झुन्झुनू

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झुन्झुनू
—  शहर  —
निर्देशांक: (निर्देशांक ढूँढें)
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य राजस्थान
महापौर
संतोष अहलावत
जनसंख्या 118,473 (2011 के अनुसार )
भारत के राजस्थान प्रान्त में झुन्झुनू नगर के संस्थापक जुझारसिंह नेहरा की मूर्ती

झुन्झुनू राजस्थान राज्य में एक शहर और जिला है।

इतिहासकारों के अनुसार झुंझुनू को कब और किसने बसाया, इसका स्पष्ट विवरण नही मिलता है| उनके अनुसार पांचवी-छठी शताब्दी में गुर्जर काल में झुंझुनू बसाया गया था| आठवीं शताब्दी में चौहान शासकों के काल का अध्ययन करते हैं तो उसमे झुंझुनू के अस्तित्व का उल्लेख मिलता है| डॉ. दशरथ शर्मा ने तेहरवी शताब्दी के कस्बों की जो सूची दी है उसमे झुंझुनू का भी नाम है| इसी प्रकार अनंत और वागड राज्यों के उल्लेख में भी झुंझुनू का अस्तित्व कायम था|

सुलतान फिरोज़ तुगलक (ई. सन १३३८-१३५१) के बाद कायमखानी वंशज आये| कहते हैं, कायम खान के बेटे मुहम्मद खान ने झुंझुनू में अपना राज्य कायम किया, इसके बाद लगातार यह क्षेत्र कयामखानियों के अधिपत्य में रहा| एक उल्लेख यह भी मिलता है की सन १४५१-१४८८ के बीच झुन्झा नमक जाट ने झुंझुनू को बसाया|

झुंझुनू का अन्तिम नवाब रुहेल खान जो आस-पास के अपने ही वंश के नवाबों से प्रताड़ित था| ऐसे में शार्दूल सिंह शेखावत को यहाँ बुला लिया| रुहेल खान की मृत्यु के बाद विक्रम सम्वत १७८७ में झुंझुनू पर शेखावत राजपूतों का अधिपत्य हो गया जो जागीर अधिग्रहण तक चलता रहा|

शार्दूल सिंह के निधन के बाद उसके पाँच पुत्रों जोरावर सिंह, किशन सिंह, अक्षय सिंह, नवल सिंह और केशरी सिंह के बीच झुंझुनू ठिकाने का विभाजन हुआ| यही पंच्पना कहलाया| इतिहासकारों के अनुसार जोरावर सिंह व् उनके वंशजो के अधीन चौकड़ी, मलसीसर, मंडरेला, डाबडी, चानना, सुल्ताना, ओजटू, बगड़, टाई, गांगियासर, कलि पहाड़ी आदि का शासन था, जबकि किशन सिंह और उनके वंशज खेतड़ी , अलसीसर, हीरवा, अडूका, बदनगढ, सीगडा,तोगडा, बलरिया आदि के शासक रहे| नवल सिंह और उनके वंशजों के अधीन नवलगढ़, मंडवा, महनसर, मुकुंदगढ़, इस्माईलपुर, परसरामपुरा, कोलिंदा आदि की शासन व्यवस्था थी| जबकि केशरी सिंह व् उनके वंशजों का बिसाऊ, सुरजगढ और डून्डलोद में शासन रहा|  अक्षय सिंह चूँकि नि:संतान थे, अत: उनका हिस्सा अन्य भाइयों को दे दिया गया|

अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ झुंझुनू जिले में व्याप्त जनाक्रोध कई आंदोलनों के रूप में सामने आया| स्वतंत्रता सैनानी सावलराम के अनुसार इस जनपद में आर्य समाज आन्दोलन, जकात आन्दोलन, जागीरदारों के खिलाफ आन्दोलन प्रजा मंडल आन्दोलन और अंग्रेजों के विरुद्ध आन्दोलन चले जो कमोबेश एक दुसरे के पूरक थे|

इतिहासकार मोहन सिंह लिखते हैं की जयपुर राज्य की सबसे बड़ी निजामत शेखावाटी थी जिसमा वर्तमान झुंझुनू और सीकर जिले की सम्पूर्ण सीमाएं थी| शेखावाटी निजामत का कार्यालय झुंझुनू में था| सन १८३४ में झुंझुनू एसा मजोर हेनरी फोस्टर ने एक जगह फौज का गठन किया था जिसका नाम शेखावाटी ब्रिगेड रखा गया| झुंझुनू में जिस जगह यह फौज रहती थी वह इलाका आज भी छावनी बाज़ार और छावनी मोहल्ला कहलाता हैं|

आज के समय में झुंझुनू जिले में शिक्षा का स्तर काफी हद तक पहुँच चुका है , जिले से काफी संख्या में आईएएस अधिकारी , आईपीएस अधिकारी , सेना अधिकारी , RAS अधिकारी सेवारत है | जिले में सैनिको को संख्या भी अत्यधिक मात्र में है |

झुंझुनू जिले में अनेक छोटे बड़े दर्शनीय स्थल है जैसे रानी सती का मंदिर, काली पहाड़ी, खेतड़ी महल आदि , साथ ही स्वामी विवेकानंद का संबंध भी खेतड़ी के राजा अजीत सिंह से रहा है जोकि इसी जिले के आधीन तहसील क्षेत्र है | खेतड़ी तहसील में हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड का कॉपर उप्रकम भी कार्यरत है झुंझुनू की सीमा हरियाणा से लगती है पचेरी, शिमला जैसे गाँव हरियाणा के गोद बलावा (कृष्ण नगर) के नजदीक है |

राजस्थान के शेखावाटी इलाके के तीन जिलों चूरू,सीकर और झुंझुनू में हुँ--देश के तमाम बड़े औद्योगिक घराने फिर चाहे वो बिरला हो,मित्तल या बजाज हो,डालमिया या रुइया हो,पोद्दार हो,गोयनका हो,देवरा हो या केडिया सब इसी शेखावटी माटी के लाल है। इसी माटी ने देश को सबसे ज्यादा वीर सपूत दिए जिन्होंने भारतीय फौज में देश के लिए लड़ते हुए वीरगति पाई

चारो तरफ बीहड़ इस माटी ने देश को ना जाने कितने सपूत दिए

आष्चर्यजनक रूप से एक सवाल जो कार में सफर करते बार बार मेरे मन में आ रहा था वो ये की आखिर क्या खास बात है शेखावटी की इस माटी में जो यहां से निकलने वाला हर छोरा देश का नाम दुनिया भर में रोशन करता है,या फौज में जाता है या व्यापारी बनता है

ना यहां पानी की भरमार है,न अनाज की पैदावार ज्यादा है,मिट्टी के टीले रेतीले है--वृक्ष भी फलदार नही है--हवा भी शुष्क है--गर्मी में भीषण गर्मी और ठंड में भीषण ठंड यहां के लोगो की मजबूरी है--पढ़ाई के लिए भी मशक्कत ज्यादा है,दूर दराज गाव के बच्चों को शहर कस्बे तक पढ़ाई के लिए आने में काफी दिक्कतों का सामाना करना पड़ता है

फिर कैसे यहां के बच्चे देश के टॉप इंडस्ट्रलिस्ट,चार्टर्ड अकाउंटेंट, आईएएस,लीडर,बिजनेसमैन, व्यापारी बनते है

लोगो से बात की,हवेलियों में,ढाबो पर रुका--बातचीत में लोगो का गजब का आत्मविश्वास,अभावो के चलते कुछ कर दिखाने की अदम्य इच्छाशक्ति मुझे सहज नज़र आई

कोई बच्चा नौकरी की बात नही कर रहा था,सब या तो व्यापारी, या बड़े ब्यूरोक्रेट,या सीए बनने की बात कर रहे थे

झुंझुनू में एक गाँव है मंडावा --इंडियन एक्सप्रेस अखबार के मालिक रामनाथजी गोयनका इसी मंडावा गाव से है--मुम्बई के कई बिल्डर,व्यापारी भी इसी गांव से है--बगल में दूसरा गाव है बिसाऊ--मुम्बई की बड़ी चॉइस कम्पनी के पाटोदिया,पोद्दार,अग्रवाल इसी गाव के है--झुंझुनू जिले के एक और कस्बे पिलानी के देश के मशहूर औद्योगिक घराने आदित्य बिड़ला का परिवार बिलॉन्ग करता है--डालमिया भी यही के है--बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी फतेहपुर के है तो मुरली देवरा का परिवार सीकर लक्ष्मणगढ़ से बिलॉन्ग करते है--नवलगढ़ से मोरारका और सेठ अनंदराय पोद्दार परिवार,मलसीसर से लक्ष्मी मित्तल और रामगढ़ से रुइया परिवार की जड़े जुड़ी है--

पता करने पर यर बात पता चली की शेखावटी इलाके के तीनों जिलो में वैसे तो राजपूतो का वर्चस्व रहा है और है लेकिन यहां की वैश्य याने बनिया जिन्हें बड़े मारवाड़ी भी कहते है इन्होंने दुनिया भर में अपने व्यापारिक कला के दम पर राज किया--इनको व्यापारिक कलकुशलता से ज्यादा कुछ कर दिखाने की ललक ने इन्हें विश्वपटल पर पहचान दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई--

जिस सीकर,चूरू और झुंझुनू में सुविधाओं का अभाव हो वहां जहा कुछ पाने को ना हो इस इलाके के नौजवान जब मुम्बई,दिल्ली,कलकत्ता गए तब इनके पास खोने को कुछ नही था--इन्होंने जी भर कर रात दिन मेहनत की और कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए बड़ा एम्पायर खड़ा किया--इनकी एक सबसे बड़ी खासियत ये रही कि ये अपने इलाके शेखावटी लोगो को व्यापार धंधे में जोड़ते गए उनको आगे बढ़ाते गए,नए लोगो की टांग खींचने का काम नही किया बल्कि उन्हें सम्बल देकर मेहनत करना सिखाया और उनका मुकाम बनाया

सीकर,चूरू और झुंझुनू जिलो को खाटू श्यामजी भगवान,सालासर बालाजी,शाकम्बरी माता,जीन माता का पूरा आशीर्वाद रहा---

कहते है ना कि --अगर आप धन को कुआ भरकर भी रखोगे और मेहनत लगन से उसे और भरने के बजाय उसे खाली करते रहोगे तो एक दिन धन से भरा कुआं भी खाली हो जाएगा--

शेखावटी के वीर राजपूतो ने जहा देश के माटी की रक्षा की वही यहां के व्यापारियों ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अपना अमूल्य योगदान दिया

जय हो शेखावटी, जय राजस्थान,जय हिंद

जयहो