो प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हिन्दुस्तानियों की याद मे निर्मित हुआ था।

डीडवाना में 12 बास और 12 बासनी है। 7 गेट है। 6 चोक है। 5 पठानों की पोल है। डीडवाना में 12 बास है। जिनमे माली समाज के लोग निवास करते है। माली समाज के लोग डीडवाना में मिठाई के काम के लिए प्रसिद्ध है। वर्तमान में ये लोग विदेशो में भी मिठाई का काम करने लगे हैं, जेसे दुबई इटली सऊदी अरब आदि।।

१२ बास[संपादित करें]

इनके 12 बास के नाम इस प्रकार है।

1. हरनारायण बास

2. कादिया बास

3. झालरा बास

4. पखालिया बास

5. बंगला बास

6. आढगा बास

7. कटला बास

8. पदमानिया बास

9. सिंघी बास

10. टीबा बास

11. भाटी बास

12. कुमानिया बास

१२ बसनी[संपादित करें]

डीडवाना के नजदीक 12 गांव हैं जिन्हें '12 बासनी' कहा जाता है, जहाँ देशवाली मुस्लिम समाज के लोग रहते हैं।

1. रामसाबास

2. लाडाबासनी

3. कात्याबासनी

4. खींच्याबासनी

5. मल्लाबासनी

6.गरदेजयाबासनी

7. शेखाबासनी

8. दादु बासनी

9. शेरानीआबाद

10. अमरपुरा

11. दौलतपुरा

12. बाल्या

७ दरवाजे[संपादित करें]

डीडवाना के 7 दरवाज़ों के नाम इस प्रकार है।

1. नागौरी गेट

2. अजमेरी गेट

3. कोट गेट

4. दिन दरवाज़ा

5. छापरी गेट

6. फतेहपुरी गेट

7. खिड़की दरवाज़ा ( यह दरवाज़ा अभी पूरी तरह से खत्म हो चुका है )

प्रमुख चौक[संपादित करें]

डीडवाना में समाज के आधार पर कुछ चौक और प्रसिद्ध इलाके भी है।

1. नरसिंह चौक (नरसिंह मंदिर के पास)

2. श्याम जी का चौक (श्याम जी मंदिर के पास)

3. गगडो का चौक

4. बांगड़ चौक

5. गणपति नगर

6. घोडावतों का चौक

7. भार्गव चौक जहाँ डाकोत समाज के लोग निवास करते थे। वर्तमान में यह शहर के मुख्य बाजार में तब्दील हो गया है।

8. मजजियो का चौक झालरिया मठ के पास आदि।

और मुस्लिम समाज के प्रसिद्ध इलाको में से है।

1.मोहल्ला सैयद काजियान

2.पठानों की पांच पोल जो की ऐतिहासिक है।

वर्तमान में जहाँ कसाई समाज के लोग बड़ी संख्या में रहते है। वली कॉलोनी के नाम से जानी जाती है।

धार्मिक नगर का स्वरूप[संपादित करें]

फाल्गुन मास की छठ तिथि को नगर के ऐतिहासिक निरंजनी संप्रदाय के मंदिर गाढ़ाधाम दयाल बगीची में मेला भरता है। निरंजनी संप्रदाय का खास पर्व छठ गुदड़ी का मेला एक विशेष महत्व रखता है। इस मेले में निरंजनी संप्रदाय के देशभर में फैले साधु संत आते हैं और एकदशी तक रामनाम की धून के साथ हरीकीर्तन करते हैं। हरिसिंह से बने हरिदास: सम्प्रदाय के प्रमुख हरिदासजी महाराज जो पूर्व में डाकू हरिसिंह के नाम से जाने जाते थे। इस आभानगरी ने अनेक शताब्दियों तक जमाने के विविध रूपों को देखा है। नाथ सम्प्रदाय के 12 पंथ यहीं से उदघोषित हुए हैं।  देशभर में फैला निरंजनी संप्रदाय भी यहीं की देन है। 52 शिष्यों के गुरू स्वामी हरिदासजी का बाल्यकाल से जवानी तक का समय उतना ही कंटका कीर्ण रहा जितना शोभ्य, सुरभ्य, अष्टांगयोगी व सिद्ध पौरूषवान उसका जीवन जवानी से समाधि तक रहा। डीडवाना से 5 किमी पश्चिमोत्तर में गांव कापड़ोद में विक्रम संवत 1512 में सांखला राजपूत परिवार में जन्मे हरिसिंह लुटखसोट का कार्य करते थे। उनके कर्म का केन्द्र बिंदु खोशल्या कुआ भी जीर्ण शीर्ण स्थिति में मौजूद है। अपनी 40 वर्ष की अवस्था में देशाटन पर आए गुरु गौरखनाथ ने हरिसिंह के उनके अंत:चक्षुओं को खोला तो उन्हें अपने कुकृत्यों पर ग्लानी हुई। उन्होंने तीखली डुंगरी पर अपना डेरा जमाया और तपस्या शुरू कर दी। कुछ ही वर्षो में उनके द्वारा किए गए सारे अमानुषिक कृत्यों के पाप गुरू कृपा से धुल गए है। उन्होंने विद्या प्राप्त किए ही शास्त्र अध्ययन यम नियम, आसन, प्राणायाम व अष्टांगयोग साधना में महारथ हासिल की और साधना को सिद्ध भी किया। प्रमुख हिन्दी लेखकों में मिश्रबंधु आचार्य रामचंद्र, आचार्य चतुरसैन व पं॰ चंद्रगुलेरी आदि ने इनके जीवन पर अच्छा प्रकाश डाला। इतिहासकारों ने इनके द्वारा किए गए देशाटन से सम्बंधित अनेक प्रसंगों का उदाहरण दिया है भुताबावड़ी, नागौर, अधरशीला, सिंह का पर्चा, आमेर, हाथीभटा अजमेर, जीवदान सिंघाना, विश्वपान जोबनेर आदि के अलावा डीडवाना का पीपली मंदिर आज भी मौजूद है। 500 वर्ष पुराना स्थिल गाढाधाम जहां देश देशान्तर से निरंजनी संप्रदाय के साधु संत इस पर्व पर आते हैं। इस दौरान शहर में कई साधु-संतों का जमावड़ा हने से शहर की रौनक अलग ही दिखती है।B

सन्दर्भ[संपादित करें]