जॉन रॉबर्ट श्रीफर
| जॉन रॉबर्ट श्रीफर | |
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वर्ष 1972 में जॉन रॉबर्ट श्रीफर | |
| जन्म |
31 मई 1931 ओक पार्क, इलिनोइस, संयुक्त राज्य अमेरिका |
| मौत |
27 जुलाई 2019 तल्हासी, फ्लोरिडा, संयुक्त राज्य अमेरिका |
| नागरिकता | संयुक्त राज्य अमेरिका |
| शिक्षा की जगह | मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान, इलिनोइस विश्वविद्यालय (विद्यावाचस्पति) |
| प्रसिद्धि का कारण | बी.सी.एस. सिद्धांत, एस.एस.एच. मॉडल, श्राइफर-वोल्फ परिवर्तन |
| पुरस्कार | भौतिकी में नोबेल पुरस्कार (1972), राष्ट्रीय विज्ञान पदक (1983), कॉमस्टॉक पुरस्कार (1968) |
जॉन रॉबर्ट श्रीफर (31 मई 1931 – 27 जुलाई 2019) आधुनिक विज्ञान जगत के एक मूर्धन्य अमेरिकी सैद्धांतिक भौतिकशास्त्री और अप्रतिम वैज्ञानिक अन्वेषक थे।[1] उन्होंने संघनित पदार्थ भौतिकी (कंडेंस्ड मैटर फिजिक्स) के परिदृश्य को अपनी तीक्ष्ण मेधा से सर्वदा के लिए परिवर्तित कर दिया। उनकी विश्वव्यापी ख्याति मुख्य रूप से 'अतिचालकता' (सुपरकंडक्टिविटी) के क्षेत्र में किए गए उनके युगांतरकारी शोध के कारण है।[2]
वे महान वैज्ञानिक जॉन बर्दीन और लियोन कूपर के साथ मिलकर अतिचालकता के प्रथम सफल क्वांटम विवरण, जिसे विज्ञान जगत में 'बी.सी.एस. सिद्धांत' (BCS Theory) के नाम से जाना जाता है, के सह-संस्थापक थे।[3] इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व वैज्ञानिक योगदान के लिए इन तीनों भौतिकशास्त्रियों को वर्ष 1972 में संयुक्त रूप से भौतिकी में नोबेल पुरस्कार से अलंकृत किया गया था।[4] श्रीफर की गणितीय अंतर्दृष्टि ने क्वांटम यांत्रिकी के मूलभूत सिद्धांतों को एक नवीन आयाम प्रदान किया।
प्रारंभिक जीवन एवं विद्यार्जन
[संपादित करें]जॉन रॉबर्ट श्रीफर का जन्म 31 मई 1931 को संयुक्त राज्य अमेरिका के इलिनोइस राज्य में स्थित ओक पार्क नामक नगर में हुआ था। उनके पिता का नाम जॉन हेनरी श्रीफर और माता का नाम लुईस एंडरसन था।[5] वर्ष 1940 में उनका परिवार न्यूयॉर्क चला गया और तत्पश्चात 1947 में यूस्टिस, फ्लोरिडा में स्थायी रूप से बस गया। बाल्यकाल से ही उनके भीतर प्रकृति और यंत्रों के रहस्यों को जानने की उत्कट पिपासा विद्यमान थी। विद्यालयी दिनों में वे हस्तनिर्मित रॉकेट बनाने और 'हैम रेडियो' के संचालन में गहरी अभिरुचि रखते थे, जिसने उन्हें विद्युत अभियांत्रिकी (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग) की ओर आकर्षित किया।[6]
वर्ष 1949 में उच्च विद्यालय की शिक्षा पूर्ण करने के उपरांत, उन्होंने विश्व-प्रसिद्ध 'मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान' (एम.आई.टी.) में प्रवेश लिया। प्रारंभ में उन्होंने दो वर्षों तक विद्युत अभियांत्रिकी का अध्ययन किया, परंतु अपने कनिष्ठ वर्ष (जूनियर ईयर) में उन्होंने भौतिकी को अपने मुख्य विषय के रूप में चुन लिया।[7] वर्ष 1953 में उन्होंने प्रख्यात वैज्ञानिक जॉन सी. स्लेटर के प्रखर मार्गदर्शन में भारी परमाणुओं के विषय पर अपना शोध प्रबंध प्रस्तुत करते हुए स्नातक की उपाधि प्राप्त की।
ठोस अवस्था भौतिकी (सॉलिड-स्टेट फिजिक्स) में अपनी गहन रुचि के कारण, श्रीफर ने इलिनोइस विश्वविद्यालय (अर्बाना-शैंपेन) से अपनी स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट की शिक्षा आरंभ की। वहाँ उनकी विलक्षण प्रतिभा को देखते हुए उन्हें तुरंत ही महान भौतिकशास्त्री जॉन बर्दीन के शोध सहायक के रूप में नियुक्त कर लिया गया।[8]
बी.सी.एस. सिद्धांत का युगांतरकारी अन्वेषण
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श्रीफर की वैज्ञानिक यात्रा का सबसे स्वर्णिम अध्याय उनके शोध के तीसरे वर्ष में उद्घाटित हुआ, जब वे जॉन बर्दीन और लियोन कूपर के साथ अतिचालकता की रहस्यमयी प्रकृति को सुलझाने के कार्य में संलग्न हुए। अतिचालकता वह अवस्था है जिसमें कोई पदार्थ अत्यंत निम्न तापमान पर विद्युत धारा का बिना किसी प्रतिरोध के प्रवाह करता है।[9]
जनवरी 1957 की एक घटना विज्ञान के इतिहास में अत्यंत प्रसिद्ध है। श्रीफर न्यूयॉर्क नगर की भूमिगत रेल (सबवे) में यात्रा कर रहे थे, तभी उनके मस्तिष्क में अतिचालक इलेक्ट्रॉनों की आधारभूत अवस्था (ग्राउंड स्टेट) का गणितीय वर्णन करने का एक अद्भुत विचार आया।[10] उनके सहयोगी लियोन कूपर ने यह खोज की थी कि अतिचालक पदार्थ के भीतर इलेक्ट्रॉन जोड़े (जिन्हें 'कूपर पेयर' कहा जाता है) बनाकर चलते हैं। श्रीफर की सबसे महान उपलब्धि यह थी कि उन्होंने सांख्यिकीय यांत्रिकी का उपयोग करते हुए किसी एक जोड़े के बजाय, एक ही समय में सभी 'कूपर पेयर्स' के सामूहिक व्यवहार का वर्णन करने वाले अत्यंत जटिल समीकरणों की रचना की।[11]
इलिनोइस लौटने के अगले ही दिन उन्होंने अपने ये समीकरण जॉन बर्दीन को दिखाए, जिन्होंने तुरंत पहचान लिया कि यह अतिचालकता की समस्या का अंतिम और अकाट्य समाधान है। इसी को आज विज्ञान जगत में 'बी.सी.एस. सिद्धांत' के नाम से जाना जाता है, जिसने भौतिकी के तीस वर्ष पुराने रहस्य को सदा के लिए सुलझा दिया।[12]
अकादमिक वृत्ति और अन्य वैज्ञानिक योगदान
[संपादित करें]अपनी 'विद्यावाचस्पति' (पीएच.डी.) पूर्ण करने के पश्चात, उन्होंने इंग्लैंड के बर्मिंघम विश्वविद्यालय और डेनमार्क के नील्स बोहर संस्थान में अपने शोध कार्य को निरंतर रखा। वर्ष 1962 में वे पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय में भौतिकी के प्राध्यापक नियुक्त हुए, जहाँ उन्होंने कई वर्षों तक अपनी बहुमूल्य सेवाएँ प्रदान कीं।[13]
वर्ष 1980 में वे कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सांता बारबरा चले गए और वहाँ 'कावली सैद्धांतिक भौतिकी संस्थान' के निदेशक के रूप में कार्य किया। वर्ष 1992 में फ्लोरिडा स्टेट विश्वविद्यालय ने उन्हें 'राष्ट्रीय उच्च चुंबकीय क्षेत्र प्रयोगशाला' (NHMFL) का मुख्य वैज्ञानिक नियुक्त किया।[14] बी.सी.एस. सिद्धांत के अतिरिक्त, उन्होंने बहु-पिंड भौतिकी (मैनी-बॉडी फिजिक्स) में 'श्राइफर-वोल्फ परिवर्तन' और सुचालक बहुलकों (कंडक्टिंग पॉलीमर्स) को समझाने के लिए 'एस.एस.एच. मॉडल' (SSH model) का भी प्रतिपादन किया, जो आज भी अत्यंत प्रासंगिक है।[15]
व्यक्तिगत जीवन एवं देहावसान
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अपने अकादमिक उत्कर्ष के साथ-साथ श्रीफर के जीवन के उत्तरार्ध में एक अत्यंत दुखद घटना घटी। 24 सितंबर 2004 को, निलंबित अनुमति पत्र (ड्राइविंग लाइसेंस) के साथ वाहन चलाते समय, वे कैलिफोर्निया में एक भयानक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए, जिसमें एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई और सात अन्य घायल हो गए।[16] ऐसा माना जाता है कि वाहन चलाते समय उन्हें नींद आ गई थी। इस दुर्घटना के लिए उन्हें 2005 में न्यायालय द्वारा दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई, जिसे उन्होंने सैन डिएगो स्थित रिचर्ड जे. डोनोवन सुधार गृह में व्यतीत किया।[17]
जुलाई 2019 के अंत में (27 जुलाई), 88 वर्ष की आयु में फ्लोरिडा के तल्हासी स्थित एक देखभाल केंद्र में नींद के दौरान ही इस महान अन्वेषक का शांतिपूर्ण देहावसान हो गया।[18] उनके निधन से विज्ञान जगत ने अपने एक अत्यंत मेधावी और दूरदर्शी सिद्धांतकार को खो दिया।
प्रमुख सम्मान और पुरस्कार
[संपादित करें]विज्ञान के क्षेत्र में उनके अप्रतिम और दूरगामी योगदान के लिए उन्हें अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से अलंकृत किया गया:
- कॉमस्टॉक पुरस्कार (1968) - राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी द्वारा लियोन कूपर के साथ संयुक्त रूप से।[19]
- ओलिवर ई. बकले पुरस्कार (1968) - अमेरिकन फिजिकल सोसाइटी द्वारा।[20]
- भौतिकी में नोबेल पुरस्कार (1972) - जॉन बर्दीन और लियोन कूपर के साथ संयुक्त रूप से।
- राष्ट्रीय विज्ञान पदक (1983) - तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन द्वारा।[21]
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "John Robert Schrieffer - American physicist". Encyclopedia Britannica. अभिगमन तिथि: 1 जून 2026.
- ↑ "J. Robert Schrieffer, 88, Dies; Won Nobel for Superconductivity". The New York Times. 27 जुलाई 2019. अभिगमन तिथि: 1 जून 2026.
- ↑ Tinkham, Michael (2004). Introduction to Superconductivity. Dover Publications.
- ↑ "The Nobel Prize in Physics 1972: J. Robert Schrieffer". Nobel Prize Outreach AB. अभिगमन तिथि: 1 जून 2026.
- ↑ "J. Robert Schrieffer - Biographical". Nobel Prize Outreach AB. अभिगमन तिथि: 1 जून 2026.
- ↑ Langer, J. S. (2019). "John Robert Schrieffer (1931–2019)". Nature. 572: 584.
- ↑ "Notable MIT Physics Alumni". MIT Department of Physics. अभिगमन तिथि: 1 जून 2026.
- ↑ "J. Robert Schrieffer and the BCS Theory". University of Illinois. अभिगमन तिथि: 1 जून 2026.
- ↑ Schrieffer, J. R. (1964). Theory of Superconductivity. W. A. Benjamin.
- ↑ "J. Robert Schrieffer, Nobel laureate in physics, dies at 88". The Washington Post. 28 जुलाई 2019. अभिगमन तिथि: 1 जून 2026.
- ↑ Bardeen, J.; Cooper, L. N.; Schrieffer, J. R. (1957). "Theory of Superconductivity". Physical Review. 108 (5): 1175–1204.
- ↑ "July 1957: BCS Theory of Superconductivity Published". American Physical Society. अभिगमन तिथि: 1 जून 2026.
- ↑ "History of Penn Physics". University of Pennsylvania. अभिगमन तिथि: 1 जून 2026.
- ↑ "History of the National MagLab". National High Magnetic Field Laboratory. अभिगमन तिथि: 1 जून 2026.
- ↑ Su, W. P.; Schrieffer, J. R.; Heeger, A. J. (1979). "Solitons in Polyacetylene". Physical Review Letters. 42 (25): 1698–1701.
- ↑ "Nobel Laureate Sentenced to 2 Years in Deadly Crash". Los Angeles Times. 8 नवंबर 2005. अभिगमन तिथि: 1 जून 2026.
- ↑ "Nobel laureate gets two years for fatal car crash". Nature. 9 नवंबर 2005. अभिगमन तिथि: 1 जून 2026.
- ↑ "Nobel Laureate John Robert Schrieffer Dies at 88". APS News. अक्टूबर 2019. अभिगमन तिथि: 1 जून 2026.
- ↑ "Comstock Prize in Physics". National Academy of Sciences. अभिगमन तिथि: 1 जून 2026.
- ↑ "Oliver E. Buckley Condensed Matter Physics Prize". American Physical Society. अभिगमन तिथि: 1 जून 2026.
- ↑ "J. Robert Schrieffer - National Medal of Science". National Science and Technology Medals Foundation. अभिगमन तिथि: 1 जून 2026.