झांसी का किला

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झांसी का किला
Part of बुंदेलखण्ड
झांसी, उत्तर प्रदेश, भारत
Jhansi fort2.JPG
2009 में झांसी का किला
झांसी का किला की उत्तर प्रदेश के मानचित्र पर अवस्थिति
झांसी का किला
झांसी का किला
निर्देशांक25°27′29″N 78°34′31″E / 25.4581258°N 78.5753775°E / 25.4581258; 78.5753775
ऊँचाई285 मीटर
निर्माण जानकारी
स्वामित्वभारत सरकार
जनता हेतु
खुला
हाँ (सुबह 7 से शाम 6 बजे तक)
दशाअच्छी हालत में
इतिहास
सामग्रीपत्तर, चुना
युद्ध/लड़ाइयाँझाँसी की लड़ाई
गैरिसन जानकारी
वर्तमान निवासीपेशवा
झाँसी का दुर्ग (सन १८८२ में)

उत्तर प्रदेश राज्य के झाँसी में बंगरा नामक पहाड़ी पर १६१३ इस्वी में यह दुर्ग ओरछा को बुन्देला राजा बीरसिंह जूदेव ने बनवाया था। 1718ई तक बुंदेलों ने यहाँ राज्य किया उसके बाद इस दुर्ग को छत्रसाल बुन्देला ने ,बाजीराव पेशवा को पुत्र माना था जब अपनी सम्पति का बटवारा किया तो हिस्सा बाजीराव को दिया था जिसमे झाँसी का किला भी था इसके बाद यह मराठाओं का शासन रहा । १८५७ के स्वतंत्रता संग्राम में इसे अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त हुआ।

१९३८ में यह किला केन्द्रीय संरक्षण में लिया गया। यह दुर्ग १५ एकड़ में फैला हुआ है। इसमें २२ बुर्ज और दो तरफ़ रक्षा खाई हैं। नगर की दीवार में १० द्वार थे। इसके अलावा ४ खिड़कियाँ थीं। दुर्ग के भीतर बारादरी, पंचमहल, शंकरगढ़, रानी के नियमित पूजा स्थल शिवमंदिर और गणेश मंदिर जो मराठा स्थापत्य कला के सुन्दर उदाहरण हैं।

कूदान स्थल, कड़क बिजली तोप पर्यटकों का विशेष आकर्षण हैं। फांसी घर को राजा गंगाधर के समय प्रयोग किया जाता था जिसका प्रयोग रानी ने बंद करवा दिया था।

किले के सबसे ऊँचे स्थान पर ध्वज स्थल है जहाँ आज तिरंगा लहरा रहा है। किले से शहर का भव्य नज़ारा दिखाई देता है। यह किला भारतीय पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है और देखने के लिए पर्यटकों को टिकट लेना होता है। वर्ष पर्यन्त देखने जा सकते हैं।यहॉ सड़क तथा रेल मारग दोनो से पहुँचा जा सकता है।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]