ज्ञान योग

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search



ज्ञान योग ज्ञान और स्वं का जानकारी प्राप्त करने को कहते है। ये अपनी और अपने परिवेश को अनुभव करने के माध्यम से समझना है। स्वामी विवेकानन्द के ज्ञानयोग सम्बन्

धित व्याख्यान, उपदेशों तथा लेखों को लिपिबद्ध कर 'ज्ञानयोग' पुस्तक में संकलित किया है। ज्ञान के माध्यम से ईश्वरीय स्वरूप का ज्ञान, वास्तविक सत्य का ज्ञान ही ज्ञानयोग का लक्ष्य है। स्वामी विवेकानंद द्वारा रचित ज्ञानयोग वेदांत के अंतर्गत सत्यों को बताकर वेदां त के सार रूप में प्रस्तुत है।

एक रूप में ज्ञानयोगी व्यक्ति ज्ञान द् वारा ईश्वरप्राप्ति मार्ग में प्रेरित होता है। स्वामी विवेकानंद द्वारा रचित ज्ञानयोग में मायावाद,मनुष्य का यथार्थ व प्रकृत स्वरूप,माया और मुक्ति,ब्रह्म और जगत,अंतर्जगत,बहिर्जगत,बहुतत्व में एकत्व,ब्रह्म दर्शन,आ त्मा का मुक्त स्वभाव आदि नामों से उनके द्वारा दिये भाषणों का संकलन है।

अब यदि विश्लेषण किया जाये तो







वास्तव में ज्ञान योगी मा

यावाद के अल तत्व को जानकर,अपनी वास्तवकता और वेके अद्वैत म त केअनुरूप आत्मा के वास्तविक स्वरूप क नकर मुक्ति प्रापत करता

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]