जॉन होपफील्ड
| जॉन होपफील्ड | |
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| जन्म |
15 जुलाई 1933 शिकागो, संयुक्त राज्य अमेरिका |
| नागरिकता | अमेरिकी |
| शिक्षा की जगह | स्वार्थमोर कॉलेज, कॉर्नेल विश्वविद्यालय |
| प्रसिद्धि का कारण | होपफील्ड नेटवर्क, मशीन लर्निंग |
| पुरस्कार | भौतिकी में नोबेल पुरस्कार (2024) |
जॉन जोसेफ होपफील्ड (जन्म 15 जुलाई 1933) एक अत्यंत प्रख्यात और विश्वविख्यात अमेरिकी सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी हैं, जिन्हें भौतिकी, जीव विज्ञान और कृत्रिम तंत्रिका नेटवर्क (मशीन लर्निंग) के क्षेत्र में उनके ऐतिहासिक अनुसंधानों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है।[1] वर्ष 2024 में उन्हें भौतिकी के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व और अत्यंत महत्वपूर्ण वैज्ञानिक योगदान के लिए जेफ्री हिंटन के साथ संयुक्त रूप से भौतिकी के सर्वोच्च सम्मान, नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।[2] यह महान सम्मान उन्हें कृत्रिम तंत्रिका नेटवर्क के माध्यम से मशीन लर्निंग (यंत्र अधिगम) की मूलभूत खोजों और 'होपफील्ड नेटवर्क' का अत्यंत नवीन और क्रांतिकारी सिद्धांत प्रस्तुत करने के लिए प्रदान किया गया था।[3] उनका यह अत्यंत महत्वपूर्ण शोध आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कंप्यूटर विज्ञान को स्पष्ट रूप से समझने में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर माना जाता है।[4]
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
[संपादित करें]उनका जन्म 15 जुलाई 1933 को संयुक्त राज्य अमेरिका के इलिनोइस राज्य में स्थित शिकागो नामक एक अत्यंत प्रमुख नगर में हुआ था। उनके माता-पिता दोनों ही अत्यंत प्रख्यात भौतिक विज्ञानी थे, जिसके कारण बचपन से ही उनके घर में विज्ञान, तार्किक विश्लेषण और ज्ञानार्जन का एक अत्यंत उत्कृष्ट वातावरण विद्यमान रहता था।[5] बचपन से ही उनकी विज्ञान और अत्यंत जटिल गणितीय प्रश्नों को सुलझाने में अत्यधिक रुचि थी। इसी स्वाभाविक वैज्ञानिक जिज्ञासा ने उन्हें भौतिकी के क्षेत्र में अपना करियर बनाने के लिए प्रेरित किया।[6]
अपनी प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा उत्कृष्ट रूप से पूर्ण करने के पश्चात, उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए पेंसिल्वेनिया के अत्यंत प्रतिष्ठित स्वार्थमोर कॉलेज में प्रवेश लिया। इसी महान संस्थान से उन्होंने वर्ष 1954 में भौतिकी विषय में अपना स्नातक अत्यंत उत्कृष्ट अंकों के साथ पूर्ण किया।[7] इसके पश्चात वे अपना अनुसंधान कार्य जारी रखने के लिए कॉर्नेल विश्वविद्यालय चले गए। इसी प्रतिष्ठित संस्थान से उन्होंने वर्ष 1958 में भौतिकी में अपनी विद्यावाचस्पति (डॉक्टरेट) की सर्वोच्च उपाधि सफलतापूर्वक प्राप्त की। यहाँ उन्होंने ठोस अवस्था भौतिकी पर अपना बहुत ही महत्वपूर्ण शोध कार्य पूर्ण किया था, जिसने उनके भविष्य के सबसे बड़े वैज्ञानिक सिद्धांतों की अत्यंत मजबूत नींव रखी।[8]
विशेषज्ञता और सिद्धांत
[संपादित करें]उनके अकादमिक शोध और विशेषज्ञता का मुख्य केंद्र ठोस अवस्था भौतिकी, जीव भौतिकी और कृत्रिम तंत्रिका नेटवर्क था। वर्ष 1982 में उन्होंने विज्ञान की दुनिया में एक अत्यंत नवीन और क्रांतिकारी सिद्धांत प्रस्तुत किया, जिसे विज्ञान जगत में उनके सम्मान में 'होपफील्ड नेटवर्क' के नाम से जाना जाता है।[9] उन्होंने भौतिकी के 'स्पिन ग्लास' (चुंबकीय प्रणालियों) के गणितीय सिद्धांतों का उपयोग करके यह प्रमाणित किया कि मस्तिष्क की तरह एक कंप्यूटर भी सूचनाओं (यादों) को कैसे संगृहीत और पुनः प्राप्त कर सकता है।[10] उनका यह सिद्धांत इस बात की अत्यंत सटीक गणितीय व्याख्या करता है कि यदि कंप्यूटर को कोई अधूरी या धुंधली तस्वीर दी जाए, तो वह अपने नेटवर्क की ऊर्जा को कम करके उस तस्वीर का सबसे सही और स्पष्ट रूप कैसे खोज सकता है।
अनुसंधान
[संपादित करें]विद्यावाचस्पति की उपाधि प्राप्त करने के पश्चात उन्होंने बेल प्रयोगशालाओं (बेल लैब्स) में एक अत्यंत समर्पित शोधकर्ता के रूप में कार्य किया। उसके पश्चात उन्होंने प्रिंसटन विश्वविद्यालय और कैलिफोर्निया प्रौद्योगिकी संस्थान (कैलटेक) में रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान के विभागों में भी महत्वपूर्ण शोध किए।[11] उनके अनुसंधानों ने यह सिद्ध कर दिया कि भौतिक विज्ञान के अत्यंत जटिल समीकरणों का उपयोग करके जैविक प्रणालियों (जैसे मस्तिष्क) की कार्यप्रणाली की नकल की जा सकती है।
उनकी इस अभूतपूर्व खोज ने पहली बार दुनिया भर के वैज्ञानिकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता का निर्माण करने का अत्यंत मजबूत गणितीय आधार प्रदान किया। उनके द्वारा विकसित किए गए पैटर्न पहचान (चित्रों और ध्वनियों को पहचानने) के सिद्धांतों के बिना आज के अत्यंत उन्नत स्मार्टफोन, चेहरे पहचानने वाले कैमरे और भाषा अनुवादक सॉफ़्टवेयर की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।[12]
पुरस्कार और मान्यता
[संपादित करें]भौतिकी और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में उनके इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व अनुसंधान के लिए उन्हें वर्ष 2024 में भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया।[13] इस महान पुरस्कार ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनके द्वारा किए गए शोध को एक नई और अत्यधिक प्रतिष्ठित मान्यता प्रदान की। नोबेल पुरस्कार के अतिरिक्त उन्हें दुनिया भर के कई अत्यंत प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संगठनों द्वारा बहुत ही बड़े सम्मानों से नवाजा गया। वर्ष 2001 में उन्हें सैद्धांतिक भौतिकी के क्षेत्र में उनके अत्यंत उत्कृष्ट योगदान के लिए 'डिराक पदक' से अलंकृत किया गया था।[14] इसके अतिरिक्त उन्हें अल्बर्ट आइंस्टीन पुरस्कार और बेंजामिन फ्रैंकलिन पदक से भी सम्मानित किया गया।
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "जॉन होपफील्ड की जीवनी और तथ्य". नोबेल पुरस्कार समिति. अभिगमन तिथि: 3 जून 2026.
- ↑ "दो वैज्ञानिकों ने जीता 2024 का भौतिकी नोबेल". द न्यूयॉर्क टाइम्स. 8 अक्टूबर 2024. अभिगमन तिथि: 3 जून 2026.
- ↑ होपफील्ड, जॉन (1982). "तंत्रिका नेटवर्क और भौतिक प्रणालियां". राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी की कार्यवाही. 79: 2554–2558.
- ↑ स्मिथ, रॉबर्ट (2020). आधुनिक भौतिकी और तंत्रिका नेटवर्क. विज्ञान शिक्षा प्रकाशन.
- ↑ डेविस, पॉल (2015). होपफील्ड का प्रारंभिक जीवन और विज्ञान. भौतिकी शिक्षा प्रकाशन.
- ↑ जॉनसन, माइकल (2018). "महान भौतिक विज्ञानियों का प्रारंभिक जीवन". प्रायोगिक भौतिकी पत्रिका. 25: 112–118.
- ↑ "स्वार्थमोर कॉलेज के पूर्व छात्र ने जीता नोबेल". स्वार्थमोर कॉलेज. अभिगमन तिथि: 3 जून 2026.
- ↑ "कॉर्नेल विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञानी". कॉर्नेल विज्ञान संकाय. अभिगमन तिथि: 3 जून 2026.
- ↑ विलियम्स, जॉर्ज (2021). मशीन लर्निंग के नए सिद्धांत. स्प्रिंगर प्रकाशन.
- ↑ एंडरसन, थॉमस (2022). "पदार्थ विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता". विज्ञान प्रगति. 45: 200–210.
- ↑ हैरिस, स्टीवन (2019). कृत्रिम बुद्धिमत्ता का रहस्य और भौतिकी. वैश्विक विज्ञान प्रकाशन.
- ↑ टेलर, रिचर्ड (2023). "भविष्य की तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता". नेचर भौतिकी पत्रिका. 15: 78–85.
- ↑ "2024 भौतिकी नोबेल पुरस्कार का सारांश". नोबेल फाउंडेशन. अभिगमन तिथि: 3 जून 2026.
- ↑ क्लार्क, जेम्स (2025). नोबेल विजेताओं का ऐतिहासिक सफर. ऑक्सफोर्ड विज्ञान प्रकाशन.