ठाकुर वंश

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ठाकुर परिवार[1][2][3] जिसका इतिहास तीन सौ वर्ष से भी पुराना है[4] बंगाली नवजागरण के समय से ही कलकत्ता के प्रमुख परिवारों में से एक रहा है।[5] इस परिवार में कई ऐसे महापुरुषों का जन्म हुआ जिन्होंने कला, साहित्य, समाज सुधार आदि के कार्यों में अभूतपूर्व योगदान दिया है।[6][7]

परिवार का इतिहास[संपादित करें]

ठाकुरों का असली उपनाम था कुशारी। वे ररही ब्राह्मण थे और पश्चिम बंगाल के बुर्दवान जिले के कुशल गाँव के निवासी थे। रविन्द्रनाथ ठाकुर के जीवनी लेखक प्रभात कुमार मुखर्जी ने अपनी पुस्तक रवीन्द्रजीबनी ओ रवीन्द्र साहित्य प्रबेषिका में लिखा है कि:-

The Kusharis were the descendants of Deen Kushari, the son of Bhatta Narayana; Deen was granted a village named Kush (in Burdwan Zilla) by Maharaja Kshitisura, he became it's chief and came to be known as Kushari.

अर्थात्

कुशारी भट्टनारायण के पुत्र दीन कुशारी के वंशज थे। महाराज क्षितिसुर ने दीन को बुर्दवान जिले का कुश गाँव दान में दिया था; वो वहाँ का सरदार बन गया और इसी कारण कुशारी कहलाया गया।[8]

ठाकुरों की पृष्ठभूमि[संपादित करें]

ठाकुर बंगाली ब्राह्मण हैं।[9][10][11][12][13][14][15]पुराना नाम कुशारी या तो उन्हें उसी नाम के गाँव से या शाण्डिल्य गोत्र के बंधोपाध्याय से मिला है जो 18वीं सदी में बंगाल के पूर्वी भाग (अब बांग्लादेश) से आए थे और हुग्ली नदी के बाएँ तट पर (रार्ह में) बस गए। (पहला व्यक्ति पंचानन कुशारी 1720 में गोविंदपुर इलाके में बस गया था और ब्रिटिश के कब्जा कर लेने पर जोरासांको चला गया जो कि सुल्तानी के दक्षिण में था।)

चित्रा देव ने बंगाल के नवजागरण में ठाकुर वंश के सहयोग के विषय में लिखा है:-

संदर्भ[संपादित करें]

  1. सही शब्द है ঠাকুর
  2. From Thakur to Tagore, Syed Ashraf Ali, The Star May 04, 2013
  3. Deb, Chitra, pp 64-65"
  4. Deb, Chitra, pp 64–65.
  5. Deb, Chitra, pp 64-65
  6. Deb, Chitra, pp 64-65"
  7. "The Tagores and Society". Rabindra Baharati University. अभिगमन तिथि 24 April 2007.
  8. https://ia801600.us.archive.org/BookReader/BookReaderImages.php?zip=/5/items/in.ernet.dli.2015.339410/2015.339410.Rabindrajibani-O_jp2.zip&file=2015.339410.Rabindrajibani-O_jp2/2015.339410.Rabindrajibani-O_0041.jp2&scale=13.50599520383693&rotate=0
  9. Tagore, Rathindranath (December 1978). On the edges of time (New ed.). Greenwood Press. p. 2. ISBN 978-0313207600.
  10. Mukherjee, Mani Shankar (May 2010). "Timeless Genius". Pravasi Bharatiya: 89, 90.
  11. Banerjee, Hiranmay (1995). Tagores of Jorasanko. Gyan Publishing House.
  12. RoyChowdhury, Sumitra (1982). The Gurudev and the Mahatma. Subhada-Saraswata Publications. p. 29.
  13. Aruna Chakravarti, Sunil Gangopadhyaya. Those Days. pp. 97–98. ISBN 9780140268522.
  14. Thompson, Edward (1948). Rabindranath Tagore : Poet And Dramatist. Oxford University Press. p. 13.
  15. Rabindranath tagore A Centenary Volume 1861–1961. Sahitya Academy. ISBN 81-7201-332-9.