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टाइम मशीन

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टाइम मशीन या समय यात्रा यंत्र (अंग्रेज़ी: Time machine) एक काल्पनिक या सैद्धांतिक यंत्र है जो समय यात्रा की अनुमति देता है।

संकल्पना

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टाइम मशीन एक ऐसा यंत्र है जो क्लोज़्ड टाइमलाइक कर्व्स (बंद समय सदृश वक्र) (CTCयों) उत्पन्न करता है — और इस प्रकार समय यात्रा को संभव बनाता है, जहाँ पहले ऐसा संभव नहीं था।

टाइम मशीन एक ऐसा उपकरण है जो समय यात्रा को संभव बनाता है।[1][2][3]

दर्शनशास्त्र का स्टैनफोर्ड ज्ञानकोष (स्टैनफोर्ड एनसाइक्लोपीडिया ऑफ फिलॉसफी) टाइम मशीनों के दो प्रकारों में भेद करता है:

  1. काल्पनिक (विज्ञान कथा) टाइम मशीनें, जो भौतिकी के नियमों से परे होती हैं।
  2. सैद्धांतिक (Hypothetical) टाइम मशीनें, जो CTCयों पर आधारित होती हैं और जिन पर आधुनिक भौतिकी में चर्चा होती है।

पॉल जे. नाहिन "कमज़ोर" और "मज़बूत" टाइम मशीनों में अंतर करते हैं:

  • कमज़ोर: पहले से मौजूद CTCयों का उपयोग करती हैं।
  • मज़बूत: स्वयं CTCयों का निर्माण करती हैं।

संबंधित अवधारणाएँ

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ब्रैव न्यू वर्ल्डस्: द ऑक्सफोर्ड डिक्शनेरी ऑफ साइंस फिक्शन और द इनसाइक्लोपीडिया ऑफ साइंस फिक्शन जैसे स्रोत टाइम स्लिप से अंतर बताते हैं, जहाँ समय यात्रा बिना तकनीकी उपकरणों के होती है।[4]

द इनसाइक्लोपीडिया ऑफ साइंस फिक्शन समय द्वार या प्रवेशद्वार जैसी अवधारणाओं का उल्लेख करती है जो अचल होते हैं।

कुछ उपकरण जैसे:

  • समय दर्शक – केवल समय को देखने की अनुमति देता है।
  • समय रेडियो – अन्य समय काल से संवाद की अनुमति देता है। [2]

समय यात्रा की कल्पना १७०० के दशक से साहित्य में दिखाई देती है, लेकिन मशीन द्वारा समय यात्रा का पहला उदाहरण एडवर्ड पेज मिशेल की १८८१ की कहानी "द क्लॉक थाट वेंट बैक्वर्ड" (घड़ी जो पीछे चली गई) में मिलता है।

"टाइम मशीन" शब्द की उत्पत्ति ऍच॰ जी॰ वेल्स की १८९५ की पुस्तक द टाइम मशीन में हुई।

बाद के विज्ञान-कथा में, टाइम मशीनें कभी-कभी पहनने योग्य भी दर्शाई गई हैं।[2]

भौतिकी में

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टाइम मशीन का पहला सैद्धांतिक आधार १९४९ में कुर्ट गेडेल द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिन्होंने सिद्ध किया कि CTCयों अल्बर्ट आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता सिद्धांत के अनुरूप हो सकते हैं, बशर्ते ब्रह्मांड कुछ विशेष गुणों (जैसे घूर्णनशील ब्रह्मांड) वाला हो।

नाहिन कहते हैं कि गेडेल की अवधारणा में CTCयों का प्रयोग एक “कमज़ोर” टाइम मशीन का उदाहरण है, क्योंकि वह CTCयों बनाती नहीं, बल्कि पहले से मौजूद CTCयों का उपयोग करती है।

इसके बाद कई अन्य सैद्धांतिक टाइम मशीन मॉडल प्रस्तावित किए गए हैं:

  • टिपलर सिलिंडर – फ्रैंक जे. टिपलर द्वारा १९७४ में वर्णित।
  • वॉर्महोल पर आधारित टाइम मशीनें – जिनका वर्णन मॉरिस, किप थॉर्न और उल्वी युर्तसेवर ने १९८८ में किया। [5][6][1]

यह भी देखें

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  1. 1 2 3 Earman, John; Wüthrich, Christian; Manchak, JB (2024), Zalta, Edward N.; Nodelman, Uri (eds.), "Time Machines", Stanford Encyclopedia of Philosophy (Summer 2024 ed.), Metaphysics Research Lab, Stanford University, अभिगमन तिथि: 2025-03-06 उद्धरण त्रुटि: अमान्य <ref> टैग; "StanfordEncyclopediaOfPhilosophyTimeMachine" नाम कई बार भिन्न सामग्री के साथ परिभाषित है
  2. 1 2 3 उद्धरण त्रुटि: अमान्य <ref> टैग; "SFETimeMachine" नाम कई बार भिन्न सामग्री के साथ परिभाषित है
  3. Pilkington, Ace G. (2017). "Time Machine". Science Fiction and Futurism: Their Terms and Ideas. Critical Explorations in Science Fiction and Fantasy (अंग्रेज़ी भाषा में). Vol. 58. McFarland. pp. 137–139. ISBN 978-0-7864-9856-7.
  4. Nahin, Paul J. (2014). "Time Travel: Fact or Fantasy?". Holy Sci-Fi!. Science and Fiction (अंग्रेज़ी भाषा में). Springer Science & Business Media. p. 149. डीओआई:10.1007/978-1-4939-0618-5_7. ISBN 978-1-4939-0618-5.
  5. Webb, Stephen (2017). "Closed Timelike Curves". All the Wonder that Would Be: Exploring Past Notions of the Future. Science and Fiction (अंग्रेज़ी भाषा में). Springer. pp. 139–146. डीओआई:10.1007/978-3-319-51759-9_5. ISBN 978-3-319-51759-9.