ठाकुर लक्ष्मण सिंह

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ठाकुर लक्ष्मण सिंह मूलतः जैतपुर के एक दौवा अहीर राजा थे, 1807 में उन्हे अंग्रेज़ी हुकूमत से बुंदेलखंड के नईगांव रीवाई इलाके पर शासन करने की सनद प्राप्त हुई।[1]

कुँवर जगत सिंह[संपादित करें]

ठाकुर लक्ष्मण सिंह की मृत्यु के बाद उनके पुत्र कुँवर जगत सिंह 1808 में राजा बने और 1838 तक सत्तासीन रहे। 1838 में उनकी मृत्यु हो गयी।

ठकुराइन लरई दुलइया[संपादित करें]

पति जगत सिंह की मृत्यु के बाद ठकुराइन लरई दुलया 1839 में सिंहासन पर आसीन हुयी। उन्हें प्रमुख शासक का दर्जा व 6 घुड़सवार, 51 पैदल सैनिक व 1 तोप का सम्मान प्राप्त था।  ठकुराइन लड़ई दुलईया यादव को बुंदेलखंड की सुयोग्य प्रशासिकाओं में गिना जाता है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Sir Roper Lethbridge (2005). "The Golden Book of India: A Genealogical and Biographical Dictionary of the Ruling Princes, Chiefs, Nobles, and Other Personages, Titled Or Decorated of the Indian Empire". Aakar Books. पृ॰ 371. मूल से 27 अक्तूबर 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 27 October 2014.