जोसफ़ फ़्रित्ज़्ल

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जोसफ फ़्रित्ज़्ल का मामला अप्रैल २००८ में प्रकाश में आया। एलिजा़बेथ फ़्रित्ज़्ल (जन्म - ६ अप्रैल,१९६६) जो आरोपी जोसफ फ़्रित्ज़्ल की पुत्री है ने अपने पिता जोसफ फ़्रित्ज़्ल पर ये आरोप लगाया कि उसने उसे उनके के ही घर के तहखाने में २४ वर्षों तक कैद में रखा और उसे शारीरिक, मानसिक और यौन उत्पीडन किया। उसके पिता द्वारा उसके साथ बनाए गये अनैतिक संबंधो के चलते उसकी ७ संतानें हुई और एक गर्भपात।

तीन बच्चों को उनकी माँ के साथ ही कैद में रखा गया: पुत्री कैरस्टिन, १९; और दो पुत्र स्टिफन, १८ और फेलिक्स, ५। एक अन्य पुत्र माइकल की जन्म के तीन दिन बाद ही साँस की परेशानी के कारण मृत्यु हो गई। अन्य तीन बच्चों का पालन फ़्रित्ज़्ल और उसकी पत्नी रोज़मेरी द्वारा किया गया। इन तीन बच्चों के संबंध में उसने ये बहाना बनाया की ये तीनों उसे सड़क पर पड़े हुए मिले।

मामले का इतिहास[संपादित करें]

२४ अगस्त १९८४ के दिन एलिज़ाबेथ के पिता ने उसे एक दरवाज़े को तहखाने में रखने के लिए सहायता के लिए बुलाया और इथर से उसे बेहोश करके एक छुपे हुए छोटे तहखाने में बंद कर दिया और २६ अप्रैल २००८ के अपने रिहाई के दिन तक वो वहीँ रही।

एलिज़ाबेथ के यूँ अचानक से गायब हो जाने पर उसकी माँ ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई, लेकिन जोसफ फ़्रित्ज़्ल ने एक मनगड़ंत कहानी बनाई की वो अपनी इच्छा से घर छोड़ कर भागी है और उसने ब्रौनाऊ नामक कसबे में किसी धार्मिक सांप्रदाय की सदस्यता ले ली है। इसके लिए उसने अपनी पुत्री द्वारा लिखे गए पत्र को भी पुलिस को दिखाया और फिर ये मामला बंद कर दिया गया। इन २४ वर्षों की कैद के दौरान किसी को भी तहखाने में आने की अनुमति नहीं थी और उसकी पत्नी काफ़ी तक लेकर नीचे नहीं आ सकती थी। मामले की सुनवाई के दौरान फ़्रित्ज़्ल की साली ने बताया की वो प्रतिदिन प्रातः ९ बजे तहखाने में चला जाया करता था और कभी-कभी देर रात तक वहीँ रुका करता था। उनके घर में १२ वर्षों तक रहे एक किरायदार ने बताया की कभी-कभी तहखाने से ज़ोर-ज़ोर की आवाज़ें आती थी और पूछने पर फ़्रित्ज़्ल उन आवाज़ों को मशीन द्बारा काम करने से आ रहीं आवाजें बताता था।

मामले का खुलासा[संपादित करें]

बहारी कड़ियाँ[संपादित करें]