झेलम का युद्ध

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झेलम के युद्ध के पश्चात सिकंदर और यादव सम्राट पोरस

झेलम का युद्ध झेलम नदी के किनारे सिकंदर और पंजाब के यदुवंशी सम्राट पोरस के बीच हुआ था। इस युद्ध में सिकंदर ने पोरस को पराजित कर दिया, मगर उसके साहस से प्रभावित होकर सिकंदर ने पोरस को जीवित छोड़ दिया तथा पोरस और सिकंदर में मित्रता बन गया। युद्ध के बाद सिकंदर थकी हुई सेना ने व्यास (विपासा) नदी से आगे बढ़ने से इंकार कर दिया। सिकंदर भारत में लगभग 19 महीने (326 ईसवी पूर्व से 335 ईसवी पूर्व तक) रहा। इसे हाईडेस्पीज (Hydaspes) का युद्ध भी कहते हैं।[1] लढाई मे सिकंदर ने पोरस राजा हरा दिया युध्द समाप्ती की घोषणा हुई राजा पोरस ने अपनी तलवार सिकंदर के हाथ दि और पोरस घटने के उपर खडे होकर अपनी गर्दन झुका दी पोरस राजा की निडर ऑखे देखी पोरस राजा के निर्भय तेवर और विनम्रता देखकर राजा सिकंदर ने कहा मै सारी दुनिया से जीता लेकीन आज मै हार गया ये दुनिया खुन खराबे से नही सिर्फ प्रेम से भी जा सकती ये सबक सिकंदर अपने लेकर अपने देश की ओर निकल पडा

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Bosworth, A. B. (1993). Conquest and Empire: The Reign of Alexander the Great (अंग्रेज़ी में). Cambridge University Press. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-521-40679-6. अभिगमन तिथि 14 जुलाई 2021.