झाई

झाईयां मेलानिन से भरपूर कोशिकाओं के समूह होते हैं जो गोरे रंग वाले लोगों पर सबसे आसानी से दिखाई देते हैं।[1] झाइयों में मेलानिन बनाने वाली कोशिकाओं या मेलानोसाइट्स की संख्या ज़्यादा नहीं होती बल्कि इनमें मौजूद मेलानोसाइट्स मेलानिन कणों का बहुत ज़्यादा उत्पादन करते हैं जिससे त्वचा की बाहरी कोशिकाओं का रंग बदल जाता है। इस प्रकार झाईयां लेंटिजिन और नेवस से भिन्न होती हैं जो एक छोटे से क्षेत्र में मेलानोसाइट्स के संचय के कारण होती हैं।
निर्माण प्रकिया
[संपादित करें]धूप के संपर्क में आने से झाईयां बनती हैं। यूवी-बी विकिरण के संपर्क में आने से मेलानोसाइट्स सक्रिय हो जाते हैं जिससे मेलानिन का उत्पादन बढ़ जाता है परिणामस्वरूप झाईयां और गहरी और ज़्यादा दिखने लगती हैं।[2] ये मुख्य रूप से चेहरे पर होती हैं हालांकि ये धूप के संपर्क में आने वाली त्वचा के किसी भी हिस्से जैसे कि बाहों या कंधों पर भी हो सकती हैं।
लक्षण और उपचार
[संपादित करें]झाईयां कोई त्वचा का रोग नहीं हैं अक्सर जिन लोगों को झाईयां होती हैं उनमें आमतौर पर फोटो-प्रोटेक्टिव मेलानिन की मात्रा कम होती है और ये यूवी विकिरण के नुकसानदायक असर के प्रति ज़्यादा संवेदनशील होते हैं। यह सलाह दी जाती है कि जिन लोगों की त्वचा पर झाइयां होने की संभावना होती है उन्हें धूप में ज़्यादा देर तक रहने से बचना चाहिए और सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए।[3]
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "फ्रेकल्स". क्लीवलैंड क्लिनिक. अभिगमन तिथि: 27 जून 2026.
- ↑ "फ्रेकल". ब्रिटानिका (अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 27 जून 2026.
- ↑ "फ्रेकल्स". public.iadvl.org. अभिगमन तिथि: 27 जून 2026.