जौरासी

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जौरासी
विधान सभा, सल्ट व द्वाराहाट
जौरासी क्षेत्र
देशFlag of India.svg भारत
राज्यउत्तराखंड
जनपद अल्मोड़ा जिला
भाषा
 • आधिकारिकहिंदी
 • बोलचाल की भाषाहिंदी , कुमाऊनी व अन्य
समय मण्डलआईएसटी (यूटीसी+5:30)
PIN263656
टेलीफोन कोड05966
जौरासी का दृश्य
जौरासी का दृश्य

जौरासी, अल्मोड़ा जिले के सल्ट व द्वाराहाट विधानसभाओं में स्थित पर्वतमाला है। यह पर्वतमाला रामगंगाविनोद नदियों के बीच स्थित रमणीय पर्वत श्रृंखला है। यह लगभग 6500 फुट की ऊँची एक मनमोहक पर्वतमाला है। इस पर्वत श्रृंखला को 'जौरासी क्षेत्र' के नाम से भी जाना जाता है।

उत्तराखण्ड में रामगंगा और विनोद नदियों से घिरी यह पर्वत माला अपने आप में किसी आश्चर्य से कम नहीं है, जो राम गंगा और विनोद नदी के संगम केदार से शुरू होकर दूधातोली की सबसे ऊंची चोटी तक पहुचती है। इस पर्वत श्रृंखला में मुख्यतः जौरासी, गैरखेत, घन्याल पोखर, असुर गड़ी, दाणू थान, चौबटिया, गढ़वाल बुंगा, जाड़ापानी, दुर्गा देवी, कलिया लिंगुड़ा, नागचुला खाल और फुलांग पर्वत को जोड़ता हुआ दूधातोली के घनघोर जंगलों में समाहित हो जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह उत्तराखंड के तीन जिल्लों अल्मोड़ा, चमोली और पौड़ी की संयुक्त सीमा पर बसा है। ऊंचाई पर स्तिथ होने के कारण यहां पर पानी की भारी कमी है, जो यहाँ से पलायन का मुख्य कारण भी है। अपार क्षमताओं से भरे इस क्षेत्र में आज केवल कुछ वृद्ध लोग ही गाँव में रह गए हैं।

पृष्ठभूमि[संपादित करें]

जौरासी क्षेत्र का विवरण :

  • विधानसभा क्षेत्र - जौरासी दो विधान सभाओं के बीच स्तिथ है १) सल्ट व २) द्वाराहाट
  • विधानसभा चुनाव २०१७ के अनुसार विधानसभा क्षेत्रों के विधायक-
    • सल्ट - सुरेन्द्र सिंह जीना (भाजपा)
    • द्वाराहाट - महेश नेगी (भाजपा)

जौरासी क्षेत्र में आने वाले गांव :[संपादित करें]

गेवाड़ के गाँवों की लिस्ट

जौरासी, जाला, फड़ीका, जैंठा मल्ला, जैंठा तल्ला, सुरना रेखाडी, सुरना गोपालगाँव, सुरना बग्वालीखेत, तया सुरना, छानी, डांग, भैल्टगाँव, खत्याड़ी मल्ली, खत्याड़ी बिचली, खत्याड़ी तल्ली, कौराली, सेलिपाटली, चमड़गांव, सारतोली, तिमिलखाल, टनहला, बसौली, आदिग्राम कॉनोड़ियां, आदिग्राम फुलोरिया, मलसाखेत, सुखालौ, बग्वालीखेत, बसोली, कोटिड़ा, सीमार, सीमा, सुमंतेश्वर, सारतोली, रुगढ़ई बखाली,आदिग्राम बाग़री, मसिवॉ बाखली, बोहरागाँव, सुनोली, कौगाड, कुसगाँव डांग, हाट, अगरमनराल, पसोली, मैनपुरी, बसनलगाँव, हाट, सतीगाँव, लमकाँसूँ, सिसौड़ियाँ, बाखली, पथरखानी, ककड़ाखत, जयरामबाखल, झलां कारचुली, उडलीखान,परथोला, मुसखन, रोटापानी, बंगारी गांव, मोटातिमिला, कलछिपा जोशी, क्वारीपीगाँव और मोहाण, कौंधर, सन गाँव, बाखली, मनिया ढही, झल्याखत,वीरमदियो, आमाडाली आदि।

चौकोट के गाँव की सूची

जौरासी, कुणाखाल, कालीगाड़, ग्वालबीना,

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मल्ला कफलटाना तल्ला कफलटाना, मल्ला सौगड़ा तल्ला सौगड़ा, गवांखील,मल्ला घनियाल, तल्ला घनियाल, बिचला घनियाल, घनियाल पल्ला, मंगरू, बागोटियाछाना, महगयारी, कलछिपा जोशी, कैहड़गाँव, टामढौन, जोशी पचरूवा, अगयरी पचरूवा, बचुली सीमा, जीठनी खत्ता, बासीसीमा, मोटातिमला, सेलीपाटली, कनारीखिल, मोहाली, सुनोली, टिटरी, गुरना, धौलियागाजर, लंबसीमार, केलानी, बाखली, चौना, सनड़भीड़ा, उप्राड़ी, जैखाल, सबोलीछाना, संसखेत, कुलसीरा, फूटीकुहां आदि।

आदर्श राजकीय इंटर कॉलेज जौरासी[संपादित करें]

आदर्श राजकीय इंटर कॉलेज जौरासी

आदर्श राजकीय इंटर कालेज, जौरासी की स्थापना सन 1959 में की गयी थी। यह विद्यालय उत्तराखडं में सबसे पुराने विद्यालयों में गिना जाता है स्याल्दे व चौखुटिया ब्लॉक में सबसे पहले साइंस साइड भी इसी विद्यालय में शुरू किया गया था। इस समय में विद्यालय में लगभग 465 छात्र व छात्राएं अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। अध्यापकों की भारी कमी होने की बजह से यह विद्यालय अभी बदहाली की मार झेल रह है।

दर्शनीय स्थल[संपादित करें]

  • जौरासी भगवती मंदिर- भगवती मंदिर जौरासी के बीच में स्थित है और बाबा ओमी द्वारा बनाया गया है।
जौरासी मंदिर का दृश्य
  • भैरव मंदिर - जौरासी से 1.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां से हिमालय के दर्शन किये जा सकते हैं। अग्रेजों द्वारा बसाया गया बंगला भी है जो अब फारेस्ट विभाग द्वारा गेस्ट हाउस में तब्दील कर दिया है।
  • असुरगढ़ी मंदिर - लगभग 7000 फुट की ऊंचाई स्तिथ जौरासी क्षेत्र में सबसे ऊँची जगह पर स्तिथ है। ये असुर माता का मंदिर है। स्थानीय लोगों द्वारा इसका नाम बदलकर असुरगढ़ी मंदिर रख दिया है। भाद्र मास की पहली तारीख में घी सक्रांति के दिन यहां पर हर वर्ष मेला भी लगता है।
असुरगढ़ी मंदिर
खूबसूरत दृश्य असुरगढ़ी मंदिर से
  • लखनपुर मंदिर - जौरासी से लगभग 2 किलोमीटर दूर स्तिथ, कत्यूरी राजाओं द्वारा बसाया गया है। यहाँ पर कत्यूरी राजाओं के लड़ाई में प्रयोग किये जाने वाले अस्त्र अभी भी मौजूद हैं।

स्थानीय मेले व त्यौहार[संपादित करें]

  • जौरासी मेला : चैत्र पूर्णिमा के दिन माँ भगवती मंदिर में लगता है।
  • घी सक्रांति : हर वर्ष भाद्र महीने के 1 गते को मनाया जाता है। इस दिन सूर्य, सिंह राशि में प्रवेश करता है इसलिए इसको सिंह संक्रांति भी कहते हैं। इस त्यौहार को पशुओं की रक्षा के रूप में भी मनाया जाता है तथा उनकी पूजा की जाती है और उनको अच्छे पकवान भी खिलाये जाते हैं। इस दिन घी से बने पकवान बनाये जाते हैं।
  • असुरगढ़ी मेला : भाद्र मास की पहली तारीख में घी सक्रांति के दिन यह मेला हर वर्ष मनाया जाता है।
  • अष्टमी मेला : चैत्र मास के नवरात्रियों में अष्टमी के दिन मनाया जाता है। यह मेला देघाट व चौखुटिया दोनों जगह मनाया जाता है। इस दिन माँ काली की पूजा की जाती है। पहले यहाँ पर भैसे की बलि देने की प्रथा थी जिसको अब राज्य सरकार द्वारा बंद करवा दिया गया है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]