डायमटी मृदा
| डायटोमेसियस पृथ्वी (Diatomaceous earth) | |
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सिसकॉक फॉर्मेशन से प्राप्त डायटोमाइट चट्टान का नमूना | |
स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप द्वारा लिया गया डायटोमेसियस पृथ्वी का सूक्ष्म चित्र | |
| अन्य नाम | डायटोमाइट (Diatomite), सेलाइट (Celite), कीज़ेलगुर (Kieselgur) |
| चट्टान का प्रकार | तलछटी चट्टान (Sedimentary rock) |
| मुख्य रासायनिक घटक | सिलिका (SiO2) 80-90%, एल्युमिना 2-4%, आयरन ऑक्साइड 0.5-2% |
| कणों का आकार | आमतौर पर 10 से 200 माइक्रोन (μm) |
| प्राथमिक स्रोत | डायटम (एककोशिकीय कड़ाही शैवाल) के जीवाश्म अवशेष |
| प्रमुख औद्योगिक उपयोग | फिल्ट्रेशन, प्राकृतिक कीटनाशक, डायनामाइट का स्थिरीकरण, अपघर्षक (Abrasive) |
डायटोमेसियस पृथ्वी (Diatomaceous earth), जिसे कलीसियाई रूप से डायटोमाइट (Diatomite), सेलाइट (Celite), या कीज़ेलगुर (Kieselgur) भी कहा जाता है, प्रकृति में स्वाभाविक रूप से पाई जाने वाली एक नरम, सिलिकायुक्त तलछटी चट्टान (Sedimentary rock) है। इसे आसानी से पीसकर एक महीन सफेद या हल्के मटमैले रंग के पाउडर में बदला जा सकता है। इसके कणों का आकार (Particle size) आमतौर पर 10 से 200 माइक्रोन (μm) के बीच होता है।[1] अपनी अत्यधिक सरंध्रता (High Porosity) के कारण इसका घनत्व बहुत कम होता है और छूने पर यह पाउडर प्यूमिस पाउडर की तरह हल्का खुरदरा (Abrasive) महसूस होता है। कड़े ओवन-ड्राइड नमूनों में मुख्य रूप से 80 से 90% सिलिका, 2 से 4% एल्युमिना (मिट्टी के खनिजों के कारण), और 0.5 से 2% आयरन ऑक्साइड पाया जाता है।[2]
यह मुख्य रूप से **डायटम (Diatoms)** नामक सूक्ष्म, एककोशिकीय और कठोर आवरण वाले माइक्रोएल्गे (Microalgae) के लाखों वर्षों से संचित कलीसियाई जीवाश्म अवशेषों से बनी है।[3] इसका उपयोग बड़े पैमाने पर उद्योगों में फिल्ट्रेशन, टूथपेस्ट और मेटल पॉलिश में हल्के खुरदरे घटक के रूप में, कस्टमाइज्ड यांत्रिक कीटनाशक (Mechanical Insecticide), तरल पदार्थों को सोखने वाले स्पंज, प्लास्टिक और रबर में फिलर के रूप में, डायनामाइट को स्थिर करने वाले एक आवश्यक घटक के रूप में और बोनसाई जैसे पौधों की मिट्टी के कंडीशनर के रूप में किया जाता है।
रासायनिक संरचना और गठन
[संपादित करें]डायटोमाइट का गठन तब होता है जब झीलों या कलीसियाई समुद्री तलछटों में मृत डायटम के अनाकार सिलिका (ओपल, साँचा:Chem2) के अवशेष जमा होने लगते हैं। इन सूक्ष्म जीवों के बाहरी आवरण को 'फ्रस्टुल्स' (Frustules) कहा जाता है। डायटम में पानी से सिलिका को सोखने की अद्भुत जैविक क्षमता होती है। जब ये जीव मर जाते हैं, तो उनका जैविक हिस्सा नष्ट हो जाता है और सिलिका का यह कठोर खोल तलहटी में जमा होकर चट्टान का रूप ले लेता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, डायटम द्वारा उत्पादित मूल सिलिका का केवल 0.05% से 0.15% हिस्सा ही भूवैज्ञानिक रिकॉर्ड में चट्टानों के रूप में सुरक्षित रह पाना है।
ऐतिहासिक खोज
[संपादित करें]वर्ष 1836 या 1837 के दौरान, उत्तरी जर्मनी के ल्यूनेबर्ग हीथ में एक कुआं खोदते समय पीटर कास्टन नामक एक जबीं किसान ने दुर्घटनावश इस सिलिकायुक्त मिट्टी (जर्मन: कीज़ेलगुर) की खोज की थी। प्रथम विश्व युद्ध के समय तक, पूरी दुनिया में डायटोमेसियस पृथ्वी का लगभग पूरा व्यावसायिक उत्पादन इसी जर्मन क्षेत्र से होता था। अमेरिका में इसके विशाल समुद्री तलछट भंडार कैलिफ़ोर्निया के सांता बारबरा काउंटी में 'सिसकॉक फॉर्मेशन' (Sisquoc Formation) के पास पाए जाते हैं, जो दुनिया का सबसे बड़ा डायटोमाइट क्षेत्र माना जाता है।
प्रमुख औद्योगिक और घरेलू उपयोग
[संपादित करें]डायनामाइट और अल्फ्रेड नोबेल का आविष्कार
[संपादित करें]वर्ष 1866 में, प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल ने खोजा कि अत्यधिक अस्थिर और खतरनाक तरल 'नाइट्रोग्लिसरीन' (Nitroglycerin) को यदि कीज़ेलगुर (डायटोमाइट पाउडर) में सोखने के लिए छोड़ दिया जाए, तो वह पूरी तरह से स्थिर और सुरक्षित हो जाता है। इस कूट खोज के दम पर नोबेल ने 1867 में डायनामाइट (Dynamite) का पेटेंट कराया, जिसे 'गुहर डायनामाइट' भी कहा जाता था। इसने निर्माण और खनन उद्योग को पूरी तरह बदल दिया।[4]
जल शुद्धिकरण और फिल्ट्रेशन
[संपादित करें]जर्मन इंजीनियर विल्हेम बर्कफेल्ड ने डायटोमेसियस पृथ्वी की भारी सोखने की क्षमता को पहचानकर इससे कस्टमाइज्ड फिल्टर मोमबत्तियां (Filter candles) बनाईं। वर्ष 1892 में जब हैमबर्ग में भयंकर हैजा (Cold) फैला, तो इन बर्कफेल्ड फिल्टर्स ने पानी को साफ करके हजारों लोगों की जान बचाई थी। आज भी स्विमिंग पूल, वाइन, बीयर, सिरप और चीनी के कारखानों में अशुद्धियों को छानने के लिए इसका व्यापक उपयोग होता है।
जैविक कीट नियंत्रण (प्राकृतिक कीटनाशक)
[संपादित करें]यह पाउडर एक बेहतरीन प्राकृतिक कीटनाशक का काम करता है। जब रेंगने वाले कीड़े (जैसे खटमल, कॉकरोच, चींटियां) इसके संपर्क में आते हैं, तो यह तीखा पाउडर उनके मोम जैसे बाहरी सुरक्षात्मक आवरण (Exoskeleton Lipids) को सोख लेता है और उसे छील देता है। इससे कीड़ों के शरीर का पानी तेजी से वाष्पीकृत हो जाता है और वे पूरी तरह से निर्जलीकरण (Dehydration) के कारण मर जाते हैं। रासायनिक कीटनाशकों के विपरीत, कीड़े कभी भी इस भौतिक हमले के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) विकसित नहीं कर पाते।
सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां
[संपादित करें]यद्यपि प्राकृतिक अनाकार (Amorphous) सिलिका मानव स्वास्थ्य के लिए कम हानिकारक है, लेकिन व्यावसायिक रूप से स्विमिंग पूल फिल्टर्स के लिए बेची जाने वाली डायटोमेसियस पृथ्वी को अत्यधिक उच्च तापमान पर तपाया (Calcination) जाता है। इस प्रक्रिया के कारण यह 'क्रिस्टलीय सिलिका' (Crystalline Silica) में बदल जाती है। फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों द्वारा लंबे समय तक सांस के जरिए इस बारीक क्रिस्टलीय धूल को अंदर खींचने से फेफड़ों की गंभीर और लाइलाज बीमारी सिलिकोसिस (Silicosis) और न्यूमोकोनियोसिस हो सकती है। इसी वित्तीय और स्वास्थ्य जोखिम के कारण, अमेरिकी संस्था 'ओशा' (OSHA) कार्यस्थलों पर हवा में इसकी मात्रा को कड़े नियमों द्वारा नियंत्रित करती है।[5]
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]संदर्भ
[संपादित करें]- ↑ Dobrosielska, Marta (May 18, 2022). "Influence of Diatomaceous Earth Particle Size on Mechanical Properties". Materials. 15: 3607.
- ↑ Antonides, Lloyd E. (1997). Diatomite. USGS.
- ↑ Rojht, Helena (2010). "Impact of geochemical composition of diatomaceous earth on its insecticidal activity". Journal of Pest Science. 83: 429–436.
- ↑ "Nitroglycerine and Dynamite". NobelPrize.org. June 11, 2013.
- ↑ Hughes, Janet M. (1998). "Radiographic Evidence of Silicosis Risk in the Diatomaceous Earth Industry". American Journal of Respiratory and Critical Care Medicine. 158: 807–814.