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ज्वालामुखी बम

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ज्वालामुखीय बम
(Volcanic bomb)

अन्तरिक्षीय घूर्णन से सुडौल आकार ले चुका "फ्यूसीफॉर्म" या बादामी प्रकार का ज्वालामुखीय बम

जर्मनी के स्ट्रोहन में मौजूद 5 मीटर व्यास और 120 टन वजनी विशालकाय लावा बम
चट्टान का प्रकार आग्नेय चट्टान (बहिर्भेदी - Extrusive)
प्राथमिक संघटन आंशिक रूप से पिघला हुआ लावा (टेफ्रा)
न्यूनतम आकार >64 मिमी (2.5 इंच) से अधिक व्यास
प्रमुख प्रकार बादामी (स्पिंडल), ब्रेड-क्रस्ट, काउ-पाई, गोलाकार
मुख्य जोखिम तीव्र गति का प्रभाव (Impact) और आगजनी

ज्वालामुखीय बम (Volcanic bomb) या लावा बम आंशिक रूप से पिघली हुई चट्टान का एक कूट पिंड (टेफ्रा) होता है, जिसका व्यास (Diameter) 64 मिमी (2.5 इंच) से अधिक होता है। इसका निर्माण तब होता है जब एक सक्रिय ज्वालामुखी अपने उद्गार (Eruption) के दौरान अत्यधिक गाढ़े और विस्कस लावे के टुकड़ों को हवा में तीव्र गति से बाहर फेंकता है। क्योंकि ये बम ज्वालामुखी से बाहर निकलने के बाद हवा में ही ठंडे होकर ठोस होते हैं, इसलिए इन्हें बहिर्भेदी (Extrusive) आग्नेय चट्टान माना जाता है। ज्वालामुखीय बम वेंट या मुख से कई किलोमीटर दूर तक गिर सकते हैं और अपनी हवाई उड़ान के दौरान हवा के घर्षण के कारण अक्सर एक सुडौल एयरोडायनामिक आकार ले लेते हैं।

ये आकार में अत्यधिक विशाल भी हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, वर्ष 1935 में जापान के 'माउंट असामा' ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान 5 से 6 मीटर व्यास वाले विशालकाय बम अपने मुख से 600 मीटर दूर तक जाकर गिरे थे। ज्वालामुखीय बम आबादी वाले क्षेत्रों के लिए एक अत्यंत गंभीर कलीसियाई जोखिम हैं, जो अपनी तीव्र गति और भारी वजन के कारण गंभीर चोटों और मौत का कारण बन सकते हैं। वर्ष 1993 में कोलंबिया के 'गैलेरास' ज्वालामुखी के अचानक फटने से उसकी चोटी के पास मौजूद छह वैज्ञानिकों की मौत इन लावा बमों के प्रहार से ही हुई थी। इसी प्रकार, 16 जुलाई 2018 को हवाई के 'किलाऊआ' (Kilauea) ज्वालामुखी के पास पर्यटकों से भरी एक नाव पर बास्केटबॉल के आकार का एक लावा बम गिरा था, जिससे उसमें सवार 23 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे।[1]

कभी-कभी ये बम हवा में या जमीन पर गिरने के बाद ठंडे होने के दौरान अपनी आंतरिक गैस के भारी दबाव के कारण हवा में ही विस्फोट (Explode) कर देते हैं। इस तरह के धमाके आमतौर पर "ब्रेड-क्रस्ट" (रोटी की पपड़ी जैसी सतह वाले) बमों में सबसे ज्यादा देखे जाते हैं।

ज्वालामुखीय बमों के प्रमुख प्रकार

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मैग्मा की तरलता (Fluidity) और हवा में उनके घूमने की गति के आधार पर इन बमों को अलग-अलग नाम दिए गए हैं:

  • स्पिंडल या बादामी बम (Spindle or Fusiform bombs): जब आंशिक रूप से पिघला हुआ लावा हवा में तैरते समय अपनी धुरी पर लट्टू की तरह तेजी से घूमता है (Spinning), तो वह दोनों सिरों से नुकीला और बीच से चौड़ा होकर बादाम जैसा सुडौल आकार ले लेता है। इसकी एक सतह दूसरी सतह की तुलना में अधिक चिकनी होती है, जो उड़ान के दौरान हवा के घर्षण की दिशा को दर्शाती है।
  • काउ-पाई या गाय के गोबर जैसे बम (Cow pie bombs): जब अत्यधिक तरल और बहुत गर्म लावा कम ऊंचाई से नीचे गिरता है, तो वह जमीन पर टकराने से पहले पूरी तरह ठोस नहीं हो पाता। नतीजतन, वह जमीन से टकराते ही फैल जाता है और गाय के गोबर की तरह एक चपटी, गोलाकार डिस्क का रूप ले लेता है।
  • ब्रेड-क्रस्ट बम (Bread-crust bombs): यदि लावा बम की बाहरी सतह उड़ान के दौरान ठंडी हवा के संपर्क में आकर तुरंत जम जाती है, लेकिन उसका आंतरिक भाग अभी भी गर्म और फैल रहा होता है, तो उसकी बाहरी त्वचा पर गहरी दरारें पड़ जाती हैं। यह देखने में बिल्कुल पकी हुई डबलरोटी या बेक की गई ब्रेड की ऊपरी पपड़ी जैसा दिखाई देता है।
  • रिबन या बेलनाकार बम (Ribbon bombs): ये अत्यधिक तरल मैग्मा के irregular धागों या बूंदों के रूप में वेंट से बाहर निकलते हैं। हवा में ये लंबी पट्टियों या रिबन की तरह टूटकर गिरते हैं। इनका आंतरिक भाग खोखला या बुलबुलों (Vesicles) से भरा होता है।
  • गोलाकार बम (Spherical bombs): यह भी अत्यधिक तरल मैग्मा से बनते हैं, जहाँ हवा में तरल की बूंदों पर काम करने वाला पृष्ठ तनाव (Surface Tension) लावे को पूरी तरह से एक गोल गेंद या गोले के आकार में ढाल देता है।
  1. "Hawaii volcano: At least 23 injured as 'lava bomb' hits tourist boat". USA Today.

बाहरी कड़ियाँ

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